धर्म

Mysterious Temple: रूह कांप जाएगी यहाँ का मंजर देखकर मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के वो रहस्य, जहाँ विज्ञान भी टेक देता है घुटने

News India Live, Digital Desk: भारत चमत्कारों और रहस्यों की भूमि है, और जब बात आस्था की हो, तो राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी का नाम सबसे ऊपर आता है। दो पहाड़ियों के बीच स्थित इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहाँ आज भी हनुमान जी साक्षात विराजमान हैं और ‘प्रेतराज सरकार’ की अदालत लगती है। यह दुनिया का शायद इकलौता ऐसा मंदिर है जहाँ हनुमान जी को लड्डू-पेड़े का भोग ही नहीं, बल्कि बुरी शक्तियों से मुक्ति पाने के लिए विशेष अर्जी लगाई जाती है।मंदिर के 3 बड़े रहस्य: जो आज भी हैं अनसुलझेहनुमान जी की मूर्ति का उद्भव: मंदिर में लगी बालाजी की प्रतिमा किसी कलाकार ने नहीं बनाई है, बल्कि यह अरावली की पहाड़ियों में स्वयं प्रकट हुई थी। मूर्ति के बाईं ओर एक छोटा छेद है जिससे निरंतर जल की एक धारा बहती रहती है, जिसे ‘बालाजी का पसीना’ कहा जाता है।प्रेतराज सरकार की अदालत: मंदिर के एक हिस्से में प्रेतराज सरकार और भैरव बाबा की मूर्तियां हैं। यहाँ आने वाले लोगों को अक्सर चीखते-चिल्लाते या अजीब हरकतें करते देखा जा सकता है। भक्त मानते हैं कि यहाँ की हवा में ही वह शक्ति है जो शरीर से नकारात्मक ऊर्जा को खींच लेती है।विज्ञान के लिए पहेली: कई शोधकर्ताओं ने यहाँ होने वाली ‘भूत-प्रेत मुक्ति’ की घटनाओं पर रिसर्च की, लेकिन किसी के पास इसका वैज्ञानिक स्पष्टीकरण नहीं है कि कैसे लोग यहाँ आकर पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।दर्शन के वो 5 नियम, जिनका पालन है अनिवार्यमेहंदीपुर बालाजी जाने वाले भक्तों के लिए कुछ कड़े नियम बनाए गए हैं, जिन्हें न मानने पर ‘दोष’ लगने की आशंका रहती है:पीछे मुड़कर न देखना: मंदिर से बाहर निकलते समय भक्त को कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। मान्यता है कि पीछे मुड़ने से नकारात्मक शक्तियां आपके साथ वापस घर जा सकती हैं।खाने-पीने का नियम: मंदिर परिसर या मेहंदीपुर की सीमा के भीतर से कोई भी खाने-पीने की वस्तु या सुगंधित चीज वापस घर नहीं लाई जाती। यहाँ तक कि बचा हुआ पानी भी वहीं छोड़ना पड़ता है।दरखास्त और अर्जी: यहाँ ‘दरखास्त’ और ‘अर्जी’ लगाने का विशेष महत्व है। इसके लिए आपको मंदिर की दुकान से विशेष लड्डू और बताशे खरीदने होते हैं, जिन्हें दो बार (सुबह और शाम) बालाजी को अर्पित किया जाता है।लहसुन-प्याज से परहेज: दर्शन के लिए जाने से कम से कम एक सप्ताह पहले और बाद तक मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन पूरी तरह वर्जित है।समान वितरण: यहाँ मिलने वाला प्रसाद खुद नहीं खाया जाता, बल्कि उसे पीछे की ओर फेंक दिया जाता है या वहीं छोड़ दिया जाता है।क्या कहते हैं भक्त?श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि जो व्यक्ति दुनिया के हर कोने से हार चुका हो, वह बालाजी के दरबार से कभी खाली हाथ नहीं जाता। यहाँ का ‘पहाड़’ और ‘आरती’ देखने का अनुभव व्यक्ति के रोंगटे खड़े कर देता है, लेकिन अंत में शांति और सुरक्षा का अहसास ही मिलता है।

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