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सावधान! गर्मियों में ज्यादातर लोग कर रहे हैं ये 5 बड़ी भूल, देश के तीन दिग्गज डॉक्टरों ने दी कड़ी चेतावनी

देशभर में इस समय चिलचिलाती धूप और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का कहर जारी है। थर्मामीटर का पारा लगातार आसमान छू रहा है और उमस ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। इस जानलेवा गर्मी और लू (हिटवेव) से बचने के लिए हर कोई अपने-अपने तरीके से जद्दोजहद में जुटा हुआ है। लेकिन इसी बीच चिकित्सा जगत से एक बेहद डरावनी और सचेत करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। देश के तीन सबसे जाने-माने और वरिष्ठ डॉक्टरों ने खुलासा किया है कि गर्मियों के इस मौसम में अधिकांश लोग अनजाने में कुछ ऐसी गंभीर गलतियां कर रहे हैं, जो उन्हें सीधा अस्पताल के आईसीयू (ICU) तक पहुंचा सकती हैं। डॉक्टरों ने इन जानलेवा आदतों को लेकर देशवासियों को तुरंत संभलने की सलाह दी है। धूप से आते ही फ्रिज का ठंडा पानी पीना सबसे बड़ा खतरा अक्सर देखा जाता है कि जब लोग बाहर कड़कती धूप और गर्मी से झुलसते हुए घर वापस लौटते हैं, तो राहत पाने के लिए तुरंत फ्रिज खोलकर बर्फ जैसा ठंडा पानी या कोल्ड ड्रिंक गटक लेते हैं। इस आदत पर देश के शीर्ष कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) ने गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जब हमारा शरीर बाहर के अत्यधिक तापमान से अचानक ठंडे वातावरण में आता है और हम बर्फ का पानी पीते हैं, तो शरीर का 'थर्मोरेगुलेशन सिस्टम' पूरी तरह बिगड़ जाता है। यह अचानक हुआ बदलाव ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाओं) को सिकोड़ देता है, जिससे दिल की धड़कन अचानक रुकने यानी कार्डिएक अरेस्ट या ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। धूप से आने के बाद कम से कम 15 मिनट तक सामान्य तापमान वाले पानी या मटके के पानी का ही सेवन करना चाहिए। एसी से तुरंत धूप में और धूप से सीधे एसी में जाना पड़ सकता है भारी ऑफिस, घरों या कारों में एयर कंडीशनर (AC) का तापमान 16 या 18 डिग्री पर रखकर बैठना और फिर अचानक 40 से 45 डिग्री वाली तपती धूप में निकल जाना, इस सीजन की दूसरी सबसे आम लेकिन खतरनाक भूल है। देश के विख्यात पल्मोनोलॉजिस्ट (चेस्ट विशेषज्ञ) के मुताबिक, तापमान के इस बेहद तीव्र और अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) अचानक घुटने टेक देती है। इसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में 'थर्मल शॉक' कहा जाता है। इसके चलते लोगों में गंभीर रूप से निमोनिया, तेज बुखार, गले में इन्फेक्शन, अचानक ब्लड प्रेशर लो होना और अस्थमा का अटैक आने जैसी शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि एसी का तापमान हमेशा 24 से 26 डिग्री के बीच रखें ताकि शरीर बाहरी वातावरण के साथ कूटनीतिक रूप से तालमेल बिठा सके। प्यास न लगने पर पानी न पीना और चाय-कॉफी का अत्यधिक सेवन गर्मियों में शरीर को हाइड्रेटेड रखना सबसे जरूरी काम है, लेकिन ज्यादातर लोग इस मामले में भारी लापरवाही बरतते हैं। देश के जाने-माने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (पेट रोग विशेषज्ञ) ने आगाह किया है कि कई लोग केवल तभी पानी पीते हैं जब उन्हें बहुत तेज प्यास लगती है, जो कि डिहाइड्रेशन का आखिरी लक्षण है। इसके अलावा, इस मौसम में भी बार-बार चाय या कॉफी पीने की आदत शरीर के भीतर पानी को सोख लेती है क्योंकि कैफीन एक 'डाईयूरेटिक' पदार्थ है जो शरीर से पानी को बाहर निकालता है। पानी की इस भारी कमी के कारण किडनी स्टोन, यूरीन इन्फेक्शन, पेट में भयंकर ऐंठन और लू लगने की घटनाएं सबसे ज्यादा सामने आ रही हैं। दिनभर में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी, नींबू पानी, नारियल पानी या छाछ का सेवन अनिवार्य रूप से करना चाहिए। इन आसान और बेहद जरूरी नियमों को अपनाकर खुद को रखें बिल्कुल सुरक्षित तीनों डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से इस बात पर जोर दिया है कि गर्मियों से जुड़ी बीमारियों से बचने के लिए महंगे इलाज की नहीं, बल्कि सही आदतों को अपनाने की जरूरत है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच जब धूप सबसे ज्यादा तीखी होती है, तब बिना किसी जरूरी काम के बाहर निकलने से बचें। यदि बाहर जाना भी पड़े, तो हल्के रंग के सूती (कॉटन) कपड़े पहनें, अपने सिर और चेहरे को स्कार्फ या टोपी से ढकें और सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें। इसके साथ ही, इस मौसम में बाहर मिलने वाले कटे हुए फल, बासी खाना और अत्यधिक तैलीय भोजन से दूरी बना लें, क्योंकि गर्मियों में बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं जो फूड पॉइजनिंग और डायरिया का कारण बनते हैं।

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