58 साल की उम्र में अरशद वारसी ने खोले नए एक्टर्स के राज! बोले—यंग जनरेशन है बेहद टैलेंटेड, पर उनमें गायब हो रहा है बस एक हुनर

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने बेबाक अंदाज और दमदार कॉमिक टाइमिंग के लिए मशहूर अभिनेता अरशद वारसी (Arshad Warsi) ने बॉलीवुड में लगभग तीन दशक लंबे सफर को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' के सर्किट से लेकर हालिया रिलीज 'धमाल 4' (Dhamaal 4) तक, अरशद ने सिनेमा के बदलते दौर और कलाकारों की कई पीढ़ियों को बहुत करीब से देखा है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान 58 वर्षीय इस मंझे हुए कलाकार ने आज के दौर के युवा (यंग) अभिनेताओं के टैलेंट की खुलकर सराहना की, लेकिन साथ ही उनके काम करने के तौर-तरीकों और घटते सब्र को लेकर एक बड़ा और दिलचस्प खुलासा भी किया है।
आज की जनरेशन है सुपर-प्रोफेशनल, लेकिन गायब हो रहा है धीरज
अरशद वारसी का मानना है कि आज की नई पीढ़ी के एक्टर्स अपनी कला को लेकर बेहद फोकस्ड, गंभीर और पेशेवर हैं। उन्हें अच्छी तरह पता है कि उन्हें करियर में क्या हासिल करना है और वे अपनी प्राथमिकताओं को लेकर पूरी तरह स्पष्ट रहते हैं। हालांकि, इसके साथ ही उनका यह भी कहना है कि इस आधुनिक और तेज रफ्तार दौर में 'धैर्य' यानी सब्र की खूबी धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है। अरशद के मुताबिक, नए कलाकार थोड़े संवेदनशील होते हैं और वे फिल्म निर्माण की उस सामूहिक (मिल-जुलकर काम करने वाली) प्रक्रिया की अहमियत को कई बार नजरअंदाज कर देते हैं, जो सिनेमा को जीवंत बनाती है।
'गोलमाल' के सेट का वह दिलचस्प किस्सा: जब रोहित शेट्टी ने किया था हैरान करने वाला खुलासा
अपने व्यस्त वर्कफ्रंट के बीच हाल ही में 'वेलकम टू द जंगल', 'प्रीतम एंड पेड्रो' और 'धमाल 4' जैसी प्रोजेक्ट्स में लगातार सक्रिय रहने वाले अरशद ने इंडस्ट्री के वर्क कल्चर में आए बदलावों पर रोशनी डाली। उन्होंने फिल्म 'गोलमाल' (Golmaal) की शूटिंग का एक वाकया साझा किया, जब डायरेक्टर रोहित शेट्टी ने उन्हें और अजय देवगन को देखकर एक मजेदार तुलना की थी। अरशद ने याद करते हुए बताया कि वे और अजय देवगन साठ साल के करीब होने के बावजूद खतरनाक स्टंट—जैसे ट्रेडमिल पर दौड़ना, लटकना और गिरना—करके आते और चुपचाप अपनी कुर्सी पर बैठकर अगले शॉट का इंतजार करते थे।
मसाज करवाने चले जाते हैं यंग एक्टर्स: अरशद ने नए और पुराने अभिनेताओं के एटीट्यूड में बताया फर्क
रोहित शेट्टी के हवाले से बात को आगे बढ़ाते हुए अरशद ने कहा कि निर्देशक ने उनसे कहा था कि आजकल के युवा कलाकार एक शॉट देने के बाद सीधे अपनी वैनिटी वैन में बॉडी मसाज करवाने चले जाते हैं, और क्रू को उनके वापस आने तक इंतजार करना पड़ता है। अरशद ने तंज कसते हुए कहा कि जहां हम इस उम्र में भी बिना किसी नखरे के लगातार काम में जुटे रहते हैं, वहीं नई पीढ़ी को हर चीज तुरंत और बेहद आरामदायक माहौल में चाहिए होती है। वे सिर्फ अपने काम और आराम तक सीमित रहना चाहते हैं, जिससे टीम वर्क का तालमेल कई बार बिगड़ जाता है।
'मैं, मैं और मैं' वाली सोच से नहीं चलता काम: सिर्फ खुद पर फोकस न रखें एक्टर्स
आलोचना के साथ-साथ अरशद यह भी स्पष्ट करते हैं कि वे नई पीढ़ी की काबिलियत को खारिज नहीं कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि किसी को एक्टिंग की दुनिया में लंबी पारी खेलनी है, तो उसे सिर्फ अपनी परफॉर्मेंस या 'मैं' (सिर्फ खुद) तक सीमित नहीं रहना चाहिए। एक कलाकार को यह भी समझना जरूरी है कि उस समय निर्देशक, निर्माता और अन्य सह-कलाकार किन शारीरिक या मानसिक परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। फिल्म मेकिंग एक साझा प्रयास है, और जब तक आप दूसरों की स्थिति का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक एक बेहतरीन माहौल नहीं बन सकता।
आज भी उतनी ही ऊर्जा के साथ सक्रिय हैं अरशद वारसी
साठ की उम्र की दहलीज पर खड़े अरशद वारसी आज भी काम को लेकर युवाओं जितनी ऊर्जा रखते हैं। थियेटर से लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म्स तक, उनका सफर पूरी रफ्तार से जारी है। इस जुलाई में ही उनकी नई सीरीज 'प्रीतम एंड पेड्रो' जियो हॉटस्टार पर रिलीज हुई है, और बड़े पर्दे पर वे मल्टीस्टारर कॉमेडी 'धमाल 4' तथा 'वेलकम टू द जंगल' के जरिए दर्शकों को लगातार हंसाने का काम कर रहे हैं। उनका यह तजुर्बा और बेबाक दृष्टिकोण साफ बयां करता है कि अभिनय की दुनिया में अनुशासन और समझ का कोई विकल्प नहीं है।