सोनम वांगचुक के बाद अब अभिजीत दिपके ने भरी हुंकार, अनशन की घोषणा से गरमाया लद्दाख का पारा

लद्दाख की स्वायत्तता और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन एक नए मोड़ पर आ पहुंचा है। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य खराब होने के चलते जबरन अस्पताल ले जाए जाने के बाद, अब आंदोलन की कमान अभिजीत दिपके ने अपने हाथों में ले ली है। अभिजीत दिपके ने साफ ऐलान कर दिया है कि वे सोनम वांगचुक की उस अधूरी लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे और उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस घटनाक्रम ने लद्दाख के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, और अब यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया है।
अस्पताल भेजे गए सोनम वांगचुक, लेकिन हौसले अब भी बुलंद
पिछले कई दिनों से लद्दाख के अधिकारों को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य बीते 24 घंटों में काफी गिर गया था। डॉक्टरों की सलाह और प्रशासन के दबाव के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। हालांकि, उनके समर्थकों का दावा है कि वांगचुक अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अस्पताल से भी उन्होंने अपने साथियों को आंदोलन जारी रखने का संदेश दिया है, जिसके तुरंत बाद अभिजीत दिपके का सामने आना यह दर्शाता है कि यह मुहिम अब एक व्यक्ति से निकलकर एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है।
क्या है लद्दाख आंदोलन का असली मकसद?
लद्दाख के लोग मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगों को लेकर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना, इसे संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करना ताकि वहां की जमीन और संस्कृति सुरक्षित रह सके, और लद्दाख के लिए अलग से लोक सेवा आयोग का गठन करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से उनकी स्थानीय आवाज दब गई है और लद्दाख के पारिस्थितिक तंत्र को औद्योगिक विकास के नाम पर खतरा पैदा हो रहा है। यही कारण है कि स्थानीय युवा अब सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके जैसे चेहरों के साथ सड़क पर उतरकर अपना भविष्य सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं।
लखनऊ से लेह तक गूंज रही है मांग, प्रशासन पर बढ़ा दबाव
इस आंदोलन की गूंज सिर्फ लेह-लद्दाख की वादियों में ही नहीं, बल्कि दिल्ली और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में भी सुनाई दे रही है। सोशल मीडिया और एआई सर्च प्लेटफॉर्म्स पर भी लद्दाख के मुद्दे को लेकर काफी सर्च वॉल्यूम देखा जा रहा है। अभिजीत दिपके के अनशन पर बैठने के ऐलान के बाद स्थानीय प्रशासन और सरकार पर वार्ता के लिए दबाव और अधिक बढ़ गया है। जानकारों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ही लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बातचीत शुरू नहीं की, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र हो सकता है, जिससे वहां की शांति और व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।