सोने-चांदी की कीमतों में अचानक आई बड़ी गिरावट: ऑल-टाइम हाई से फिसले दाम, चांदी ₹5,000 से अधिक टूटी

घरेलू वायदा बाजार (MCX) और स्थानीय सर्राफा बाजारों में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार जारी रिकॉर्ड तेजी के बाद सोने और चांदी की कीमतों में अचानक तेज करेक्शन देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने का भाव अपने उच्चतम स्तर से फिसलकर नीचे आ गया है, जबकि चांदी में 2 से 3 प्रतिशत तक की भारी बिकवाली दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) में भी कीमती धातुओं पर ऊपरी स्तरों पर भारी दबाव देखा गया। हालिया तेजी के बाद आई इस गिरावट ने जहां आभूषण खरीदारों को थोड़ी राहत दी है, वहीं नए और पुराने निवेशकों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह गिरावट आगे भी जारी रहेगी या फिर खरीदारी का नया मौका बन रही है।
कीमतों में गिरावट के प्रमुख कारण
कमोडिटी और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने और चांदी में आई हालिया गिरावट के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं:
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उच्च स्तरों पर भारी मुनाफावसूली (Profit Booking): पिछले दिनों आई एकतरफा तूफानी तेजी के बाद अंतरराष्ट्रीय और घरेलू वायदा बाजारों में बड़े संस्थागत निवेशकों और ट्रेडर्स ने ऊंचे भाव पर जमकर मुनाफा काटा है।
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डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों के रुख को लेकर आए संकेतों के बाद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) और 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में सुधार हुआ है। मजबूत डॉलर विदेशी खरीदारों के लिए सोने को महंगा बना देता है, जिससे मांग पर दबाव पड़ता है।
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चांदी पर औद्योगिक मांग की सुस्ती का असर: चांदी न केवल एक कीमती धातु है बल्कि सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और ईवी जैसे उद्योगों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली औद्योगिक धातु भी है। वैश्विक विनिर्माण आंकड़ों में थोड़ी सुस्ती की आशंका के चलते चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा तेज गिरावट देखी गई।
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जियोपॉलिटिकल तनाव में तात्कालिक ठहराव: पश्चिम एशिया और वैश्विक स्तर पर तनाव में किसी नई अप्रत्याशित बढ़ोतरी के न होने से 'सेफ-हेवन' (सुरक्षित निवेश) के रूप में सोने की तात्कालिक मांग थोड़ी संतुलित हुई है।
निवेशकों के लिए आगे क्या होनी चाहिए सटीक रणनीति?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी के लंबी अवधि के फंडामेंटल्स (बुनियादी ढांचे) अभी भी बेहद मजबूत हैं। मौजूदा गिरावट एक सामान्य तकनीकी करेक्शन है, जो तेज रैली के बाद स्वाभाविक मानी जाती है। ऐसे में निवेशकों को निम्नलिखित रणनीतियां अपनानी चाहिए:
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'बाय ऑन डिप्स' (Buy on Dips) की नीति: एकमुश्त बड़ी पूंजी लगाने के बजाय हर 2-3% की गिरावट पर टुकड़ों में निवेश (Staggered Buying) करें। इससे आपकी खरीद लागत का औसत (Averaging) बेहतर बना रहेगा।
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डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF को प्राथमिकता दें: भौतिक आभूषणों में मेकिंग चार्ज और जीएसटी की अतिरिक्त लागत होती है। शुद्ध निवेश के नजरिए से गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF), गोल्ड म्यूचुअल फंड्स या डिजिटल गोल्ड सबसे लिक्विड और लागत-प्रभावी विकल्प हैं।
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पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन (10-15% आवंटन): अपने कुल वित्तीय निवेश पोर्टफोलियो का कम से कम 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा हमेशा सोने और चांदी में रखें। यह शेयर बाजार की अस्थिरता और महंगाई के खिलाफ सबसे मजबूत हेज (सुरक्षा कवच) का काम करता है।
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शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स रखें सख्त स्टॉपलॉस: जो लोग वायदा बाजार या शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग करते हैं, उन्हें अत्यधिक अस्थिरता को देखते हुए सख्त स्टॉपलॉस के साथ ही पोजीशन लेनी चाहिए और मौजूदा सपोर्ट लेवल्स के टूटने पर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए।
आगामी त्योहारी और शादियों के सीजन को देखते हुए घरेलू मांग में दोबारा मजबूती आने की पूरी संभावना है। इसलिए लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट घबराने का नहीं, बल्कि व्यवस्थित तरीके से अपने पोर्टफोलियो में कीमती धातुओं को जोड़ने का एक उपयुक्त अवसर है।