हवाई सफर पर ईरान और अमेरिका युद्ध की मार,एयर इंडिया ने बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज, अंतरराष्ट्रीय टिकट ₹26,000 तक हुए महंगे

News India Live, Digital Desk : मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य संघर्ष का सीधा असर अब भारतीय हवाई यात्रियों की जेब पर पड़ने लगा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल और जेट फ्यूल (ATF) के दाम लगभग दोगुने होने के कारण, टाटा समूह की एयरलाइन एयर इंडिया (Air India) ने अपने फ्यूल सरचार्ज (ईंधन शुल्क) में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकटों में ₹26,000 ($280) तक की भारी वृद्धि देखी जा रही है।क्यों और कितनी बढ़ी कीमतें?ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव और युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है। अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (IATA) के अनुसार, जेट फ्यूल की कीमतें मार्च के अंत तक $195 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसी घाटे की भरपाई के लिए एयर इंडिया ने दूरी के आधार पर नया सरचार्ज ढांचा लागू किया है:अंतरराष्ट्रीय रूट्स (सबसे ज्यादा असर): * उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया: इन लंबी दूरी की उड़ानों पर सबसे ज्यादा $280 (लगभग ₹26,000) का सरचार्ज लगाया गया है।यूरोप (यूके सहित): यहाँ यात्रियों को $205 (करीब ₹19,000) अतिरिक्त देने होंगे।अफ्रीका: $130 (करीब ₹12,000) का इजाफा।पड़ोसी देश (SAARC): $24 (करीब ₹2,300) की बढ़ोतरी।घरेलू रूट्स (दूरी के आधार पर):500 किमी तक: ₹299501-1000 किमी: ₹3992000 किमी से अधिक: ₹899कब से लागू होंगी नई दरें?एयर इंडिया के अनुसार, ये संशोधित दरें चरणबद्ध तरीके से लागू होंगी:घरेलू और अधिकांश अंतरराष्ट्रीय रूट्स: 8 अप्रैल 2026 से।यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया: 10 अप्रैल 2026 से।क्या पुराने टिकटों पर भी लगेगा चार्ज?राहत की बात यह है कि जिन यात्रियों ने नई दरों के लागू होने से पहले अपने टिकट बुक कर लिए हैं, उन्हें अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होगा। हालांकि, यदि वे अपनी यात्रा की तारीख या रूट में कोई बदलाव (Rescheduling) करते हैं, तो उन्हें नए सरचार्ज के हिसाब से भुगतान करना पड़ेगा।अन्य एयरलाइंस पर भी दबावएयर इंडिया के इस कदम के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि इंडिगो (IndiGo) और स्पाइसजेट जैसी अन्य प्रमुख एयरलाइंस भी जल्द ही अपने किरायों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। जानकारों का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक हवाई यात्रा आम आदमी की पहुंच से दूर होती जाएगी।