व्यापार

गर्मी का काल बनेगा यह नीला ड्रम मात्र चंद रुपयों में घर को बना देगा शिमला, बिजली बिल की टेंशन भी खत्म

News India Live, Digital Desk: उत्तर भारत समेत पूरे देश में भीषण गर्मी ने दस्तक दे दी है। जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, लोगों के घरों में एसी और कूलर दिन-रात चलने लगे हैं। लेकिन महीने के अंत में आने वाला भारी-भरकम बिजली का बिल आम आदमी की जेब ढीली कर देता है। ऐसे में सोशल मीडिया पर एक ‘देसी जुगाड़’ जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें एक नीले प्लास्टिक के ड्रम को शानदार कूलर में तब्दील कर दिया गया है। यह न केवल किफायती है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) भी है।कबाड़ से जुगाड़: नीले ड्रम ने किया कमालअक्सर हम घरों या कारखानों में पड़े नीले रंग के प्लास्टिक ड्रमों को बेकार समझकर छोड़ देते हैं। लेकिन एक इनोवेटिव आइडिया ने इसे कूलिंग मशीन बना दिया है। इस देसी कूलर को बनाने के लिए ड्रम के बीच में एक बड़ा छेद करके पंखा (Exhaust Fan) लगाया जाता है और किनारे पर घास या हनीकॉम्ब पैड्स के लिए जगह बनाई जाती है। इसमें एक छोटी वॉटर पंप मोटर का इस्तेमाल होता है, जो घास को गीला रखती है और आपको ठंडी हवा मिलती है।बिजली बिल में होगी भारी बचतएक सामान्य एयर कंडीशनर (AC) चलाने पर महीने में हजारों रुपये का बिजली बिल आता है। वहीं, यह ड्रम कूलर बहुत ही कम वाट की मोटर और पंखे पर चलता है। चूंकि इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री बेहद सस्ती और सुलभ है, इसलिए इसे बनाने का खर्च भी बाजार में मिलने वाले ब्रांडेड कूलर की तुलना में आधा होता है। यह उन लोगों के लिए एक वरदान है जो कम बजट में शानदार कूलिंग चाहते हैं।पर्यावरण के लिए भी है वरदानइस कूलर को ‘इको-फ्रेंडली’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसमें प्लास्टिक ड्रम को रीसायकल किया जाता है। साथ ही, यह एसी की तरह जहरीली गैसें उत्सर्जित नहीं करता। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि आप इसे अपनी जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज कर सकते हैं। बड़े ड्रम का उपयोग करके आप इसे बड़े हॉल या दुकान के लिए भी तैयार कर सकते हैं।कैसे बनाएं घर पर यह स्मार्ट कूलर?इसे बनाने के लिए आपको एक 200 लीटर का प्लास्टिक ड्रम, एक एग्जॉस्ट फैन, एक सबमर्सिबल पंप, और कुछ कूलिंग पैड्स की जरूरत होगी। ड्रम के तीन तरफ खिड़कियां काटें और वहां जाली के साथ घास लगाएं। ऊपर की तरफ से पानी की पाइपलाइन बिछाएं जो पैड्स को गीला रखे। यह सेटअप न केवल ठंडी हवा फेंकता है, बल्कि पानी के वाष्पीकरण (Evaporation) के कारण आसपास के तापमान को भी तेजी से कम कर देता है।

Back to top button