साहिल पर पैलेट गन का इस्तेमाल मोदी सरकार की बर्बरता: 10 जनपथ में छात्रों संग राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के विरोध में सड़कों पर उतरे युवाओं का आंदोलन अब बेहद उग्र और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने 10 जनपथ, नई दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बैठकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और केंद्र सरकार व दिल्ली पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए।
राहुल गांधी ने मीडिया के सामने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए युवा साहिल को पेश किया और दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने पैलेट गन (छर्रे) का इस्तेमाल किया है। आइए एक पॉलिटिकल और ग्राउंड रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं कि राहुल गांधी की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातें क्या रहीं और उन्होंने सरकार के सामने कौन-कौन सी शर्तें रखी हैं।
साहिल से मिलकर राहुल गांधी ने क्या कहा?
10 जनपथ पर राहुल गांधी ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान बुरी तरह घायल हुए युवा साहिल को मीडिया के कैमरों के सामने खड़ा किया। राहुल गांधी ने साहिल का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि यह देश के करोड़ों मेहनती युवाओं की आवाज है, जो किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि साफ-सुथरी परीक्षा और अपनी लगन का हक मांगने सड़क पर उतरे थे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट 'X' पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा:
"साहिल सिर्फ हाथ में तिरंगा लेकर साफ परीक्षा और अपनी मेहनत का हक मांग रहा था। पुलिस ने उस पर गोली चलाकर उसे बुरी तरह घायल कर दिया। यह अंग्रेजों जैसा जुल्म नहीं, बल्कि मोदी सरकार की बर्बरता है, जहां अपना हक मांगने वाले मासूम छात्रों को न्याय की जगह पुलिस के छर्रे (Pellet Guns) मिलते हैं।"
राहुल गांधी द्वारा उठाई गई छात्रों की 3 मुख्य मांगें
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि लाखों-करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा अब केवल भाषणों से हल नहीं होगा। उन्होंने सरकार के सामने तीन कड़े रुख और मांगें रखी हैं:
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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बर्खास्तगी: राहुल गांधी ने दोटूक शब्दों में कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को न केवल उनके मंत्रालय से हटाया जाए, बल्कि उन्हें केंद्रीय कैबिनेट से भी बर्खास्त किया जाए। उन्होंने कहा कि देश को सिर्फ उनका विभाग (पोर्टफोलियो) बदलना मंजूर नहीं है, उनसे तुरंत इस्तीफा लिया जाना चाहिए।
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लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई: प्रदर्शनकारी छात्रों की बेरहमी से पिटाई करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई हो। राहुल गांधी ने दावा किया कि लाठीचार्ज और हिंसा के कारण एक छात्र की आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा पैदा हो गया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मांगें माफी: देश के युवाओं और छात्रों पर हुए इस अत्याचार और बर्बरता के लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के छात्रों से सामने आकर माफी मांगनी चाहिए।
"छात्रों के इस विरोध को सरकार नहीं हिला सकती"
राहुल गांधी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि देश का युवा ही भारत का असली भविष्य है और इस भविष्य से कोई भी सरकार या पुलिस बल नहीं लड़ सकता। उन्होंने कहा कि सरकार कितनी भी ताकत लगा ले, डराने-धमकाने की कोशिश कर ले या कोई भी फैसला लेकर देख ले, वह छात्रों के इस अटूट विरोध और न्याय की मांग को दबा नहीं सकती।
लाखों प्रभावित छात्रों का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने मांग की कि सरकार को तुरंत झूठ बोलना बंद करना चाहिए और स्वीकार करना चाहिए कि देश की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।