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मिडिल ईस्ट युद्ध की मार: पेट्रोल-डीजल का ब्रेक फेल, 10 दिनों में चौथी बार बढ़े दाम; एलपीजी और सीएनजी भी आम आदमी की पहुंच से दूर

मिडिल ईस्ट में गहराते युद्ध के संकट ने भारतीय बाजारों में महंगाई की चौतरफा मार शुरू कर दी है। ईंधन के मोर्चे पर आम जनता को लगातार झटके लग रहे हैं और पेट्रोल-डीजल के दामों का ब्रेक पूरी तरह फेल हो चुका है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच, पिछले 10 दिनों के भीतर आज चौथी बार पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ा इजाफा कर दिया गया है। भारत में बीते 15 मई के बाद से लगातार चौथी बार कीमतें बढ़ाई गई हैं, जिसने आम आदमी के घर का बजट बिगाड़ दिया है। ईरान युद्ध और वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों के चलते भारत की दिग्गज तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसी घाटे की भरपाई के लिए कंपनियों ने एक बार फिर कीमतों में बड़ा बदलाव किया है। आज यानी 25 मई को पेट्रोल के दामों में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 2.71 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस नए झटके के बाद महज पिछले 10 दिनों के भीतर ही पेट्रोल कुल 7.40 रुपये प्रति लीटर और डीजल 7.52 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है। जानिए मई महीने में कब-कब लगी पेट्रोल और डीजल को आग अगर पिछले दो हफ्तों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो तेल कंपनियों ने रुक-रुक कर उपभोक्ताओं की जेब पर बड़ा वार किया है: 15 मई: ईंधन की कीमतों में संशोधन शुरू होते ही पहली बार में पेट्रोल और डीजल दोनों पर सीधे 3 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई थी। 19 मई: इसके ठीक चार दिन बाद पेट्रोल की कीमतों में 90 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ। 23 मई: तेल कंपनियों ने एक बार फिर आम जनता को झटका देते हुए पेट्रोल के रेट 87 पैसे और डीजल के दाम 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ा दिए। 25 मई: आज यानी सोमवार को सबसे बड़ा झटका लगा, जब पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा होकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य पर पाबंदी से एलपीजी संकट, कमर्शियल सिलेंडर 3000 के पार ईंधन के साथ-साथ रसोई गैस के मोर्चे पर भी हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। खाड़ी देशों में छिड़े युद्ध और व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते यानी 'स्ट्रीट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) पर लगी पाबंदियों के कारण भारत में एलपीजी (LPG) की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरतों का लगभग 90 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात यानी इंपोर्ट करता है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही रुकने से भारत में एलपीजी की भारी किल्लत हो गई है और लागत में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से हाल के दिनों में एलपीजी सिलेंडर के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बार 1 मई 2026 को अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी की गई थी, जब एक झटके में इसके दाम 993 रुपये बढ़ा दिए गए थे। इस भारी बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर 3,000 रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है। वहीं, घरेलू उपभोक्ताओं की बात करें तो 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में आखिरी बार 6 मार्च 2026 को 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल 913 रुपये पर स्थिर बनी हुई है। इस साल लगातार बढ़ी कमर्शियल गैस की कीमतें पिछले तीन महीनों में कमर्शियल इस्तेमाल वाले गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार तेजी देखी गई है, जिसने रेस्टोरेंट, कैफे और छोटे दुकानदारों की कमर तोड़ दी है: 1 मार्च: महीने की शुरुआत में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में प्रति सिलेंडर 28 से 31 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई थी। 1 अप्रैल: नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में सीधे 195.50 रुपये का बड़ा इजाफा किया गया। 1 मई: अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते कंपनियों ने एकमुश्त 993 से 994 रुपये तक की ऐतिहासिक बढ़ोतरी कर दी, जिससे व्यापार जगत में हड़कंप मच गया। सीएनजी भी नहीं रही सस्ती, दिल्ली-नोएडा में बढ़े दाम सिर्फ पेट्रोल, डीजल या एलपीजी ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल मानी जाने वाली सीएनजी (CNG) गैस भी अब आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है। अकेले मई के महीने में तेल कंपनियों ने तीन बार सीएनजी के दाम बढ़ाए हैं। सबसे पहले 15 मई को सीएनजी की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई थी। इसके ठीक दो दिन बाद यानी 17 मई को दाम फिर से 1 रुपये बढ़ा दिए गए। राहत की उम्मीद लगाए बैठे उपभोक्ताओं को 23 मई को तीसरा झटका लगा, जब कंपनियों ने दोबारा सीएनजी पर 1 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी। इस तरह एक ही महीने के भीतर तीन बार सीएनजी के दाम बढ़ने के बाद अब देश की राजधानी दिल्ली में सीएनजी की कीमत बढ़कर 81.09 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में सीएनजी के दाम 89.70 रुपये प्रति किलो पर पहुंच चुके हैं। जानकारों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और भी ज्यादा उछाल देखने को मिल सकता है।

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