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सीनियर लिविंग मार्केट में बूम: बुजुर्ग बने रियल एस्टेट के किंग, बिल्डर्स का ₹13,000 करोड़ का मेगा दांव, टियर 2 शहर बने नए हॉटस्पॉट

भारतीय प्रॉपर्टी बाजार में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां अब बुजुर्ग यानी सीनियर सिटीजन्स रियल एस्टेट की नई ग्रोथ स्टोरी के केंद्र में आ गए हैं। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म कॉलियर्स (Colliers) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, रियल एस्टेट डेवलपर्स और प्राइवेट इक्विटी (PE) फंड्स ने सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स के लिए 13,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। अगले 3 से 4 वर्षों में इस पूंजी से देशभर में लगभग 75,000 नई सीनियर लिविंग यूनिट्स तैयार की जाएंगी। बुजुर्गों की बदलती जीवनशैली, बढ़ती क्रय शक्ति और संगठित व सुरक्षित आवासीय परिसरों की बढ़ती जरूरत ने इस सेक्टर को एक मुख्यधारा के एसेट क्लास में बदल दिया है।

टियर 2 और टियर 3 शहर क्यों बन रहे हैं पसंदीदा हॉटस्पॉट?

अब तक सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स केवल महानगरों तक सीमित थे, लेकिन अब डेवलपर्स का फोकस तेजी से छोटे और शांत शहरों की ओर मुड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक लॉन्च होने वाले कुल नए प्रोजेक्ट्स में से 30% से 40% हिस्सेदारी टियर-2, टियर-3 और धार्मिक शहरों की होगी।

  • प्रमुख उभरते केंद्र: कोयंबटूर, देहरादून, पुडुचेरी और वडोदरा।

  • आध्यात्मिक डेस्टिनेशंस: अयोध्या, वृंदावन और तिरुपति।

छोटे शहरों में कम जीवन-यापन लागत, शांत वातावरण, कम प्रदूषण, सुधरता हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर और किफायती जमीन की उपलब्धता बुजुर्गों के साथ-साथ बिल्डर्स को भी बड़े पैमाने पर आकर्षित कर रही है।

2030 तक ₹1 लाख करोड़ का बाजार बनने का अनुमान

भारत में वर्तमान में संगठित सीनियर लिविंग इन्वेंट्री केवल 25,000 यूनिट्स के आसपास है, जबकि इसकी मौजूदा मांग 20 से 22 लाख यूनिट्स की है। वर्ष 2030 तक यह मांग बढ़कर 30 लाख यूनिट्स तक पहुंचने का अनुमान है। बाजार की क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में करीब ₹30,000 करोड़ का यह सेक्टर 2030 तक चार गुना बढ़कर ₹1 लाख करोड़ (1 ट्रिलियन रुपये) के पार निकल सकता है।

हेल्थकेयर और रियल्टी का स्ट्रैटेजिक गठजोड़

सीनियर लिविंग का दायरा अब पुराने जमाने के 'वृद्धाश्रम' से पूरी तरह बदलकर प्रीमियम 'इंडिपेंडेंट व असिस्टेड लिविंग कम्युनिटी' बन चुका है। बिल्डर्स अब मैक्स, अपोलो और फोर्टिस जैसे प्रमुख हेल्थकेयर सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ सीधे टाई-अप (JV) कर रहे हैं। इन सोसायटियों में 24×7 ऑन-कॉल डॉक्टर, एंबुलेंस सुविधा, व्हीलचेयर-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर, फिजियोथेरेपी सेंटर, न्यूट्रिशियस डाइनिंग और क्लब हाउस जैसी आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।

रेरा (RERA) और सरकारी नियमों से बढ़ा निवेशकों का भरोसा

सरकार द्वारा सीनियर सिटीजन हाउसिंग के लिए तय किए गए मॉडल दिशानिर्देशों और सख्त रेरा नियमों ने इस सेगमेंट में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही को बढ़ाया है। इससे न केवल घरेलू रिटेल निवेशक और एनआरआई अपने बुजुर्ग माता-पिता के लिए सुरक्षित घर खरीद रहे हैं, बल्कि बड़े ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स भी इस सेक्टर में भारी पूंजी लगा रहे हैं।

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