सूर्य को अर्घ्य देते समय जल में क्या-क्या मिलाना चाहिए? जानिए रविवार के दिन का धार्मिक महत्व और सही नियम

सनातन धर्म में सप्ताह का हर एक दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है, लेकिन बात जब ग्रहों के राजा भगवान सूर्य की आती है, तो रविवार (Sunday) का दिन बेहद खास और पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार के दिन सूर्य देव की विधि-विधान से पूजा करने और उन्हें तांबे के लोटे से जल अर्पित करने से जीवन में तेज, यश, मान-सम्मान और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र और शास्त्रों में यह स्पष्ट बताया गया है कि सूर्य को सिर्फ सादा जल देने के बजाय यदि उसमें कुछ खास चीजें मिला दी जाएं, तो इसके चमत्कारिक और कई गुना अधिक शुभ फल प्राप्त होते हैं। अगर आप भी अपने जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करना चाहते हैं और सूर्य देव की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो अर्घ्य देने के सही नियमों और सामग्रियों के बारे में जरूर जान लें।
सूर्य को अर्घ्य देते समय जल में मिलाएं ये चमत्कारी चीजें
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, भगवान सूर्य को अर्घ्य देते समय तांबे के पात्र का ही इस्तेमाल करना सबसे शुभ माना जाता है। इस जल में रोली या कुमकुम, लाल फूल की पंखुड़ियां, अक्षत (साफ चावल के दाने) और थोड़ा सा गुड़ मिलाना अत्यंत लाभकारी होता है। इसके अलावा, यदि आप कुंडली में सूर्य को मजबूत करना चाहते हैं, तो जल में एक चुटकी हल्दी या थोड़ा सा गंगाजल भी मिला सकते हैं। अर्घ्य देते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जल की धारा ऐसी होनी चाहिए कि सूर्य की किरणें उस जल से छनकर आपकी आंखों तक आएं, जिससे आँखों की रोशनी और शरीर की ऊर्जा में वृद्धि होती है। तांबे के लोटे में इन पवित्र चीजों को मिलाकर सूर्य मंत्र 'ॐ सूर्याय नमः' या 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' का जाप करते हुए जल अर्पित करने से समस्त पापों का नाश होता है और कार्यों में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।
रविवार का दिन क्यों माना जाता है बेहद विशेष और फलदायी?
रविवार का दिन प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य को समर्पित होने के कारण उनकी ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक है। इस दिन व्रत रखने, सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है, जिससे प्रशासनिक सेवा, उच्च पद और समाज में मान-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही, रविवार के दिन नमक का सेवन न करने या आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करने से आत्मविश्वास में जबरदस्त बढ़ोतरी होती है। जो लोग नियमित रूप से या कम से कम हर रविवार को सूर्य देव की उपासना करते हैं, उनके जीवन से नकारात्मक ऊर्जा हमेशा के लिए दूर हो जाती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।