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सुरक्षित निवेश और तयशुदा रिटर्न की तलाश: बैंक ऑफ बड़ौदा की 271 दिन की एफडी क्यों बनी पहली पसंद?

देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के ऋणदाता बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने अपने जमाकर्ताओं के लिए अल्पकालिक बचत को बेहद आकर्षक और मुनाफेदार बना दिया है। शेयर बाजार में जारी भारी उतार-चढ़ाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और म्यूचुअल फंड्स में बढ़ते जोखिम के बीच आम निवेशक एक बार फिर गारंटीड रिटर्न और पूंजी की शत-प्रतिशत सुरक्षा की ओर लौट रहे हैं। खासकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज, गोमती नगर, अलीगंज और महानगर जैसे प्रमुख रिहायशी इलाकों में रहने वाले पेंशनर्स, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा की '271 दिन से 1 वर्ष से कम' की विशेष एफडी स्कीम सबसे पसंदीदा विकल्प बनकर उभरी है। यह अवधि ठीक 9 महीने के आसपास बैठती है, जो न तो पैसे को लंबे समय तक लॉक करती है और न ही बहुत कम समय के लिए रोकती है। यदि किसी निवेशक को आने वाले त्योहारी सीजन, बच्चों की आगामी सेमेस्टर फीस, शादी-ब्याह के आयोजन या किसी प्रॉपर्टी की अगली किस्त देने के लिए 9 महीने बाद नकद राशि की आवश्यकता है, तो उसके लिए यह 271 दिन की सावधि जमा योजना बिना किसी बाजार जोखिम के अपनी पूंजी पर अधिकतम लाभ अर्जित करने का सबसे अचूक और सुरक्षित माध्यम साबित हो रही है।

ब्याज दरों का पूरा गणित: सामान्य नागरिकों को 6.00% और वरिष्ठ नागरिकों को 6.50% का शानदार फायदा

बैंक ऑफ बड़ौदा की आधिकारिक ब्याज दर तालिका के अनुसार, 271 दिन से लेकर 1 वर्ष से कम (333 और 360 दिन के विशेष बकेट्स को छोड़कर) की अवधि के लिए सामान्य नागरिकों को सालाना 6.00 प्रतिशत की आकर्षक ब्याज दर की पेशकश की जा रही है। वहीं, 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) को 50 बेसिस प्वाइंट्स यानी 0.50 प्रतिशत का अतिरिक्त लाभ देते हुए सीधे 6.50 प्रतिशत प्रति वर्ष का ब्याज दिया जा रहा है। यदि इसकी तुलना 211 दिन से 270 दिन वाली पिछली स्लैब से करें, जहां सामान्य ग्राहकों को 5.75% और वरिष्ठ नागरिकों को 6.25% ब्याज मिलता है, तो 271वें दिन कदम रखते ही ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की सीधी छलांग लग जाती है। 3 करोड़ रुपये से कम के रिटेल डिपॉजिट्स के लिए यह दर किसी भी बड़े सरकारी बैंक के मुकाबले बेहद प्रतिस्पर्धी है। बैंक इस योजना में कॉलेबल (समय से पूर्व निकासी योग्य) विकल्प देता है, जिससे आपात स्थिति में जमाकर्ता मामूली पेनल्टी देकर अपनी राशि वापस भी निकाल सकते हैं। छोटी अवधि में 6.50% का सुनिश्चित रिटर्न वरिष्ठ नागरिकों की आय को सहारा देने के लिए एक ठोस वित्तीय ढाल का काम करता है।

9 महीने की अवधि और लिक्विडिटी का संतुलन: शेयर बाजार की उठापटक के बीच क्यों है यह सबसे सेफ बेट?

वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में लिक्विडिटी यानी नकदी की तरलता बनाए रखना सबसे बड़ी समझदारी मानी जाती है। 3 से 5 साल की लंबी अवधि वाली एफडी में पैसा फंसाने पर अक्सर यह डर बना रहता है कि यदि ब्याज दरें और बढ़ीं, तो पुरानी दर पर घाटा होगा या बीच में तोड़ने पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। दूसरी तरफ, 3 से 6 महीने की एफडी पर अमूमन 4.5% से 5.5% तक का ही ब्याज मिल पाता है, जो मुद्रास्फीति के सामने कमजोर पड़ जाता है। ऐसे में 271 दिन की समयावधि वित्तीय योजनाकारों की नजर में 'स्वीट स्पॉट' मानी जाती है। यह 9 महीने की मियाद निवेशक को यह स्वतंत्रता देती है कि वह अपने सरप्लस फंड पर बैंक के बचत खाते (जो महज 2.75% से 3% देता है) की तुलना में दोगुने से भी अधिक का ब्याज कमा सके। साथ ही, जब यह एफडी मैच्योर होगी, तब बाजार के नए रुझानों के मुताबिक निवेशक इस फंड को किसी अन्य दीर्घकालिक योजना, रियल एस्टेट डाउन पेमेंट या गोल्ड बॉन्ड में आसानी से पुनः आवंटित (री-एलोकेट) कर सकते हैं।

सीनियर सिटीजन्स और सुपर सीनियर सिटीजन्स के लिए अतिरिक्त लाभ: तिमाही और मासिक पे-आउट का सहारा

वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा केवल अधिक ब्याज ही नहीं देता, बल्कि उन्हें अपनी वित्तीय जरूरतों के हिसाब से कैश फ्लो प्रबंधित करने की पूरी आजादी भी मुहैया कराता है। बुजुर्ग जमाकर्ता अपनी आवश्यकतानुसार ब्याज भुगतान के कई विकल्पों में से किसी एक को चुन सकते हैं। वे चाहें तो मैच्योरिटी पर एकमुश्त ब्याज (कम्युलेटिव विकल्प) ले सकते हैं, जहां ब्याज पर चक्रवृद्धिकरण (कंपाउंडिंग) का लाभ मिलता है, या फिर अपनी दवाइयों, घर के राशन और रोजमर्रा के बिलों के भुगतान के लिए मासिक (Monthly) या त्रैमासिक (Quarterly) पे-आउट का चयन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, बैंक 80 वर्ष से अधिक उम्र के अति वरिष्ठ नागरिकों (Super Senior Citizens) के लिए चुनिंदा अवधियों में अतिरिक्त लाभ प्रदान करता है। पेंशनभोगियों के लिए यह योजना इसलिए भी मुफीद है क्योंकि सरकारी बैंक होने के नाते बैंक ऑफ बड़ौदा में जमा 5 लाख रुपये तक की मूल और ब्याज राशि डीआईसीजीसी (DICGC) द्वारा पूर्णतः बीमित और सुरक्षित होती है, जिससे किसी निजी बैंक या एनबीएफसी की तरह डिफॉल्ट का रत्ती भर भी जोखिम नहीं रहता।

₹5 लाख के निवेश पर कितना मिलेगा रिटर्न: मैच्योरिटी कैलकुलेटर और बड़ौदा की अन्य विशेष स्कीम्स

आइए अब एफडी कैलकुलेटर के जरिए समझते हैं कि 271 दिन की इस स्कीम में पैसा लगाने पर असल में कितना शुद्ध नफा होगा। मान लीजिए कि लखनऊ के किसी सामान्य नागरिक ने बैंक ऑफ बड़ौदा में ₹5,00,000 की राशि 271 दिनों के लिए 6.00% वार्षिक दर पर जमा की। 271 दिन की समाप्ति पर उन्हें लगभग ₹22,274 का शुद्ध ब्याज मिलेगा और उनकी मैच्योरिटी राशि बढ़कर ₹5,22,274 हो जाएगी। वहीं, यदि यही ₹5 लाख किसी वरिष्ठ नागरिक द्वारा 6.50% की दर से 271 दिन के लिए जमा किए जाते हैं, तो उन्हें कुल ₹24,130 का ब्याज प्राप्त होगा, जिससे उनका कुल फंड ₹5,24,130 हो जाएगा। यानी मात्र 9 महीने में करीब 24 हजार रुपये से अधिक की गारंटीड अतिरिक्त कमाई सुनिश्चित हो जाती है। इसके अलावा, जो निवेशक थोड़ा और लंबा रुक सकते हैं, उनके लिए बैंक ऑफ बड़ौदा की 'बॉब स्क्वायर ड्राइव' (444 दिन) स्कीम 6.45% से 6.95% और 'बॉब गोल्डन गोल' (555 दिन) स्पेशल स्कीम 6.75% से 7.25% तक का उच्चतम रिटर्न भी प्रदान कर रही है, लेकिन कम समय में बिना जोखिम बड़ा लाभ पाने के लिए 271 दिन की एफडी सबसे ज्यादा लोकप्रिय बनी हुई है।

ऑनलाइन 'BOB World' से लेकर शाखा तक: कैसे खोलें खाता और टीडीएस से बचने के जरूरी नियम

बैंक ऑफ बड़ौदा में 271 दिन की यह एफडी खोलना बेहद सरल और पूरी तरह डिजिटल है। मौजूदा खाताधारक बैंक की लोकप्रिय मोबाइल ऐप 'BOB World' या इंटरनेट बैंकिंग पोर्टल में लॉग इन करके मात्र दो मिनट में 'ओपन फिक्स्ड डिपॉजिट' विकल्प चुनकर घर बैठे यह खाता शुरू कर सकते हैं। इसके लिए किसी कागजी कार्रवाई या शाखा जाने की जरूरत नहीं होती। वहीं, वरिष्ठ नागरिक जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के उपयोग में असहज महसूस करते हैं, वे अपनी नजदीकी बैंक शाखा में जाकर एक साधारण फॉर्म भरकर और चेक जमा करके तुरंत एफडी रसीद प्राप्त कर सकते हैं। टैक्स के मोर्चे पर ध्यान रखने योग्य बात यह है कि आयकर नियमों के अनुसार यदि एक वित्तीय वर्ष में एफडी से होने वाली ब्याज आय सामान्य नागरिकों के लिए ₹40,000 और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000 से अधिक होती है, तो बैंक नियमानुसार टीडीएस (TDS) काटता है। यदि आपकी कुल वार्षिक आय कर योग्य सीमा से कम है, तो टीडीएस की कटौती से बचने के लिए सामान्य नागरिक फॉर्म 15G और वरिष्ठ नागरिक फॉर्म 15H वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही बैंक में ऑनलाइन या ऑफलाइन जमा कर सकते हैं, जिससे उनका पूरा ब्याज बिना किसी टैक्स कटौती के सीधे उनके खाते में ट्रांसफर हो जाता है।

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