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114 नए राफेल जेट्स से आसमान में मचेगा भारत का डंका! ₹3.25 लाख करोड़ की मेगा डील पर वायुसेना प्रमुख का बड़ा ऐलान, जानें कब होगी फाइनल

भारतीय वायुसेना की घटती लड़ाकू स्क्वाड्रन क्षमता को तुरंत मजबूती देने और दोनों मोर्चों (चीन व पाकिस्तान) पर सामरिक बढ़त सुनिश्चित करने के लिए 114 नए मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की खरीद प्रक्रिया तेज हो गई है। एयर फोर्स डे से पूर्व आयोजित वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने देश के सबसे बड़े रक्षा सौदे को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। वायुसेना प्रमुख ने पुष्टि की कि 114 आधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर फ्रांस के साथ बातचीत निरंतर प्रगति पर है। यदि सभी तकनीकी, वाणिज्यिक और प्रशासनिक औपचारिकताएं समय सीमा के भीतर पूरी हो जाती हैं, तो वित्त वर्ष 2026-27 के अंत यानी मार्च 2027 तक इस ऐतिहासिक रक्षा अनुबंध पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

₹3.25 लाख करोड़ की मेगा डील: देश के इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा खरीद

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) द्वारा फरवरी में प्राथमिक स्वीकृति मिलने के बाद इस सौदे को फ्रांस की सरकार के साथ जी-टू-जी (गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट) समझौते के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये (लगभग 38 से 40 बिलियन डॉलर) की अनुमानित लागत वाला यह प्रोजेक्ट स्वतंत्र भारत का अब तक का सबसे विशाल रक्षा खरीद अभियान है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारतीय वायुसेना में राफेल लड़ाकू विमानों के मौजूदा बेड़े का विस्तार करना और रखरखाव, लॉजिस्टिक्स व ट्रेनिंग की लागत को कम करना है। जब एक ही प्लेटफॉर्म की बड़ी संख्या वायुसेना में शामिल होती है, तो उसके स्पेयर पार्ट्स, पायलट ट्रेनिंग और ग्राउंड सपोर्ट सिस्टम का संचालन बहुत किफायती और व्यावहारिक हो जाता है।

भारत में बनेगा राफेल का विशाल बेड़ा: कुल संख्या पहुंचेगी 176 के पार

यदि 114 नए राफेल विमानों की यह डील सफलतापूर्वक संपन्न होती है, तो भारतीय सशस्त्र बलों के पास राफेल विमानों का दुनिया का सबसे बड़ा विदेशी बेड़ा होगा।

  • भारतीय वायुसेना (IAF): 36 राफेल जेट्स पहले से ही अंबाला और हाशिमारा एयरबेस पर तैनात हैं। नए 114 विमानों के जुड़ने से वायुसेना के पास कुल 150 अत्याधुनिक राफेल विमान हो जाएंगे।

  • भारतीय नौसेना (Indian Navy): आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य के लिए 26 राफेल-एम (मरीन) विमानों की खरीद प्रक्रिया पहले से अंतिम चरण में है।

  • कुल ताकत: थल और जल दोनों सीमाओं की सुरक्षा के लिए भारत के पास कुल 176 राफेल फाइटर जेट्स की अजेय ताकत मौजूद होगी।

'मेक इन इंडिया' और स्वदेशी हथियारों का अभूतपूर्व एकीकरण

इस सौदे की सबसे क्रांतिकारी शर्त तकनीक हस्तांतरण (ToT) और स्वदेशी उपकरणों का संयोजन है। 114 में से पहले 18 विमान 'फ्लाई-अवे' कंडीशन में सीधे फ्रांस से आएंगे, जबकि बाकी 96 विमानों का निर्माण भारत में ही घरेलू रक्षा कंपनियों और डसॉल्ट एविएशन के संयुक्त उपक्रम के तहत किया जाएगा। रक्षा सचिव और वायुसेना प्रमुख दोनों ने स्पष्ट किया है कि इन विमानों में भारत के डीआरडीओ (DRDO) द्वारा विकसित 'उत्तम' एईएसए रडार, अस्त्र बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइलें, रुद्रम एंटी-रेडिएशन मिसाइलें और स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) सूट को पूरी तरह एकीकृत किया जाएगा। इससे न सिर्फ विदेशी हथियारों पर निर्भरता खत्म होगी बल्कि भविष्य में गोला-बारूद के लिए भारत को किसी अन्य देश का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा।

घटती स्क्वाड्रन क्षमता और हर साल 36 से 40 नए फाइटर्स की जरूरत

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने वायुसेना की घटती कॉम्बैट स्ट्रेंथ पर चिंता भी व्यक्त की। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास स्वीकृत 42 स्क्वाड्रनों के मुकाबले मात्र 29-30 स्क्वाड्रन ही सक्रिय हैं। पुराने पड़ चुके मिग-21 और मिग-29 विमानों के क्रमिक रिटायरमेंट के चलते यह अंतर और बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश को अपनी संपूर्ण सैन्य क्षमता और युद्धक तैयारियों को बनाए रखने के लिए आने वाले कुछ वर्षों तक हर साल कम से कम 36 से 40 नए लड़ाकू विमानों को बेड़े में शामिल करने की सख्त दरकार है। इसके लिए स्वदेशी तेजस मार्क-1ए, तेजस मार्क-2 और पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के उत्पादन में तेजी लाना अनिवार्य होगा।

भविष्य की सुरक्षा ढाल: स्पाइरल डेवलपमेंट और इंजन का घरेलू निर्माण

वायुसेना प्रमुख ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत को केवल लड़ाकू विमान असेंबल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जेट इंजनों का निर्माण भी देश के भीतर ही करना होगा। उन्होंने इसे 'स्पाइरल डेवलपमेंट मॉडल' करार दिया, जिसके तहत समय-समय पर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर अपडेट्स के जरिए विमानों को हमेशा नई वैश्विक चुनौतियों के अनुकूल रखा जाता है। 114 नए राफेल जेट्स की यह मेगा डील न केवल भारतीय वायुक्षेत्र को अभेद्य बनाएगी, बल्कि उत्तरी सीमा पर चीन की जे-20 जैसी पांचवीं पीढ़ी की तैनाती के सामने भारत की पारंपरिक प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी।

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