खेल

साल्ट लेक में ईस्ट बंगाल को 1-0 से हराकर 22वीं बार जीती IFA शील्ड, डूरंड कप की हार का लिया बदला

भारतीय फुटबॉल के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक मुकाबलों में से एक 'कोलकाता डर्बी' ने एक बार फिर खेल प्रेमियों को रोमांचित कर दिया। कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन (साल्ट लेक स्टेडियम) में गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 की शाम खचाखच भरे दर्शकों के सामने खेले गए बहुचर्चित IFA शील्ड फाइनल में मोहन बागान सुपर जायंट ने अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी ईस्ट बंगाल को 1-0 के करीबी अंतर से मात देकर चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम कर ली। मुकाबले का एकमात्र और निर्णायक गोल समीर ज़ेल्जकोविक ने पहले हाफ के दौरान दागा, जिसने पूरे मुकाबले की दिशा तय कर दी। मैच खत्म होने की अंतिम सीटी बजते ही स्टेडियम में मौजूद हजारों मेरिनर्स समर्थक जश्न में डूब गए। मोहन बागान के लिए यह ऐतिहासिक 22वां IFA शील्ड खिताब है, जिसके साथ उन्होंने यह साबित कर दिया कि दबाव के बड़े मैचों में उनका अनुभव और रणनीति बेजोड़ है।

डूरंड कप के जख्मों पर लगाया मरहम: मेरिनर्स ने मैदान पर दिया आलोचकों को जवाब

यह मुकाबला मोहन बागान के लिए केवल एक खिताब जीतने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह उनके आत्मसम्मान की लड़ाई थी। इसी सीजन के शुरुआती दौर में डूरंड कप के खिताबी मुकाबले में ईस्ट बंगाल ने मोहन बागान को 4-1 से करारी शिकस्त देकर गहरा झटका दिया था। उस शर्मनाक हार के बाद टीम के संतुलन, रणनीति और खिलाड़ियों के जज्बे पर तमाम सवाल खड़े किए जा रहे थे। ऐसे में इस फाइनल में उतरते समय मोहन बागान के खिलाड़ियों पर अपनी साख बचाने का भारी दबाव था। बागान के योद्धाओं ने मैदान पर उतरकर आलोचकों को अपने खेल से जवाब दिया। पूरे 90 मिनट तक चले इस कड़े मुकाबले में उन्होंने न सिर्फ शुरुआती बढ़त बनाई, बल्कि ईस्ट बंगाल के हर आक्रामक प्रयास को नाकाम करते हुए अपनी बढ़त को अंत तक सुरक्षित रखा। यह जीत आगामी इंडियन सुपर लीग (ISL) अभियान के आगाज से ठीक पहले टीम के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचाने वाली साबित होगी।

थके हुए सितारे और कड़ा शेड्यूल: इंटरनेशनल ड्यूटी से सीधे मैदान में उतरे खिलाड़ी

इस फाइनल मुकाबले की सबसे बड़ी चुनौती दोनों टीमों, खासकर मोहन बागान के लिए खिलाड़ियों की शारीरिक थकान और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल का व्यस्त शेड्यूल रहा। भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने हाल ही में पनामा, ब्राजील और उरुग्वे जैसी मजबूत अंतरराष्ट्रीय टीमों के खिलाफ अपना तीन मैचों का विंडो अभियान पूरा किया था, जिसका आखिरी मैच 6 अक्टूबर को ही खेला गया था। राष्ट्रीय ड्यूटी खत्म होने के महज 48 घंटे के भीतर खिलाड़ी 8 अक्टूबर के इस हाई-वोल्टेज फाइनल के लिए सीधे क्लब से जुड़े। ईस्ट बंगाल की तरफ से जय गुप्ता राष्ट्रीय टीम के शिविर से लौटकर खेल रहे थे, जबकि मोहन बागान की शुरुआती प्लेइंग इलेवन में तीन ऐसे प्रमुख खिलाड़ी शामिल थे जो बिना किसी पर्याप्त आराम के सीधे मैदान में उतरे थे। इस जबर्दस्त शारीरिक तनाव के बावजूद खिलाड़ियों ने मैदान पर जिस ऊर्जा और पेशेवर अंदाज का प्रदर्शन किया, उसने फुटबॉल पंडितों को भी हैरान कर दिया।

गोल के बाद समीर ज़ेल्जकोविक का बयान और डिफेंस की परीक्षा

मुकाबले के पहले हाफ में जब मैच बेहद संतुलित स्थिति में चल रहा था, तभी समीर ज़ेल्जकोविक ने मिले मौके को भुनाते हुए गेंद को जाल में उलझा दिया और मोहन बागान को 1-0 की अनमोल बढ़त दिला दी। मैच के बाद अपने इस मैच-विनिंग प्रदर्शन पर बात करते हुए समीर ने कहा कि यह पल उनके लिए बेहद खास और शानदार है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। एक गोल से पिछड़ने के बाद ईस्ट बंगाल की टीम ने गेंद पर काफी देर तक अपना नियंत्रण बनाए रखा और बराबरी हासिल करने के लिए चौतरफा हमले बोले। हालांकि, मोहन बागान का रक्षात्मक ढांचा बेहद अनुशासित और संगठित नजर आया। मेरिनर्स ने बेवजह के जोखिम लेने से परहेज किया और अपनी रक्षापंक्ति को अभेद्य दीवार में तब्दील कर दिया।

सेमीफाइनल की दो अलग कहानियां और अंतिम पलों का रोमांच

अगर दोनों टीमों के फाइनल तक के सफर पर नजर डालें, तो दोनों का रास्ता पूरी तरह जुदा था। ईस्ट बंगाल ने सेमीफाइनल मुकाबले में नॉर्थईस्ट यूनाइटेड को 7-2 के विशाल अंतर से रौंदकर फाइनल का टिकट कटाया था, जिसमें डेविड लालहलनसांगा ने सनसनीखेज हैट्रिक जमाई थी। लेकिन फाइनल के महामुकाबले में ईस्ट बंगाल की वही फॉरवर्ड लाइन बागान के डिफेंस के आगे बेबस नजर आई। दूसरी ओर, मोहन बागान ने फाइनल तक पहुंचने के लिए बेहद कठिन और संघर्षपूर्ण रास्ता तय किया था। पंजाब एफसी के खिलाफ उनका सेमीफाइनल मुकाबला निर्धारित और अतिरिक्त समय के 120 मिनट तक गोलरहित बराबरी पर रहा था, जिसके बाद गोलकीपर विशाल कैथ ने पेनल्टी शूटआउट में दो शानदार पेनल्टी बचाकर टीम को खिताबी जंग में पहुंचाया था।

फाइनल के अंतिम 15-20 मिनटों में ईस्ट बंगाल के मुख्य कोच ने आक्रामकता बढ़ाने के लिए एके लोबा और लुकाज़ ज़्वोलिंस्की जैसे ताजा दम स्ट्राइकरों को मैदान में झोंका। इसके बावजूद ईस्ट बंगाल की टीम पेनल्टी बॉक्स के आखिरी हिस्से में कोई स्पष्ट मौका बनाने में नाकाम रही। इंजरी और एक्स्ट्रा टाइम में ईस्ट बंगाल ने लगातार कई कॉर्नर हासिल करके बागान पर भारी दबाव बनाया, लेकिन मोहन बागान के गोलकीपर और डिफेंडरों ने हवा और जमीन दोनों पर गेंद को सुरक्षित क्लियर करते हुए ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित की। लगातार दूसरे सीजन में ईस्ट बंगाल को हराकर IFA शील्ड जीतना मोहन बागान के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह दर्ज हो गया है।

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