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हॉर्मुज जलडमरूमध्य की घेराबंदी के बीच शी जिनपिंग का शांति प्लान अमेरिका को दी नसीहत, दुनिया के सामने रखे 4 फॉर्मूले

News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बाद अब दुनिया की नजरें चीन के अगले कदम पर टिकी हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नौसेना की ताजा घेराबंदी और ईरान के साथ जारी भीषण तनाव के बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव चला है। बीजिंग में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद के साथ मुलाकात के दौरान जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति के लिए अपना ‘4-सूत्रीय शांति प्रस्ताव’ (4-Point Peace Plan) पेश किया है। जिनपिंग का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता विफल हो चुकी है और पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट का खतरा मंडरा रहा है।जंगल राज के खिलाफ जिनपिंग की चेतावनी, अमेरिका पर साधा निशानाराष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी की कड़े शब्दों में आलोचना की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया को ‘जंगल राज’ की ओर लौटने की अनुमति नहीं दी जा सकती। जिनपिंग के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कानून की गरिमा को बरकरार रखना अनिवार्य है। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना अमेरिका को नसीहत दी कि चुनिंदा तरीके से अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करना वैश्विक स्थिरता के लिए घातक है।शी जिनपिंग के शांति प्लान के 4 मुख्य बिंदु:राष्ट्रपति जिनपिंग ने खाड़ी देशों और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए निम्नलिखित चार सूत्र दुनिया के सामने रखे हैं:शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व: खाड़ी देशों को एक-दूसरे के करीब आना होगा और एक स्थायी सुरक्षा ढांचे का निर्माण करना होगा।संप्रभुता का सम्मान: किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।अंतरराष्ट्रीय कानून: संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और अंतरराष्ट्रीय नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए।विकास और सुरक्षा में संतुलन: विकास के बिना सुरक्षा और सुरक्षा के बिना विकास संभव नहीं है, सभी पक्षों को मिलकर सकारात्मक माहौल बनाना होगा।हॉर्मुज में तनाव: चीन ने तोड़ी अमेरिकी घेराबंदी?रिपोर्ट्स के अनुसार, जहाँ एक ओर अमेरिका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले ईरानी तेल के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए नौसेना तैनात कर दी है, वहीं चीन ने इस नाकेबंदी के बावजूद अपने जहाजों को वहां से गुजारना जारी रखा है। जिनपिंग ने साफ कर दिया है कि चीन इस क्षेत्र में शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए अपनी ‘रचनात्मक भूमिका’ निभाता रहेगा। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत के लिए तैयार हैं, जिससे युद्ध की आग थमने की थोड़ी उम्मीद जगी है।वैश्विक बाजार पर असर: कच्चे तेल की कीमतों में उछालहॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। इस रणनीतिक रास्ते की घेराबंदी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मचा दिया है। यदि जिनपिंग का शांति प्रस्ताव सफल नहीं होता और तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल आना तय है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर हैं।

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