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8th Pay Commission News: 8वें वेतन आयोग से ठीक पहले केंद्रीय कर्मचारियों को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा! CGHS को लेकर जारी हुआ नया OM, खत्म हुई 5 KM की पाबंदी

देशभर के करीब 49 लाख से अधिक कार्यरत केंद्रीय कर्मचारियों और लाखों पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) की तैयारियों और सिफारिशों की गहमागहमी के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा ऐतिहासिक और राहत भरा फैसला लिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) के तहत आने वाले ईएचएस (EHS) सेक्शन ने सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) के नियमों में व्यापक संशोधन करते हुए एक नया आधिकारिक कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum – OM) जारी किया है।

इस नए आदेश के जरिए सरकार ने सीजीएचएस वेलनेस सेंटरों के आसपास लागू पुराने और जटिल '5 किलोमीटर की भौगोलिक सीमा' (5 KM Geographical Restriction) की अनिवार्य शर्त को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। दिल्ली, लखनऊ, मुंबई, पटना, जयपुर, कोलकाता, बेंगलुरु और चंडीगढ़ जैसे महानगरों से लेकर दूर-दराज के कस्बों और गैर-सीजीएचएस क्षेत्रों में तैनात लाखों केंद्रीय कर्मचारियों को अब देश के शीर्ष सूचीबद्ध (Empanelled) निजी और सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों में कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा।

खत्म हुई 5 किलोमीटर की बाध्यता: पहले क्या थी परेशानी?

वर्ष 2018 में लागू किए गए पुराने नियमों के तहत केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सीजीएचएस की सुविधा काफी हद तक उनके निवास या तैनाती स्थल के भौगोलिक दायरे तक सीमित थी:

  • पुरानी व्यवस्था: यदि कोई कर्मचारी किसी सक्रिय सीजीएचएस वेलनेस सेंटर के 5 किलोमीटर के दायरे में रहता या तैनात होता था, केवल तभी उसे सीजीएचएस लाभार्थी कार्ड जारी किया जाता था।

  • सीएस (एमए) रूल्स 1944 की मजबूरी: जो कर्मचारी 5 किलोमीटर की इस परिधि से बाहर या ऐसे छोटे शहरों में तैनात थे जहां कोई वेलनेस सेंटर नहीं था, उन्हें सेंट्रल सर्विसेज (मेडिकल अटेंडेंस) रूल्स, यानी CS(MA) Rules 1944 के तहत रखा जाता था।

  • इलाज और बिल क्लीयरेंस का झंझट: सीएस(एमए) नियमों के तहत कर्मचारियों को निजी या रेफरल अस्पतालों में इलाज कराने के लिए पहले अपनी जेब से भारी रकम चुकानी पड़ती थी और बाद में महीनों तक विभागीय दफ्तरों में बिल रिइम्बर्समेंट के लिए चक्कर काटने पड़ते थे। आपातकालीन परिस्थितियों में कैशलेस इलाज की सुविधा न मिलने से कर्मचारियों और उनके परिवारों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता था।

कर्मचारियों को मिला 'वन-टाइम ऑप्शन' (One-Time Option)

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा कार्यालय ज्ञापन (OM No. Z. 16025/227/2026/CGHS-III/EHS) के मुताबिक, सरकार ने अब दूरी से जुड़े इस पुराने पैमाने को तत्काल प्रभाव से समाप्त (Dispensed) कर दिया है।

जो सेवारत केंद्रीय कर्मचारी वर्तमान में सीजीएचएस कवर्ड एरिया से बाहर रहने या काम करने के कारण CS(MA) Rules 1944 के तहत आते हैं, उन्हें अब एक 'वन-टाइम ऑप्शन' (एकमुश्त विकल्प) दिया गया है। इस विकल्प के तहत कर्मचारी अपनी इच्छा से सीजीएचएस योजना का चयन कर सकते हैं और अपना व अपने पूरे परिवार का आधिकारिक सीजीएचएस प्लास्टिक कार्ड या डिजिटल आभा (ABHA) लिंक्ड कार्ड बनवा सकते हैं।

नए आदेश की प्रमुख शर्तें और दिशानिर्देश

स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस वन-टाइम ऑप्शन का लाभ उठाने के लिए कुछ स्पष्ट और कड़े नियम निर्धारित किए हैं, जिनका पालन करना हर कर्मचारी के लिए अनिवार्य होगा:

  • एक बार में ही अंतिम फैसला (Final & Binding): सीजीएचएस चुनने का यह अवसर केवल एक बार ही मिलेगा। एक बार विकल्प चुनकर फॉर्म सबमिट करने के बाद यह निर्णय अंतिम माना जाएगा और भविष्य में दोबारा इसे बदला नहीं जा सकेगा।

  • पूरे परिवार पर एक समान नियम: कर्मचारी द्वारा लिया गया निर्णय उसके पूरे परिवार और सभी पात्र आश्रितों (Dependents) पर लागू होगा। परिवार के कुछ सदस्यों को सीजीएचएस और कुछ को सीएस(एमए) में विभाजित करने की अनुमति कतई नहीं होगी।

  • मासिक सब्सक्रिप्शन अनिवार्य: जो कर्मचारी सीजीएचएस का विकल्प चुनेंगे, उनके मासिक वेतन (Pay Matrix Level) के आधार पर निर्धारित सीजीएचएस कंट्रीब्यूशन का नियमित रूप से कटना अनिवार्य होगा, भले ही उनकी पोस्टिंग या निवास किसी भी राज्य या जिले में हो।

  • दोहरा लाभ लेने पर सख्त पाबंदी: कोई भी कर्मचारी या उसका परिजन एक साथ दोनों योजनाओं—CGHS और CS(MA)—के तहत मेडिकल क्लेम या इलाज का दावा नहीं कर सकेगा। इसके लिए कर्मचारी को एक अनिवार्य अंडरटेकिंग (शपथ-पत्र) देना होगा। किसी भी प्रकार की गलत जानकारी पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और रिकवरी की जाएगी।

  • कवर्ड एरिया वालों के लिए अनिवार्य: जो कर्मचारी पहले से ही सीजीएचएस कवर्ड क्षेत्रों (जैसे जिला मुख्यालय जहां वेलनेस सेंटर स्थित हैं) के भीतर तैनात हैं, उनके लिए सीजीएचएस में बने रहना अनिवार्य (Mandatory) रहेगा; वे योजना से बाहर (Opt-out) नहीं हो सकते।

8वें वेतन आयोग से पहले कर्मचारियों को क्यों मिली बड़ी राहत?

आगामी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के 1 जनवरी 2026 की संदर्भ तिथि से लागू होने की प्रक्रिया और कर्मचारी संगठनों द्वारा रखी जा रही मांगों के बीच इस फैसले को केंद्रीय कर्मियों के जीवन स्तर और सामाजिक सुरक्षा को बेहतर बनाने वाला ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। अब देश के किसी भी सुदूर कोने, पूर्वोत्तर राज्यों या ग्रामीण सीमाओं पर तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), रक्षा असैन्य कर्मचारी, रेलवे, डाक विभाग और विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के कार्मिक अपने गृह नगर या देश भर के किसी भी सीजीएचएस नेटवर्क अस्पताल में गंभीर बीमारियों का उच्चस्तरीय और कैशलेस इलाज करा सकेंगे।

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