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15 साल के सबसे खराब रिकॉर्ड की ओर शेयर बाजार, जानिए इस भारी गिरावट के 3 बड़े कारण

भारतीय शेयर बाजार और निवेशकों के लिए इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक दौर चल रहा है। कभी 'बाय-बाय' यानी लगातार खरीदारी के दम पर आसमान छूने वाला शेयर बाजार अब निवेशकों के लिए 'बाय-बाय' (अल्विदा कहने) का समय बनता जा रहा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी (Nifty) में आई भारी और लगातार गिरावट ने पिछले 15 वर्षों का रिकॉर्ड हिलाकर रख दिया है। बाजार के जानकारों और विश्लेषकों का मानना है कि मार्केट जिस रफ्तार से नीचे फिसल रहा है, वह पिछले डेढ़ दशक के सबसे खराब प्रदर्शन की ओर इशारा कर रहा है। म्यूचुअल फंड और खुदरा निवेशकों की गाढ़ी कमाई पर इस बड़ी मंदी का गहरा असर पड़ रहा है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से लेकर छोटे शहरों तक के निवेशकों के मन में एक ही सवाल है कि आखिर इस अचानक आई ऐतिहासिक गिरावट के पीछे की असल वजहें क्या हैं और क्या बाजार में अभी और अधिक गोता लगने की आशंका बाकी है।

रिकॉर्ड तोड़ मंदी और निवेशकों की संपत्ति में भारी सेंध

भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में कई उतार-चढ़ाव देखे गए हैं, लेकिन मौजूदा समय में जो मंदी देखने को मिल रही है, उसने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। निफ्टी और सेंसेक्स में लगातार हो रहे बिकवाली के दौर के कारण निवेशकों की हजारों-लाखों करोड़ रुपये की संपत्ति चंद दिनों में साफ हो चुकी है। बाजार की इस दयनीय स्थिति को देखकर बड़े-बड़े दिग्गज निवेशक भी अपनी रणनीतियों पर दोबारा विचार करने को मजबूर हो गए हैं। पिछले 15 वर्षों के ऐतिहासिक आंकड़ों को खंगालने पर यह बात सामने आती है कि बाजार का यह मौजूदा ट्रेंड तकनीकी और फंडामेंटल दोनों ही दृष्टियों से बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच गया है। छोटे खुदरा निवेशकों ने जो पैसा आईपीओ और शेयरों में लगाया था, उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। बाजार के इस निराशाजनक माहौल ने हर तरफ सनसनी फैला दी है और निवेशक यह समझ नहीं पा रहे हैं कि इस गिरते बाजार में अपने पोर्टफोलियो को कैसे बचाया जाए।

कारण नंबर 1: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार में इस भयंकर गिरावट के पीछे सबसे पहला और सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई (FIIs) द्वारा की जा रही अंधाधुंध बिकवाली है। विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजारों से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और अन्य वैश्विक बाजारों में निवेश कर रहे हैं। जब बड़े विदेशी निवेशक किसी उभरते हुए बाजार से भारी मात्रा में अपनी होल्डिंग्स बेचते हैं, तो सूचकांक का नीचे गिरना तय माना जाता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी ब्याज दरों के समीकरणों और विदेशी फंड्स के रुख ने भारतीय शेयर बाजार के मनोबल को बुरी तरह तोड़ दिया है। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को थामने की पूरी कोशिश की, लेकिन विदेशी पूंजी की इस बेतहाशा निकासी के आगे उनका यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है, जिससे निफ्टी लगातार गोता लगा रहा है।

कारण नंबर 2: कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे और महंगाई का दबाव

शेयर बाजार में गिरावट का दूसरा सबसे बड़ा कारण देश की प्रमुख कॉरपोरेट कंपनियों के तिमाही वित्तीय नतीजे (Quarterly Earnings) उम्मीद से काफी कमजोर रहना है। ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी, बैंकिंग और आईटी सेक्टर की कई दिग्गज कंपनियों ने अपने मुनाफे में गिरावट दर्ज कराई है, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है। इसके अलावा, देश और दुनिया भर में बनी महंगाई की स्थिति और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की नीतियों ने कंपनियों की उधार लेने की लागत को बढ़ा दिया है। जब कंपनियों की बिक्री और मुनाफा दोनों प्रभावित होते हैं, तो उनके शेयरों के दाम नीचे आना स्वाभाविक है। बढ़ती लागत और मांग में सुस्ती के कारण बाजार के बुनियादी फंडामेंटल्स कमजोर पड़ गए हैं, जिसका सीधा असर निफ्टी की चाल पर देखने को मिल रहा है।

कारण नंबर 3: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव

तीसरा और सबसे अहम कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे गंभीर भू-राजनीतिक तनाव और क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतों में अस्थिरता है। दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे युद्ध और संघर्षों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बुरी तरह बाधित हुई है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम बढ़ने या सप्लाई रुकने का सीधा असर देश के चालू खाते के घाटे (CAD) और राजकोषीय स्थिति पर पड़ता है। इसके अलावा वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंकाओं ने भी निवेशकों के जोखिम उठाने की क्षमता को बेहद सीमित कर दिया है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक शेयर जैसे जोखिम भरे बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ भागने लगते हैं, जिससे भारतीय बाजार को भी इसका भारी खमियाजा भुगतना पड़ रहा है।

निवेशकों के लिए आगे की राह और बाजार विशेषज्ञों की सलाह

मौजूदा समय में जिस प्रकार से निफ्टी और शेयर बाजार गोता लगा रहा है, उससे यह साफ है कि आने वाले कुछ हफ्ते निवेशकों के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरे रहने वाले हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को इस समय घबराकर पैनिक सेलिंग (Panic Selling) करने से बचना चाहिए, क्योंकि बाजार का गिरना और चढ़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। जो निवेशक लॉन्ग-वेजन (Long-term) के नजरिए से अच्छे फंडामेंटल्स वाली कंपनियों में निवेश करते हैं, उन्हें मंदी के दौर में भी धैर्य बनाए रखना चाहिए। हालांकि, नए निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले वित्तीय सलाहकारों की राय जरूर लें और जोखिम को अच्छी तरह समझ लें। यह 15 साल का सबसे खराब दौर भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए एक वेक-अप कॉल है, जिससे सीख लेकर नीति-निर्माता और निवेशक भविष्य की रणनीतियों को मजबूत बना सकते हैं।

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