7 दिन लगातार मूसलाधार बारिश की बड़ी चेतावनी! पूर्वोत्तर में आफत के बादल तो दिल्ली, यूपी और हरियाणा में झमाझम बरसेंगे बदरा

विशेष मौसम रिपोर्टर, नई दिल्ली: देश भर में मानसून का दूसरा चरण पूरी आक्रामकता के साथ आगे बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आगामी 7 दिनों के लिए पूरे देश के मौसमी परिदृश्य को लेकर एक विस्तृत और चेतावनी भरा बुलेटिन जारी किया है। मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में जहां अगले एक सप्ताह तक आफत की मूसलाधार बारिश और बाढ़ की आशंका बनी हुई है, वहीं उत्तर भारत के मैदानी इलाकों—विशेषकर दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और पूर्वी राजस्थान में मानसूनी बादल जमकर बरसने वाले हैं।
बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और उत्तर-पश्चिम भारत पर सक्रिय मानसूनी ट्रफ लाइन (Monsoon Trough) के संयुक्त प्रभाव के कारण यह वायुमंडलीय बदलाव देखने को मिल रहा है। इसके प्रभाव से न केवल तापमान में गिरावट आएगी, बल्कि कई निचले इलाकों में जलभराव, नदियों के उफान और यातायात में बाधा का सामना करना पड़ सकता है।
पूर्वोत्तर भारत में बादलों का विकराल रूप: असम, मेघालय और अरुणाचल में आफत की बारिश
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, पूर्वोत्तर भारत में अगले 7 दिनों तक बारिश की तीव्रता सबसे अधिक रहने वाली है। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में मौसम विभाग ने 'ऑरेंज' और कुछ स्थानों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है। इन राज्यों में भूमिसतह पर नम हवाओं के जमाव और पर्वतीय भू-भाग के कारण बादलों की निरंतर आवाजाही बनी हुई है, जिससे 20 सेंटीमीटर से भी अधिक दैनिक वर्षा होने का अनुमान है।
असम के ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे मैदानी इलाकों में अचानक बाढ़ (Flash Floods) का खतरा बढ़ गया है। वहीं मेघालय के चेरापूंजी और मौसिनराम क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश के चलते जनजीवन पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। स्थानीय प्रशासन और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (SDMA) को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
उत्तर भारत में मॉनसून की आक्रामक वापसी: दिल्ली-एनसीआर, यूपी और हरियाणा पर विशेष अलर्ट
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में लंबे समय से सुस्त पड़ा मानसून एक बार फिर पूरी ताकत से सक्रिय हो चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अगले 7 दिनों तक मध्यम से भारी बारिश का दौर जारी रहने का अलर्ट जारी किया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे सटे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम व फरीदाबाद में आसमान में बादलों का डेरा रहेगा और रुक-रुक कर गरज-चमक के साथ मूसलाधार बौछारें पड़ती रहेंगी।
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी व पूर्वी जिलों—जैसे लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, बरेली, मेरठ और सहारनपुर में आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने और भारी बारिश की गंभीर चेतावनी दी गई है। इसके अतिरिक्त, हरियाणा के अंबाला, करनाल, रोहतक, हिसार और गुरुग्राम जिलों में मानसूनी बारिश से फसलों को तो संजीवनी मिलेगी, लेकिन शहरी क्षेत्रों में जलभराव की समस्या विकराल हो सकती है।
पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का खतरा: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में अलर्ट जारी
मैदानी इलाकों के साथ-साथ उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में भी मौसम की मार झेलनी पड़ सकती है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के लिए आगामी 7 दिनों के दौरान भूस्खलन (Landslides) और फ्लैश फ्लड की चेतावनी दी है।
उत्तराखंड के देहरादून, नैनीताल, उत्तरकाशी, चमोली और पौड़ी गढ़वाल जिलों में भारी बारिश को देखते हुए यलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं हिमाचल प्रदेश के शिमला, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और चंबा में नदियों-नालों के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों और मुख्य पर्वतीय मार्गों पर चट्टानें खिसकने से आवागमन प्रभावित हो सकता है। मौसम विभाग ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की है कि वे मौसम का सटीक हाल जाने बिना पहाड़ियों की अनावश्यक यात्रा करने से बचें।
मध्य और पश्चिमी भारत का हाल: राजस्थान और मध्य प्रदेश में झमाझम का दौर
मानसून की यह नई प्रणाली केवल उत्तर और पूर्वोत्तर भारत तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और छत्तीसगढ़ में भी अगले 7 दिनों के दौरान मानसूनी गतिविधियों में तेजी देखने को मिलेगी।
पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के कोटा, उदयपुर, जयपुर और भरतपुर संभागों में मध्यम से भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। वहीं मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा संभागों में कई स्थानों पर मूसलाधार वर्षा और बिजली कड़कने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। इसके प्रभाव से राज्य के सभी प्रमुख बांधों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ेगी, जिससे सिंचाई और पेयजल आपूर्ति में सुधार होगा।
7 दिनों की भारी बारिश के दौरान सुरक्षा के उपाय: IMD और प्रशासन की एडवाइजरी
मौसम विभाग (IMD) और आपदा प्रबंधन विभागों ने भारी बारिश के इस 7 दिवसीय चक्र को देखते हुए नागरिकों, किसानों और वाहन चालकों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए हैं:
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जलभराव वाले इलाकों से बचें: शहरी क्षेत्रों में सड़कों पर पानी भरने की स्थिति में वाहन चलाने से बचें और जलजमाव वाले अंडरपास या निचले पुलों से दूरी बनाए रखें।
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वज्रपात से सुरक्षा: बारिश और कड़कती बिजली के दौरान किसी भी बड़े पेड़, लोहे के ढांचे या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें। घर के भीतर रहें और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग निकाल दें।
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किसानों के लिए सलाह: खेतों में उगे धान, मक्का और सब्जियों के खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी (Drainage) का उचित प्रबंध करें और तेज हवाओं या भारी बारिश के दौरान किसी भी प्रकार का उर्वरक या कीटनाशक छिड़काव रोक दें।
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यात्रा संबंधी सावधानी: पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा पर जाने से पहले ट्रैफिक पुलिस और मौसम विभाग के लाइव अपडेट्स की जांच अवश्य कर लें।