‘सिर्फ शक के आधार पर हटाए गए वोटर लिस्ट से नाम’, पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने केंद्र सरकार को लिया आड़े हाथ

देश में मतदाता सूची (Voter List) के विशेष पुनरीक्षण और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलकों में घमासान मच गया है। विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर आयोजित एक उच्चस्तरीय नागरिक सम्मेलन के दौरान देश के पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा (Ashok Lavasa) ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि नागरिकों के नाम सिर्फ 'शक' के आधार पर मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जो पूरी तरह से गैर-कानूनी और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने उठाए बड़े सवाल
ऑनलाइन माध्यम से आयोजित इस नागरिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि लोगों को सिर्फ इस अंदेशे या शक के आधार पर वोटर लिस्ट से बाहर किया जा रहा है कि वे देश के नागरिक नहीं हैं, जबकि ऐसा करने के लिए किसी भी प्रकार के पुख्ता सबूत या दस्तावेज को आधार नहीं बनाया जा रहा है।
उन्होंने चुनाव आयोग (EC) की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो संस्था देश में अधिक से अधिक योग्य नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए बनाई गई थी, आज उसकी प्राथमिकता उन वोटरों को बाहर करने की हो गई है जिन्हें वह अयोग्य मानती है।
ERO को सेंट्रलाइज्ड सिस्टम से बाहर रखना गैर-कानूनी
अशोक लवासा ने तकनीकी और कानूनी प्रक्रिया पर बात करते हुए कहा कि कानूनन केवल निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) ही ऐसे अधिकृत प्राधिकारी होते हैं, जिन्हें मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने का अधिकार होता है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में ERO को उस सेंट्रलाइज्ड 'SIR सिस्टम' (ECINET) तक पहुंच ही नहीं दी गई, जिसे केंद्रीय रूप से नियंत्रित किया जा रहा था। उन्होंने इसे पूरी तरह गैर-कानूनी करार देते हुए कहा कि आम तौर पर ERO के फैसलों के खिलाफ जिला चुनाव अधिकारियों या मुख्य चुनाव अधिकारी के समक्ष अपील करने का प्रावधान होता है, लेकिन इस प्रक्रिया ने जमीनी स्तर के अधिकारियों की भूमिका को ही सीमित कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास में कभी भी मतदाता इतने अधिक परेशान और चिंतित नहीं रहे कि उनके नाम सूची में सुरक्षित रहेंगे भी या नहीं।
अभिनेता प्रकाश राज का केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला
इस सम्मेलन में मशहूर अभिनेता और फिल्म निर्माता प्रकाश राज (Prakash Raj) ने भी शिरकत की और केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने ऑनलाइन पोस्ट और संबोधन के जरिए आरोप लगाया कि केंद्र की मौजूदा सरकार ने चुनाव आयोग का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में राजनीतिक दलों को तोड़ने और डेटा को सेंट्रलाइज्ड करने में किस तरह की नीतियां अपनाई गईं, यह किसी से छिपा नहीं है। प्रकाश राज ने कहा कि जिस तरह से सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त का बचाव कर रही है, उससे साफ पता चलता है कि चुनाव आयोग ने सत्ता पक्ष की किस प्रकार सहायता की है। उन्होंने देश के नागरिकों और सिविल सोसाइटी से एकजुट होने का आह्वान किया।
सम्मेलन में कई दिग्गज हस्तियां रहीं मौजूद
बता दें कि इस नागरिक सम्मेलन में केवल पूर्व चुनाव आयुक्त और अभिनेता ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रतिष्ठित और प्रशासनिक पृष्ठभूमि से जुड़े लोग भी शामिल हुए। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जवाहर सरकार, कोलकाता के पूर्व मेयर और राज्यसभा के पूर्व सांसद विकास रंजन भट्टाचार्य तथा पूर्व आईएएस अधिकारी अनीता अग्निहोत्री जैसे नाम शामिल रहे। इन सभी वक्ताओं ने भी चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की।