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सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद बढ़ा तनाव: केंद्र सरकार पर वादा तोड़ने का आरोप

देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ छात्र आंदोलन एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से प्रदर्शनकारियों से जुड़ी याचिकाओं पर दिए गए निर्देशों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार को सख्त अल्टीमेटम जारी किया है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार अपने लिखित वादे के अनुसार शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों व युवाओं के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) वापस नहीं लेती है, तो वे फिर से पूरे देश में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों को राहत, लेकिन जांच जारी रहेगी

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए कथित बल प्रयोग से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए आदेश दिया कि जिन प्रदर्शनकारियों का कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं है और जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया है, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक या सख्त कार्रवाई न की जाए। अदालत ने ऐसे छात्रों को तुरंत रिहा करने का भी निर्देश दिया जिन्हें महज प्रदर्शन में शामिल होने के कारण हिरासत में लिया गया था। हालांकि, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और अन्य राज्य पुलिस को पहले से दर्ज मामलों की जांच जारी रखने की अनुमति दे दी है, जो CJP के लिए चिंता का कारण बन गया है।

'अदालत के आदेश की आड़ में हो सकता है दमन': CJP ने जताई गहरी आशंका

अदालती आदेश के बाद CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 25 जुलाई को केंद्र सरकार के साथ हुई वार्ता में लिखित रूप से यह आश्वासन दिया गया था कि सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले रद्द किए जाएंगे और भविष्य में कोई कार्रवाई नहीं होगी। इसी ठोस आश्वासन के आधार पर ही पार्टी ने अपना देशव्यापी धरना समाप्त किया था। सौरव दास का आरोप है कि अब केंद्र और राज्य सरकारें सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी की आड़ लेकर निर्दोष छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई जारी रख सकती हैं, जिसका अंदेशा शुरुआत से ही जताया जा रहा था।

सरकारी वकीलों की चुप्पी पर उठे सवाल: आंदोलन दोबारा शुरू करने की धमकी

CJP ने सवाल उठाया कि जब केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई बैठक में प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा का भरोसा दिया जा चुका था, तब अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी वकीलों ने एफआईआर जारी रखने वाली टिप्पणी का विरोध क्यों नहीं किया। पार्टी का कहना है कि सरकार अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग कर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के केस खुद वापस ले सकती है। वहीं, पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी आरोप लगाया कि कई राज्यों में पुलिस अब भी छात्रों को हिरासत में ले रही है और समझौते का उल्लंघन कर रही है। CJP ने साफ कहा है कि अगर सभी मांगें तुरंत पूरी नहीं की गईं, तो देश के युवा फिर से राजधानी और अन्य राज्यों की सड़कों पर उतरेंगे।

जंतर-मंतर से संसद मार्च तक: जानिए कैसे शुरू हुआ था यह पूरा आंदोलन?

उल्लेखनीय है कि नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामले में निष्पक्ष जांच और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP ने 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपना प्रदर्शन शुरू किया था। 20 जुलाई को निकाले गए 'संसद मार्च' के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे। इसके बाद केंद्र सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच दो दौर की बातचीत हुई, जिसके बाद धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दिया और सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न करने तथा मृतक छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने की बात मानी थी। अब एफआईआर वापस न होने से दोनों पक्षों में एक बार फिर तनातनी बढ़ गई है।

(डिस्क्लेमर: यह समाचार रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के निर्देशों, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आधिकारिक वक्तव्यों और मामले से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के तथ्यों पर आधारित है।)

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