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बिना बिजली के पानी को बना देगा बर्फ जैसा ठंडा! सऊदी के वैज्ञानिकों ने खोजी कमाल की तकनीक

दुनिया भर में आज भी करीब 70 करोड़ से ज्यादा लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं, जहां बिजली की कोई भरोसेमंद सुविधा मौजूद नहीं है. ऐसे में भीषण गर्मी से निपटना और खाने-पीने की चीजों को खराब होने से बचाना एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है. इसी गंभीर समस्या का एक बेहद अनोखा और परफेक्ट समाधान सऊदी अरब के वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला है. उन्होंने एक ऐसी नई कूलिंग तकनीक विकसित की है, जिसे काम करने के लिए बिजली की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है. यह पूरा सिस्टम सिर्फ नमक, पानी और सूरज की रोशनी के दम पर काम करता है. सिर्फ 20 मिनट में फ्रिज जैसी ठंडक इस स्वदेशी और अनोखी तकनीक को सऊदी अरब की किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (KAUST) के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है, जिसे 'NESCOD' (No Electricity and Sustainable Cooling on Demand) नाम दिया गया है. लैब में जब इसका टेस्ट किया गया, तो इसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले थे. इस सिस्टम ने 25 डिग्री सेल्सियस वाले सामान्य मिश्रण के तापमान को महज 20 मिनट के भीतर गिराकर 3.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा दिया. इतना ही नहीं, यह कड़क ठंडक अगले 15 घंटों से ज्यादा समय तक 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे बनी रही, जो किसी भी सामान्य रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) की कूलिंग के बराबर मानी जाती है. इस पूरे प्रोजेक्ट को प्रोफेसर पेंग वांग के नेतृत्व में शोधकर्ता वेनबिन वांग ने अंजाम दिया है. नमक और पानी का वैज्ञानिक जादू अब आप सोच रहे होंगे कि बिना बिजली के सिर्फ नमक और पानी से इतनी ठंडक कैसे आ सकती है? विज्ञान की भाषा में इस जादुई प्रक्रिया को “एंडोथर्मिक डिसॉल्यूशन” कहा जाता है. आसान शब्दों में समझें तो जब कुछ खास तरह के नमक को पानी में घोला जाता है, तो वे घुलने के लिए अपने आसपास के वातावरण की पूरी गर्मी को सोख लेते हैं. जैसे ही आसपास की गर्मी खिंचती है, वहां का तापमान तेजी से गिरने लगता है और कड़ाके की ठंडक पैदा होती है. वैज्ञानिकों ने इस प्रयोग के लिए कई तरह के नमकों को आजमाया, लेकिन अमोनियम नाइट्रेट इसमें सबसे दमदार साबित हुआ. इसकी कूलिंग कैपेसिटी सामान्य अमोनियम क्लोराइड से चार गुना ज्यादा देखी गई, क्योंकि यह पानी में बहुत तेजी से और बहुत ज्यादा मात्रा में घुल जाता है, जिससे कूलिंग का असर भी कई गुना बढ़ जाता है. खाना और दवाइयां रखना होगा आसान इस तकनीक का सीधा फायदा उन इलाकों को मिलेगा जहां बिजली कटौती की भारी समस्या है. परीक्षण के दौरान जब नमक के इस घोल को एक खास इंसुलेटेड बॉक्स के अंदर मेटल कप में रखा गया, तो उसने बॉक्स के भीतर के तापमान को लंबे समय तक ठंडा बनाए रखा. इससे साफ संकेत मिलते हैं कि इस तकनीक की मदद से दूरदराज के गांवों और कस्बों में बिजली के बिना भी खाने-पीने के सामान, फल-सब्जियों और लाइफ-सेविंग वैक्सीन को लंबे समय तक सुरक्षित स्टोर किया जा सकेगा. धूप से खुद रिचार्ज हो जाता है यह 'फ्रिज' अक्सर केमिकल से चलने वाले कूलिंग सिस्टम एक बार इस्तेमाल होने के बाद बेकार हो जाते हैं, लेकिन NESCOD के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं है. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बार-बार रीसायकल किया जा सकता है. जब इस घोल का तापमान फिर से नॉर्मल हो जाता है, तो वैज्ञानिक इसे एक कप के आकार वाले 'सोलर रीजनरेटर' में रख देते हैं. यह डिवाइस सूरज की धूप को सोखकर घोल को गर्म करती है, जिससे पानी भाप बनकर उड़ जाता है और नमक के क्रिस्टल नीचे दोबारा बच जाते हैं. इन क्रिस्टलों को इकट्ठा करके अगली बार फिर से कूलिंग के लिए इस्तेमाल कर लिया जाता है. मजेदार बात यह है कि उड़ने वाली भाप को भी पानी में बदलकर दोबारा काम में लिया जा सकता है, जो पानी की किल्लत वाले इलाकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. भविष्य की राह और बड़ी चुनौतियां ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में जहां एयर कंडीशनर और फ्रिज बिजली की भारी खपत करते हैं, वहां यह तकनीक पर्यावरण और जेब दोनों के लिए एक बेहतरीन सस्ता विकल्प बन सकती है. हालांकि, इस कमाल की तकनीक के सामने अभी कुछ चुनौतियां भी हैं. फिलहाल यह प्रयोग सिर्फ लैब के स्तर तक ही सीमित है और बड़े पैमाने पर इसका कमर्शियल प्रोडक्शन होना अभी बाकी है. इसके अलावा, इसमें इस्तेमाल होने वाले अमोनियम नाइट्रेट पर कई देशों में सख्त नियम लागू हैं क्योंकि इसका इस्तेमाल विस्फोटक बनाने में भी होता है. वैज्ञानिकों ने अभी इसके बाजार में आने की कोई तय तारीख नहीं बताई है, इसलिए आम जनता तक इस जादुई कूलिंग सिस्टम को पहुंचने में थोड़ा समय लग सकता है.

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