RBI Neutral Stance: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया ईरान युद्ध से भारत की चुनौती बढ़ी

News India Live, Digital Desk : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नवनियुक्त गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने आज, 8 अप्रैल 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्वैमासिक नीति का एलान कर दिया है। वैश्विक अनिश्चितताओं, विशेषकर पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष को देखते हुए RBI ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत (Unchanged) रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही बैंक ने अपना रुख (Stance) ‘न्यूट्रल’ बरकरार रखा है। गवर्नर मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि हालांकि दो सप्ताह के युद्धविराम से बाजार को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अब भी बड़ा जोखिम है।महंगाई और विकास दर पर ‘युद्ध’ का सायागवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण सप्लाई चेन बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गई थीं। इसके प्रभाव को देखते हुए:GDP ग्रोथ: RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत लगाया है। गवर्नर के अनुसार, युद्ध के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट से इस रफ्तार में थोड़ी कमी आ सकती है।महंगाई (Inflation): वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत रखा गया है। गवर्नर ने चेतावनी दी कि यदि कच्चे तेल की कीमतें $85/बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो भारत का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ सकती है।रुपया और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षायुद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया था। गवर्नर ने बताया कि RBI बाजार में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप कर रहा है ताकि रुपये की अस्थिरता को रोका जा सके।विदेशी मुद्रा भंडार: 3 अप्रैल तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $697.1 बिलियन दर्ज किया गया है। हालांकि यह फरवरी के रिकॉर्ड स्तर ($728.49 बिलियन) से कम है, लेकिन गवर्नर ने भरोसा दिलाया कि भारत के पास किसी भी बाहरी झटके (External Shock) को झेलने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है।युद्धविराम से मिली अस्थायी राहतगवर्नर ने स्वीकार किया कि हालिया दो सप्ताह के युद्धविराम और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की खबरों से वैश्विक तेल की कीमतों में 13-14% की गिरावट आई है, जिससे रुपये को संभलने में मदद मिली है। हालांकि, उन्होंने सतर्क किया कि यह संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। यदि युद्ध दोबारा भड़कता है या हॉर्मुज पर ‘टोल टैक्स’ जैसे प्रस्ताव लागू होते हैं, तो RBI को अपनी नीति में कड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।MSMEs के लिए बड़ी घोषणाएंइज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए गवर्नर ने घोषणा की कि अब TReDS प्लेटफॉर्म पर MSMEs को शामिल करते समय ‘ड्यू डिलिजेंस’ की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। इसके अलावा, मनी मार्केट में गैर-बैंक संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी नए नियम प्रस्तावित किए गए हैं। कुल मिलाकर, RBI की यह पॉलिसी ‘सतर्कता और स्थिरता’ का मिश्रण है, जहाँ नजरें पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर टिकी हैं।