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अब फ्री टीवी का खेल होगा खत्म FAST ऐप्स पर कड़ा रुख अपनाएगा TRAI, क्या अब पैसे देकर देखने होंगे पसंदीदा शो?

News India Live, Digital Desk: अगर आप भी अपने स्मार्ट टीवी या स्मार्टफोन पर ‘फास्ट’ (FAST – Free Ad-supported Streaming TV) ऐप्स के जरिए बिना किसी सब्सक्रिप्शन के फिल्में और टीवी शो देखने के शौकीन हैं, तो यह खबर आपको झटका दे सकती है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) अब इन फ्री स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर नकेल कसने की तैयारी में है। ट्राई का मानना है कि ये ऐप्स मौजूदा नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और पारंपरिक केबल व डीटीएच (DTH) ऑपरेटर्स के लिए असमान प्रतिस्पर्धा पैदा कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इन फ्री सेवाओं के लिए नए और सख्त नियम लागू हो सकते हैं, जिससे आपके मनोरंजन का तरीका बदल जाएगा।क्या हैं ये ‘FAST’ ऐप्स और क्यों बढ़ी इनकी लोकप्रियता?हाल के वर्षों में सैमसंग टीवी प्लस (Samsung TV Plus), एलजी चैनल्स (LG Channels) और शाओमी टीवी जैसे प्लेटफॉर्म्स ने भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। इन्हें ‘फास्ट’ ऐप्स कहा जाता है, जहाँ दर्शक बिना कोई मासिक शुल्क दिए विज्ञापन (Ads) के साथ लाइव टीवी और फिल्में देख सकते हैं। केबल और महंगे ओटीटी सब्सक्रिप्शन से बचने के लिए करोड़ों भारतीय इन फ्री सेवाओं की ओर शिफ्ट हुए हैं। लेकिन अब ट्राई की नजर इन पर टेढ़ी हो गई है।ट्राई (TRAI) की आपत्ति: क्या है असली विवाद?ट्राई का मुख्य तर्क यह है कि ये स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स असल में ब्रॉडकास्टिंग सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन वे उन नियमों और लाइसेंसिंग शर्तों का पालन नहीं कर रहे हैं जो केबल टीवी या डीटीएच कंपनियों पर लागू होते हैं।लाइसेंस फीस का मुद्दा: केबल ऑपरेटर्स को सरकार को भारी लाइसेंस फीस और कर देना पड़ता है, जबकि ये ऐप्स इंटरनेट के जरिए फ्री में कंटेंट दिखाकर इस खर्च से बच जाते हैं।कंटेंट रेगुलेशन: टीवी पर दिखाए जाने वाले प्रोग्राम्स के लिए कड़े मानक हैं, लेकिन इन ऐप्स पर चल रहे कंटेंट की निगरानी को लेकर अभी भी धुंधली स्थिति बनी हुई है।असमान मुकाबला: ट्राई का मानना है कि इससे पारंपरिक टीवी इंडस्ट्री को भारी नुकसान हो रहा है और मार्केट में ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ यानी सबको समान अवसर नहीं मिल रहा है।क्या अब महंगे हो जाएंगे आपके पसंदीदा फ्री चैनल्स?विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्राई इन ऐप्स के लिए रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग अनिवार्य कर देता है, तो कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।सब्सक्रिप्शन मॉडल: मुमकिन है कि ये ऐप्स पूरी तरह फ्री रहने के बजाय ‘फ्रीमियम’ मॉडल अपना लें, जहाँ कुछ चैनल्स के लिए आपको पैसे देने पड़ें।विज्ञापनों की भरमार: लागत निकालने के लिए कंपनियां प्रोग्राम्स के बीच में विज्ञापनों की संख्या बढ़ा सकती हैं, जिससे आपका देखने का अनुभव प्रभावित होगा।कंटेंट में कटौती: लाइसेंसिंग नियमों के पेच में फंसकर कई छोटे और अंतरराष्ट्रीय चैनल्स इन प्लेटफॉर्म्स से गायब भी हो सकते हैं।टेक और ब्रॉडकास्टिंग जगत में मची हलचलट्राई के इस संभावित कदम ने टेक कंपनियों और ब्रॉडकास्टर्स के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। जहाँ एक तरफ डिजिटल इंडिया और इंटरनेट की आजादी की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ रेगुलेशन का डंडा चलाने की तैयारी है। ओटीटी और स्ट्रीमिंग जगत के जानकारों का कहना है कि इंटरनेट पर आधारित सेवाओं को पारंपरिक टीवी के चश्मे से देखना गलत होगा। फिलहाल ट्राई इस पर स्टेकहोल्डर्स (Stakeholders) से राय ले रहा है और जल्द ही नई गाइडलाइंस जारी की जा सकती हैं। अगर आप भी स्मार्ट टीवी यूजर हैं, तो अपने ‘फ्री टीवी’ का आनंद तब तक ले लीजिए जब तक नए नियम लागू नहीं होते।

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