पुतिन का साथ, अमेरिका पर वार ईरान ने ठुकराईं ट्रंप की अत्यधिक शर्तें, खाड़ी में युद्ध विराम की उम्मीदें धुंधली

News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच ठप पड़ी कूटनीति के बीच एक बड़ी हलचल हुई है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची (Abbas Araghchi) ने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की है। इस बैठक में पुतिन ने ईरान को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए शांति बहाली में हर संभव मदद का भरोसा दिया है। अरागची ने वार्ता विफल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अत्यधिक मांगों’ को जिम्मेदार ठहराया है।ट्रंप की ‘कठोर शर्तें’ और वार्ता में गतिरोध इस्लामाबाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही शांति वार्ता में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। अरागची ने साफ किया कि अमेरिका की ओर से रखी गई शर्तें जैसे यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह बंद करना और भंडार सौंपना ईरान के लिए स्वीकार्य नहीं हैं। अरागची के अनुसार, “अमेरिका की गलत सोच और नाजायज मांगों के कारण ही अच्छी प्रगति के बावजूद बातचीत पटरी से उतर गई।” इधर, ट्रंप ने अपने दूतों का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया और कहा कि यदि ईरान बात करना चाहता है, तो वह सीधे फोन करे।पुतिन का समर्थन और रणनीतिक गठजोड़ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अरागची से मुलाकात के दौरान कहा कि मॉस्को क्षेत्र में शांति के लिए वह सब कुछ करेगा जो ईरान के हितों में हो। पुतिन ने उम्मीद जताई कि ईरानी लोग इस ‘कठिन दौर’ से सफलतापूर्वक बाहर निकलेंगे। दोनों देशों ने अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने का संकल्प लिया है, जो पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच एक नए वैश्विक ध्रुव की ओर इशारा करता है।होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान का ‘हथियार’ ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसमें परमाणु मुद्दे को बाद के लिए टालकर पहले समुद्री नाकेबंदी हटाने और युद्ध खत्म करने की बात कही गई है। हालांकि, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज पर नियंत्रण उनकी ‘निश्चित रणनीति’ है। वे प्रत्येक गुजरने वाले टैंकर पर 20 लाख डॉलर का टोल वसूलने की योजना पर भी विचार कर रहे हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया है।एशियाई देशों का रुख और तेल संकट अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए ‘ऊर्जा आपातकाल’ के बीच कई एशियाई देश अब रूसी तेल और ईंधन की ओर रुख कर रहे हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का ढांचा बदल रहा है और रूस का प्रभाव क्षेत्र बढ़ता जा रहा है। ट्रंप प्रशासन फिलहाल समुद्री नाकेबंदी के जरिए ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान इसे ‘समुद्री डकैती’ करार दे रहा है।