हाई प्रोडक्टिविटी और अत्यधिक ऊर्जा से खुश होने की जरूरत नहीं

भागदौड़ भरी इस आधुनिक और चमकदार दुनिया में हर कोई यही चाहता है कि वह दिन-रात चौगुनी तरक्की करे, अपने ऑफिस या बिजनेस में सबसे ज्यादा प्रोडक्टिव (High Productivity) रहे और कभी न थकने वाली ऊर्जा के साथ अपने हर लक्ष्य को हासिल कर ले। जब कोई व्यक्ति अचानक से बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाता है, घंटों बिना सोए लगातार काम करता रहता है, बहुत तेज रफ्तार से बातें करता है और उसके दिमाग में नए-नए आइडियाज का सैलाब उमड़ने लगता है, तो आमतौर पर लोग और खुद वह इंसान यही समझता है कि यह उसकी असाधारण क्षमता, बेहतरीन फोकस या जबरदस्त सकारात्मक ऊर्जा का प्रमाण है। लेकिन मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, मनोचिकित्सकों और न्यूरोलॉजिस्ट्स की हालिया रिसर्च में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि हमेशा हाई एनर्जी में रहना और सामान्य से अधिक प्रोडक्टिव महसूस होना हमेशा अच्छी बात नहीं होती है, बल्कि इसके पीछे 'हाइपोमेनिया' (Hypomania) नामक एक मानसिक स्थिति छिपी हो सकती है। इस स्थिति को समय रहते पहचान पाना आम लोगों के लिए बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर किसी बीमारी जैसी महसूस नहीं होती बल्कि व्यक्ति को अत्यधिक खुश या उत्साहित रखती है। आज के इस विस्तृत, मनोवैज्ञानिक और स्वास्थ्यवर्धक आलेख में हम आपको हाइपोमेनिया के लक्षणों, इसकी पहचान करने के तरीकों और इसके पीछे छिपे खतरों के बारे में पूरी जानकारी देने जा रहे हैं।
क्या है 'हाइपोमेनिया' और क्यों इसे सामान्य प्रोडक्टिविटी समझना पड़ सकता है भारी?
मनोविज्ञान की भाषा में हाइपोमेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar Disorder) या मूड स्विंग्स से जुड़ा हुआ एक ऐसा हल्का या कम गंभीर चरण होता है जिसमें व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक ऊर्जा का स्तर सामान्य इंसानों की तुलना में कई गुना अधिक बढ़ जाता है। इस अवस्था में व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है कि उसके पास असीम शक्तियां आ गई हैं, उसे नींद की बहुत कम आवश्यकता होती है, उसका आत्मविश्वास आसमान छूने लगता है और वह एक साथ कई प्रोजेक्ट्स पर बिना थके काम करने लगता है। चूंकि इस दौरान व्यक्ति बहुत ज्यादा रचनात्मक, मिलनसार और खुशमिजाज नजर आता है, इसलिए उसके परिवार वाले, दोस्त और सहकर्मी उसकी इस स्थिति को उसकी सफलता या हाई प्रोडक्टिविटी मानकर उसकी तारीफ करते हैं। लेकिन असली समस्या तब शुरू होती है जब हाइपोमेनिया का यह चरण अचानक बिना किसी चेतावनी के नीचे गिरता है और व्यक्ति गहरे मानसिक अवसाद (Depression), थकान, निराशा और मानसिक असंतुलन के अंधेरे कुएं में धंस जाता है, जिसे संभालना बहुत कठिन हो जाता है।
हाइपोमेनिया के प्रमुख लक्षण: कैसे पहचानें कि यह सामान्य ऊर्जा नहीं बल्कि मानसिक स्थिति है?
किसी भी आम इंसान के लिए यह पहचानना बेहद कठिन होता है कि उसकी या उसके किसी अपने की यह बढ़ी हुई प्रोडक्टिविटी असल में कोई मानसिक बदलाव है या सामान्य उत्साह। मनोचिकित्सकों के अनुसार, हाइपोमेनिया से ग्रसित व्यक्ति के व्यवहार में कुछ खास और स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं जिन पर समय रहते ध्यान देना बहुत जरूरी है। इस अवस्था में व्यक्ति की सोचने की रफ्तार इतनी तेज होती है कि उसके विचार एक विषय से दूसरे विषय पर बहुत तेजी से कूदते हैं, जिसे रेसिंग थॉट्स (Racing Thoughts) कहा जाता है। वह बहुत ही जल्दबाजी में बड़े-बड़े और बिना सोचे-समझे वित्तीय फैसले ले सकता है, अनाप-शनाप खरीदारी कर सकता है या अपने काम में अत्यधिक जोखिम उठा सकता है। इसके अलावा, ऐसे लोगों को सोने की बहुत कम जरूरत महसूस होती है और वे केवल दो-तीन घंटे की नींद के बाद ही खुद को पूरी तरह तरोताजा महसूस करते हैं, जबकि अंदर ही अंदर उनका तंत्रिका तंत्र बुरी तरह थक रहा होता है।
जब अति-उत्सकता और ऊर्जा बदल जाती है विनाशकारी परिणामों में
शुरुआती दौर में हाइपोमेनिया के ये लक्षण व्यक्ति को बहुत ही आनंददायक और फायदेमंद लग सकते हैं क्योंकि वह कम समय में बहुत सारे काम पूरे कर लेता है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, इसका असर उसके व्यक्तिगत रिश्तों, पारिवारिक जीवन और पेशेवर करियर पर बहुत बुरा पड़ने लगता है। जब कोई व्यक्ति बिना सोचे-समझे अपनी ऊर्जा को गलत दिशा में झोंक देता है या अपने सहपाठियों तथा सहकर्मियों के साथ अत्यधिक आक्रामक या अति-आत्मविश्वासी रवैया अपनाने लगता है, तो उसके संबंध बिगड़ने लगते हैं। इस स्थिति के बारे में समाज में जागरूकता की बहुत कमी है, जिसके कारण लोग इसे केवल 'अजीब मूड' या 'स्वभाव की तेजी' मानकर टाल देते हैं। जब तक लोग यह समझ पाते हैं कि यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक चिकित्सीय समस्या है, तब तक मरीज मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका होता है और उसे गंभीर मेडिकल ट्रीटमेंट की आवश्यकता पड़ने लगती है।
मानसिक संतुलन और अपनी सेहत की सही पहचान है सबसे बड़ा उपाय
यदि आपको या आपके किसी जानने वाले में भी इस प्रकार के लक्षण लगातार दिखाई दे रहे हैं, जहां कभी तो ऊर्जा का विस्फोट होता है और कुछ दिनों बाद अचानक गहरी उदासी या सुस्ती छा जाती है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। अपने शरीर और दिमाग के इन संकेतों को समझें, पर्याप्त मात्रा में नींद लें, मेडिटेशन और योग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं ताकि मन शांत रह सके। यदि यह समस्या बार-बार हो रही है और आपके दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है, तो किसी अच्छे मनोचिकित्सक (Psychiatrist) या काउंसलर से मिलकर थेरेपी या उचित सलाह लेने में बिल्कुल भी संकोच न करें। यह याद रखना बेहद आवश्यक है कि जीवन में सफलता और हाई प्रोडक्टिविटी तभी सार्थक है जब आपका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पूरी तरह सुरक्षित और संतुलित हो।