सिर्फ मेनोपॉज के बाद नहीं होती दिल की बीमारियां: कम उम्र की महिलाओं के लिए भी बड़ी चेतावनी

दैनिक जीवन की भागदौड़ में अक्सर महिलाएं अपने स्वास्थ्य को सबसे आखिरी प्राथमिकता पर रखती हैं। घर की सीढ़ियां चढ़ते वक्त सांस फूलना, थोड़ा सा काम करने पर अत्यधिक थकान महसूस होना, सिर घूमना, चक्कर आना या अचानक घबराहट जैसी समस्याएं आज के समय में बहुत आम हो चुकी हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश, 30 से 40 वर्ष की युवा आयु वर्ग में लोग इन शुरुआती लक्षणों को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं और इसे केवल सामान्य कमजोरी या थकान मानकर छोड़ देते हैं। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट (Fortis Escorts Heart Institute, New Delhi) की वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. का कहना है कि महिलाओं की सेहत को लेकर बरती जाने वाली यह छोटी सी लापरवाही आगे चलकर एक गंभीर और जानलेवा चुनौती का रूप ले लेती है। इसलिए किसी भी शुरुआती लक्षण को नजरअंदाज न करें और समय रहते अपनी संपूर्ण चिकित्सकीय जांच जरूर करवाएं।
क्या महिलाओं को सिर्फ मेनोपॉज के बाद होती हैं दिल की बीमारियां? जानिए सबसे बड़ा मेडिकल मिथक
समाज में और आम महिलाओं के बीच एक बहुत पुरानी और पक्की धारणा बनी हुई है कि दिल की बीमारियां (Heart Diseases) या हार्ट अटैक केवल पुरुषों को या फिर महिलाओं को मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद ही अपनी चपेट में लेते हैं। लेकिन चिकित्सा विज्ञान और प्रसिद्ध पल्मोनरी व कार्डियोलॉजिकल शोध पत्रिकाओं जैसे 'जर्नल हाइपरटेंशन' में प्रकाशित हालिया अध्ययनों ने इस मिथक को पूरी तरह खारिज कर दिया है। डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि हृदय संबंधी जटिलताएं अब मेनोपॉज से काफी पहले यानी कम उम्र की महिलाओं में भी तेजी से पैर पसार रही हैं। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि महिलाएं न केवल अपने खानपान और डाइट पर पैनी नजर रखें, बल्कि अपनी शारीरिक सक्रियता (Physical Activity) को भी दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बनाएं। इसके साथ ही हर महिला को अपनी सेहत से जुड़े बुनियादी मेडिकल डेटा—जैसे कि ब्लड प्रेशर (BP) कितना रहता है, कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) का स्तर क्या है, ब्लड शुगर नियंत्रित है या नहीं, और शरीर का वजन तय सीमा से ज्यादा तो नहीं बढ़ रहा है—की पूरी जानकारी होनी चाहिए।
एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी कैसे बनती है मुसीबत? धमनियों में प्लाक जमने का खतरा
महिलाओं के शरीर में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला 'एस्ट्रोजन' (Estrogen) हार्मोन उनके दिल के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह हार्मोन रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को लचीला और स्वस्थ रखकर महिलाओं को हृदय रोगों के संभावित खतरे से बचाता है। एस्ट्रोजन शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) के स्तर को बढ़ाता है और बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करता है, जिससे धमनियों में वसा या प्लाक (Plaque) नहीं जम पाता। इसके अलावा, यह रक्त वाहिकाओं के अंदरूनी हिस्सों में होने वाली सूजन (Inflammation) से भी बचाव करता है। लेकिन सामान्य तौर पर 40 से 50 की उम्र के बीच जब महिलाओं में मेनोपॉज का समय आता है, तो एस्ट्रोजन का स्तर बहुत तेजी से गिरना शुरू हो जाता है। इस हार्मोनल बदलाव के कारण शरीर में कई प्रतिकूल परिवर्तन होने लगते हैं जैसे—तेजी से वजन बढ़ना, खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर ऊपर जाना और इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) का पैदा होना। यदि महिलाएं मेनोपॉज से पहले ही अपनी जीवनशैली को लेकर सतर्क नहीं होती हैं, तो यह संक्रमण उनके लिए बड़ा जोखिम बन सकता है।
आधुनिक जीवनशैली और हार्मोनल असंतुलन: क्यों कम उम्र में बढ़ रहा है हार्ट अटैक का जोखिम
कुछ दशक पहले तक महिलाएं 50 से 60 वर्ष की आयु तक पूरी तरह स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस करती थीं और उस दौर में महिलाओं में दिल के दौरे के मामले बहुत ही दुर्लभ माने जाते थे। लेकिन आज की आधुनिक जीवनशैली ने इस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। वर्तमान में महिलाएं मेनोपॉज की दहलीज पर पहुंचते-पहुंचते कई गंभीर चयापचय (Metabolic) विकारों और बीमारियों से घिर जाती हैं। इसके मुख्य कारणों में अत्यधिक मानसिक तनाव, काम का भारी दबाव, शारीरिक सक्रियता या एक्सरसाइज की भारी कमी, खानपान में लापरवाही और जंक फूड का अधिक सेवन शामिल है। इसके अलावा सिगरेट-तंबाकू का सेवन या पैसिव स्मोकिंग भी इस खतरे को कई गुना बढ़ा देती है। यदि आपको भी हार्मोन असंतुलन की समस्या महसूस हो रही है और सामान्य दिनों की तुलना में बहुत अधिक भूख या प्यास लगने जैसे बदलाव दिख रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से बढ़ाएं अपनी शारीरिक क्षमता और मांसपेशियों की मजबूती
अक्सर महिलाएं सोचती हैं कि जिम जाने या कसरत करने की शुरुआत कैसे की जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि कभी भी एकदम से भारी-भरकम वर्कआउट शुरू न करें, बल्कि धीरे-धीरे अपनी शारीरिक क्षमता का विकास करें। पुरुषों की तरह महिलाओं के लिए भी 'स्ट्रेंथ ट्रेनिंग' (Strength Training) उतनी ही जरूरी है। मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में मांसपेशियों की ताकत और हड्डियों का घनत्व तेजी से कम होने लगता है (जिसे ऑस्टियोपोरोसिस और सारकोपेनिया कहा जाता है)। इस प्राकृतिक क्षति से बचने के लिए अभी से सजग होना जरूरी है। शुरुआत में हल्के डंबल, रेजिस्टेंस बैंड (Exercise Bands) का प्रयोग करें। यदि आपको पीठ या कमर में दर्द रहता है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भारी कसरत न करें, बल्कि विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही रूटीन तय करें।
दिल को सेहतमंद रखने के लिए अपनाएं यह खास हार्ट-हेल्दी डाइट
अपने हृदय को आजीवन सुरक्षित और दुरुस्त रखने के लिए अपनी रसोई और खानपान की आदतों में सकारात्मक बदलाव लाएं:
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हरी पत्तेदार सब्जियां: अपने दैनिक आहार में पालक, मेथी, बथुआ और लौकी जैसी ताजी हरी सब्जियां भरपूर मात्रा में शामिल करें।
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मौसमी फल: सेब, पपीता, अमरूद, संतरा और मौसमी जैसे फल एंटीऑक्सीडेंट्स और डाइटरी फाइबर से भरपूर होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को काबू में रखते हैं।
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साबुत अनाज: कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित और संतुलित रखने के लिए अपने भोजन में जौ, ज्वार, बाजरा और दलिया को जगह दें।
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हेल्दी फैट का चुनाव: डीप-फ्राई और ट्रांस-फैट वाली चीजों (जैसे समोसा, फ्रेंच फ्राइज, बर्गर, पिज्जा और प्रोसेस्ड फूड) से पूरी तरह दूरी बना लें। इसके स्थान पर मूंग, मसूर, चना और विभिन्न प्रकार की दालों का सेवन करें जो संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाती हैं।