Voter ID New Rules : अब चेहरे से होगी वोटर की पहचान, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा जवाब

News India Live, Digital Desk : भारत की चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस याचिका में मांग की गई है कि फर्जी मतदान रोकने और चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए मतदाताओं की पहचान ‘बायोमेट्रिक’ और ‘फेशियल रिकग्निशन’ (चेहरे की पहचान) तकनीक के जरिए की जाए। यदि यह नियम लागू होता है, तो भविष्य में वोट डालने के लिए केवल पहचान पत्र दिखाना काफी नहीं होगा।सुप्रीम कोर्ट में याचिका: फर्जी वोटिंग पर लगाम लगाने की तैयारीउच्चतम न्यायालय में दायर इस याचिका में दलील दी गई है कि मौजूदा व्यवस्था में कई खामियां हैं, जिनका फायदा उठाकर फर्जी वोट डाले जाते हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि आधार कार्ड की तरह ही मतदाताओं का बायोमेट्रिक डेटा (फिंगरप्रिंट) और फेशियल डेटा चुनाव आयोग के पास होना चाहिए। मतदान केंद्र पर वोट डालने से पहले मतदाता के चेहरे का मिलान सिस्टम में मौजूद डेटा से किया जाना चाहिए। इससे ‘वन मैन, वन वोट’ के सिद्धांत को सख्ती से लागू किया जा सकेगा।क्या है बायोमेट्रिक और फेशियल रिकग्निशन तकनीक?फेशियल रिकग्निशन एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जिसमें कैमरे की मदद से व्यक्ति के चेहरे के फीचर्स को स्कैन किया जाता है। बायोमेट्रिक में उंगलियों के निशान या आंखों की पुतली (Iris scan) का इस्तेमाल होता है। चुनाव आयोग से मांग की गई है कि वह हर पोलिंग बूथ पर ऐसे उपकरण लगाए जिससे मतदाता की पहचान तुरंत और सटीक तरीके से हो सके। इससे न केवल बोगस वोटिंग खत्म होगी, बल्कि पहचान पत्र के गलत इस्तेमाल पर भी पूरी तरह रोक लग जाएगी।चुनाव आयोग और सरकार का रुखसुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब चुनाव आयोग और सरकार को अपनी राय देनी होगी। इससे पहले भी चुनाव आयोग ने मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने की दिशा में कदम उठाए हैं, लेकिन बायोमेट्रिक और चेहरा पहचानने वाली तकनीक को अनिवार्य करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। इसमें निजता के अधिकार (Right to Privacy) और करोड़ों मतदाताओं के डेटा की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे भी शामिल हैं।डिजिटल चुनाव की ओर भारत के कदमअगर सरकार और चुनाव आयोग इस प्रस्ताव पर सहमत होते हैं, तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जहां चुनाव में इतनी एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है। इससे चुनाव के परिणामों में विश्वसनीयता बढ़ेगी और मतदान केंद्रों पर होने वाली धांधली की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में इस तकनीक को लागू करना और तकनीकी साक्षरता सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए एक बड़ा काम होगा।