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सीजफायर के बाद भी क्यों डूबा शेयर बाजार? सेंसेक्स 800 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे करोड़ों, ये हैं गिरावट के 5 बड़े कारण

News India Live, Digital Desk: बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार मच गया। निवेशकों को उम्मीद थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्ध विराम (Ceasefire) की समयसीमा अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने की घोषणा के बाद बाजार में हरियाली लौटेगी, लेकिन हुआ इसके ठीक उलट। सेंसेक्स करीब 800 अंक और निफ्टी 200 अंकों से ज्यादा टूट गया। इस गिरावट ने बाजार के गलियारों में सन्नाटा पसरा दिया है और निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर ‘राहत’ की खबर के बीच यह ‘आफत’ कैसे आ गई।ट्रंप की घोषणा में छिपा ‘डर’ और नेवल ब्लॉकेडबाजार की गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण ट्रंप की घोषणा में छिपा एक पेंच है। हालांकि ट्रंप ने युद्ध विराम बढ़ा दिया है, लेकिन उन्होंने साफ किया है कि ईरान की समुद्री व्यापार नाकाबंदी (Naval Blockade) जारी रहेगी। ईरान ने इसे सीधे तौर पर ‘युद्ध की कार्रवाई’ करार दिया है। निवेशकों को डर है कि यह सीजफायर केवल कागजी है और धरातल पर तनाव जस का तस बना हुआ है। इसी अनिश्चितता ने ‘सेफ हेवन’ यानी डॉलर की मांग बढ़ा दी, जिससे वैश्विक बाजारों सहित भारत में भी बिकवाली का दबाव बढ़ा।IT सेक्टर में ‘HCL Tech’ की सुनामीभारतीय बाजार के गिरने का एक बड़ा कारण घरेलू भी रहा। दिग्गज आईटी कंपनी HCL Tech के निराशाजनक चौथी तिमाही के नतीजों और भविष्य के कमजोर गाइडेंस ने पूरे आईटी इंडेक्स को धराशायी कर दिया। HCL Tech का शेयर खुद 10% तक टूट गया, जिससे कंपनी की मार्केट कैप से करीब 38,000 करोड़ रुपये साफ हो गए। इसके साथ ही इंफोसिस और टीसीएस जैसे शेयरों में भी भारी बिकवाली देखी गई, जिसने निफ्टी को नीचे खींचने में मुख्य भूमिका निभाई।कच्चे तेल की कीमतें और गिरता रुपयासीजफायर के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें 98 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की ऊंची कीमतें महंगाई का खतरा बढ़ा देती हैं। दूसरी ओर, डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड गिरावट के साथ 93.68 के स्तर पर पहुंच गया। कमजोर रुपया और महंगा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दोहरा झटका साबित हो रहा है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ा।FII की बिकवाली और मुनाफावसूलीपिछले तीन सत्रों में बाजार ने अच्छी बढ़त दिखाई थी, जिसके बाद आज ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली (Profit Booking) करना बेहतर समझा। वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने फिर से बिकवाली का रुख अपना लिया है। मंगलवार को ही एफआईआई ने करीब 1,918 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी। वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जो भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

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