US Fed Rate Decision: महंगाई अब भी है हाई, फिर भी अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने क्यों नहीं बढ़ाई ब्याज दरें

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और वैश्विक वित्तीय बाजारों की धुरी कहे जाने वाले अमेरिका से आर्थिक गलियारों से एक बहुत ही बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ने ब्याज दरों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। अमेरिका में महंगाई की दर अभी भी सेंट्रल बैंक के तय किए गए 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है, इसके बावजूद फेड ने अपनी हालिया बैठक में ब्याज दरों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी न करते हुए उन्हें स्थिर रखा है। इस फैसले के बाद फेड ने बेंचमार्क ब्याज दर को 3.75% से 4% की रेंज में बरकरार रखा है। महंगाई के मोर्चे पर चिंताएं बरकरार रहने के बावजूद फेडरल रिजर्व द्वारा उठाए गए इस कदम से वैश्विक बाजारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि अमेरिकी सेंट्रल बैंक ने महंगाई के ऊंचे स्तर के बावजूद ब्याज न बढ़ाने का जोखिम क्यों उठाया और इसके पीछे की मुख्य वजहें क्या हैं।
महंगाई के आंकड़ों और आर्थिक रुझानों का इंतजार कर रहा है फेडरल रिजर्व
फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बदलाव न करने के पीछे सबसे पहली और बड़ी वजह यह है कि केंद्रीय बैंक नीतिगत फैसले लेने से पहले आगामी आर्थिक आंकड़ों का गहराई से आकलन करना चाहता है। बैठक के बाद जारी किए गए अपने आधिकारिक बयान में फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने यह स्वीकार किया कि देश में महंगाई अब भी थोड़ा ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
हालांकि, नीति निर्माताओं का यह मानना है कि जल्दबाजी में सख्त कदम उठाने के बजाय महंगाई, रोजगार और ओवरऑल इकोनॉमिक ग्रोथ से जुड़े नए और स्पष्ट आंकड़ों का इंतजार किया जाना ज्यादा समझदारी होगी। फेड के कई वरिष्ठ अधिकारियों का यह भी कहना है कि मौजूदा ब्याज दरें पहले से ही काफी ऊंचे स्तर पर हैं और वे आर्थिक गतिविधियों पर अपना दबाव बना रही हैं। ऐसे में, बिना पुख्ता संकेतों के अगला कदम उठाने से अर्थव्यवस्था में अनावश्यक सुस्ती आ सकती है, जिससे बचने के लिए केंद्रीय बैंक फिलहाल 'देखो और इंतजार करो' (Wait and Watch) की नीति अपना रहा है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार और कॉरपोरेट निवेश का संतुलन
ब्याज दरों को स्थिर रखने के पीछे दूसरी सबसे अहम वजह अमेरिकी अर्थव्यवस्था की अंदरونی मजबूती है। फेडरल रिजर्व ने अपने मूल्यांकन में यह बात साफ की है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था इस समय काफी मजबूत रफ्तार से आगे बढ़ रही है।
देश में उपभोक्ताओं का खर्च (Consumer Spending) लगातार उच्च स्तर पर बना हुआ है और श्रम बाजार में बेरोजगारी की दर भी कम है। इसके अलावा, आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े क्षेत्रों में भारी कॉरपोरेट निवेश ने आर्थिक ग्रोथ को एक मजबूत सहारा दिया है। ऐसे मजबूत माहौल में फेड के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि उसे एक तरफ महंगाई को कंट्रोल करना है और दूसरी तरफ आर्थिक विकास की गति को भी बनाए रखना है। यदि इस स्थिति में दरों में और अधिक बढ़ोतरी कर दी जाती, तो महंगाई पर तो शायद थोड़ा अंकुश लग जाता, लेकिन इससे बाजार की ग्रोथ और कारोबारी गतिविधियों पर नकारात्मक दबाव पड़ सकता था।
फेड के भीतर ही दरों को लेकर स्पष्ट मतभेद और असहमति
इस बार फेडरल रिजर्व का यह निर्णय पूरी तरह से सर्वसम्मति से नहीं लिया गया है, जो इस बात का संकेत है कि अमेरिकी मौद्रिक नीति तय करने वाले अधिकारियों के बीच भी इस समय अलग-अलग राय चल रही है।
कमेटी के कुल 12 वोटिंग सदस्यों में से 10 सदस्यों ने तो ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर ही स्थिर रखने के पक्ष में अपना वोट डाला, लेकिन दो सदस्य इस फैसले के विरोध में भी खड़े नजर आए। फेड की गवर्नर लिसा कुक और क्लीवलैंड फेड के अध्यक्ष बेथ हैमैक ने ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी किए जाने के पक्ष में मतदान किया। इन दोनों सदस्यों की यह असहमति इस बात को दर्शाती है कि अमेरिकी सेंट्रल बैंक के भीतर ही महंगाई पर काबू पाने के लिए आगे कितनी आक्रामक या सख्त नीति अपनाई जानी चाहिए, इसे लेकर स्पष्ट मतभेद मौजूद हैं।
अमेरिकी शेयर बाजारों पर दिखा मिला-जुला असर, अब दिसंबर की बैठक पर टिकी निगाहें
फेडरल रिजर्व के इस फैसले के आने के बाद गत बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में मिला-जुला और शांत कारोबार देखने को मिला। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones) और S&P 500 सूचकांक में लगभग 0.1% की मामूली बढ़त दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक कंपोजिट (Nasdaq Composite) थोड़ी गिरावट के साथ कारोबार करता हुआ दिखाई दिया।
इस बीच टेक्नोलॉजी शेयरों में आई तेजी ने S&P 500 और नैस्डैक को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में संभलने में मदद की। अब दुनिया भर के निवेशकों और शेयर बाजार के दिग्गजों की निगाहें दिसंबर महीने में होने वाली फेडरल रिजर्व की अगली बैठक पर टिकी हैं। आने वाले हफ्तों में आने वाले रोजगार और महंगाई के ताजा आंकड़े यह तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे कि साल के अंत तक अमेरिकी सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में कटौती या बढ़ोतरी का कौन सा नया रास्ता चुनता है।