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40 की उम्र के बाद स्लो मेटाबॉलिज्म और हॉर्मोन्स ने बढ़ा दिया है वजन? आज ही से करें ये 5 आसान बदलाव

उम्र के एक खास पड़ाव पर पहुंचने के बाद हमारे शरीर की कार्यप्रणाली में कई बड़े प्राकृतिक बदलाव आते हैं। अक्सर देखा गया है कि 30 या 40 की उम्र पार करते ही लोगों का वजन अचानक तेजी से बढ़ने लगता है, खासकर पेट और कमर के आसपास चर्बी जमा होने लगती है। इस उम्र में बहुत से लोग शिकायत करते हैं कि वे पहले की तरह ही खाना खा रहे हैं और उतनी ही मेहनत कर रहे हैं, फिर भी उनका मोटापा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों के मुताबिक, 40 के बाद वजन बढ़ने की असली वजह शरीर का धीमा पड़ता मेटाबॉलिज्म (Slow Metabolism) और हॉर्मोन्स में होने वाले उतार-चढ़ाव होते हैं। लेकिन आपको परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है; अपनी दिनचर्या में 5 महत्वपूर्ण और आसान बदलाव करके आप इस उम्र में भी बढ़ती चर्बी को रोक सकते हैं और दोबारा एक फिट और एनर्जेटिक बॉडी हासिल कर सकते हैं।

मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने के लिए डाइट में शामिल करें प्रोटीन

40 की उम्र के बाद हमारे शरीर की मांसपेशियां (Muscle Mass) धीरे-धीरे कम होने लगती हैं, जिससे मेटाबॉलिज्म अपने आप सुस्त पड़ जाता है। सुस्त मेटाबॉलिज्म का मतलब है कि आपका शरीर कैलोरी को उतनी तेजी से बर्न नहीं कर पाता जितना पहले करता था। इस समस्या से निपटने का सबसे बेहतरीन तरीका है कि आप अपनी डेली डाइट में लीन प्रोटीन की मात्रा बढ़ा दें। प्रोटीन का सेवन करने से न केवल आपकी मांसपेशियां मजबूत बनी रहती हैं, बल्कि इसे पचाने में शरीर को अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है, जिससे मेटाबॉलिज्म स्वाभाविक रूप से तेज हो जाता है। अपनी थाली में दालें, पनीर, सोयाबीन, अंडे या स्प्राउट्स जैसी चीजों को प्राथमिकता दें।

हॉर्मोन्स के संतुलन के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और हैवी एक्सरसाइज है जरूरी

बढ़ती उम्र में महिलाओं में एस्ट्रोजन और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन जैसे महत्वपूर्ण हॉर्मोन्स का स्तर कम होने लगता है, जो सीधे तौर पर वजन बढ़ाने और थकावट के लिए जिम्मेदार होता है। इस हॉर्मोनल असंतुलन को ठीक करने के लिए केवल वॉक या कार्डियो करना काफी नहीं है। आपको सप्ताह में कम से कम तीन दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या वजन उठाने वाली एक्सरसाइज (Weight Training) को अपने वर्कआउट रूटीन में शामिल करना होगा। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने से शरीर में फैट-बर्निंग हॉर्मोन्स एक्टिव होते हैं, हड्डियां मजबूत होती हैं और शरीर को एक बेहतरीन टोन शेप मिलता है जो आपको उम्र से कई साल जवान दिखाता है।

रिफाइंड कार्ब्स को कहें अलविदा और फाइबर से दोस्ती करें

40 के बाद शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी भी प्रभावित होती है, जिसके कारण मीठी चीजें, मैदा, सफेद चावल और जंक फूड खाने से वजन बहुत तेजी से बढ़ता है। ऐसे में आपको रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन पूरी तरह सीमित कर देना चाहिए। इसके बजाय अपनी डाइट में कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और हाई फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे ओट्स, दलिया, हरी पत्तेदार सब्जियां, सलाद और मौसमी फलों को शामिल करें। फाइबर आपके पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है, पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है और ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकता है, जिससे फैट जमा होने की प्रक्रिया पर लगाम लगती है।

7 से 8 घंटे की गहरी नींद और तनाव प्रबंधन को न करें नजरअंदाज

अक्सर लोग वजन घटाने के चक्कर में जिम और डाइट पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन नींद और मानसिक तनाव को भूल जाते हैं। 40 की उम्र के बाद पारिवारिक और कामकाजी जिम्मेदारियों के कारण तनाव बढ़ना आम बात है। जब आप तनाव में होते हैं, तो शरीर में 'कोर्टिसोल' (Cortisol) नाम का स्ट्रेस हॉर्मोन रिलीज होता है, जो सीधे तौर पर पेट की जिद्दी चर्बी (Belly Fat) को बढ़ाता है। इसके साथ ही, नींद पूरी न होने से भूख बढ़ाने वाले हॉर्मोन्स एक्टिव हो जाते हैं। इसलिए वजन को नियंत्रित रखने के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी और सुकून भरी नींद लेना बेहद जरूरी है। तनाव कम करने के लिए आप योग या ध्यान का सहारा ले सकते हैं।

हाइड्रेशन और छोटे-छोटे मील पैटर्न को अपनाना है बेहद असरदार

बढ़ती उम्र में कई बार हमारा शरीर प्यास और भूख के बीच अंतर नहीं समझ पाता और हम कम पानी पीने के कारण ज्यादा खाना खाने लगते हैं। दिनभर में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी पीना आपके शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और मेटाबॉलिज्म को 30 प्रतिशत तक तेज करने में मदद करता है। इसके साथ ही, एक बार में बहुत सारा खाना खाने के बजाय हर तीन से चार घंटे में छोटे-छोटे और पौष्टिक मील (Small Meals) लें। यह आदत आपके पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालती और शरीर में ऊर्जा का स्तर पूरे दिन एक समान बनाए रखती है, जिससे वजन घटाने का आपका सफर बेहद आसान और आनंददायक हो जाता है।

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