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हजारों साल पुराना रहस्यमयी ‘ममी मास्क’ मिला, सिर पर मौजूद हैं असली इंसानी बाल

पुरातत्व और विज्ञान की दुनिया से एक ऐसी हैरान और कँपकँपी पैदा कर देने वाली खोज सामने आई है, जिसने वैज्ञानिकों से लेकर आम जनता तक के होश उड़ा दिए हैं। हाल ही में खुदाई के दौरान शोधकर्ताओं को हजारों साल पुराना एक प्राचीन 'ममी मास्क' (Mummified Mask) मिला है। यह मास्क आम प्राचीन कलाकृतियों जैसा बिल्कुल नहीं है। इस मास्क की बनावट और इस पर मौजूद इंसानी अंगों के अवशेषों ने इसे दुनिया की सबसे रहस्यमयी और डरावनी खोजों की लिस्ट में शामिल कर दिया है, जिसे देखने वालों के रोंगटे खड़े हो रहे हैं।

सिर पर लगे इंसानी बाल और चेहरे की वो अजीबोगरीब मुस्कान

इस ममी मास्क की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसके सिर वाले हिस्से पर आज भी असली इंसानी बाल (Real Human Hair) मौजूद हैं, जो हजारों साल बीत जाने के बाद भी पूरी तरह नष्ट नहीं हुए हैं। लेकिन जो चीज़ इस मास्क को सबसे ज्यादा खौफनाक बनाती है, वह है इसके चेहरे पर उकेरी गई एक रहस्यमयी स्माइल। इस चेहरे की बनावट और मुस्कुराहट को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो यह प्राचीन ममी आज भी जीवित हो और किसी गहरी साजिश की तरह मुस्कुरा रही हो। इतिहास और पैरानॉर्मल रिसर्चर्स का मानना है कि इस मास्क की बनावट इतनी सजीव और डरावनी है कि इसे करीब से देखने के बाद कमजोर दिल वालों की रातों की नींद उड़ सकती है।

प्राचीन सभ्यताओं के किस खौफनाक रहस्य से जुड़ा है यह मास्क?

पुरातत्वविदों (Archaeologists) की शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इस मास्क का इस्तेमाल किसी खास धार्मिक अनुष्ठान या शव को दफनाने की रहस्यमयी परंपरा के दौरान किया जाता था। प्राचीन काल में ममी बनाने की प्रक्रिया के दौरान मृत व्यक्ति की आत्मा को सुरक्षित रखने और उसे दूसरी दुनिया में राह दिखाने के लिए ऐसे सजीव मास्क चेहरे पर लगाए जाते थे। इस मास्क पर असली इंसानी बालों का मिलना यह दर्शाता है कि शायद यह किसी बेहद शक्तिशाली राजा, पुरोहित या फिर किसी ऐसे व्यक्ति का हो सकता है जिसके शव को सहेजने के लिए उस दौर के तांत्रिकों या वैज्ञानिकों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। प्रयोगशाला में कार्बन डेटिंग के जरिए अब इसके सटीक समय और इसके इतिहास का पता लगाया जा रहा है।

वैश्विक पुरातत्व जगत में हलचल, भारत समेत दुनिया भर के वैज्ञानिक हैरान

इस खोज की खबर जंगल की आग की तरह पूरी दुनिया में फैल गई है। दिल्ली, मुंबई और उत्तर प्रदेश (Lucknow) समेत भारत के प्रमुख ऐतिहासिक शोध संस्थानों में भी इस खोज को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही है। भारतीय पुरातत्व के जानकार भी इस प्राचीन तकनीक को समझने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं कि आखिर हजारों साल तक इंसानी बाल और चेहरे के हाव-भाव कैसे इतने सुरक्षित रह सकते हैं। एआई सर्च इंजनों और सोशल मीडिया पर यह 'ममी मास्क' इस वक्त सबसे बड़ा ट्रेंडिंग टॉपिक बन चुका है, और लोग इस रहस्यमयी प्राचीन सभ्यता के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए उत्सुक हैं।

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