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RBI ब्याज दरों में करेगा बदलाव या फिर मिलेगी राहत? समझिए ये 4 संभावित फैसले और अपनी जेब पर होने वाला सीधा असर

देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब से जुड़ी इस वक्त की सबसे बड़ी खबर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मुख्यालय से सामने आ रही है। देश के करोड़ों लोन धारकों, घर खरीदारों और निवेशकों की नजरें इस समय केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की चल रही बेहद महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी हुई हैं। इस तीन दिवसीय कूटनीतिक बैठक के नतीजों और ब्याज दरों (Repo Rate) पर अंतिम फैसले का आधिकारिक ऐलान शुक्रवार सुबह आरबीआई गवर्नर द्वारा किया जाएगा। बाजार के दिग्गज और कूटनीतिक विश्लेषक इस बात को लेकर लगातार कयास लगा रहे हैं कि इस बार आम जनता को महंगी होम और कार लोन की ईएमआई (EMI) से राहत मिलेगी या फिर इंतजार और लंबा होने वाला है। पहला संभावित फैसला: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं और स्टेटस को (Status Quo) आर्थिक विश्लेषकों और बाजार के जानकारों के मुताबिक इस बात की सबसे ज्यादा संभावना है कि रिजर्व बैंक इस बार भी ब्याज दरों में कोई बदलाव न करे और रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर ही बरकरार रखे। देश में खुदरा महंगाई दर हालांकि नियंत्रण में आती दिख रही है, लेकिन खाद्य पदार्थों (Food Inflation) की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव को देखते हुए आरबीआई कूटनीतिक रुख अपना सकता है। अगर ऐसा होता है, तो इसका सीधा मतलब यह होगा कि आपकी होम लोन या कार लोन की ईएमआई में फिलहाल कोई कमी नहीं आएगी और यह जैसी है वैसी ही चलती रहेगी। दूसरा संभावित फैसला: ब्याज दरों में कटौती (Rate Cut) की शुरुआत अगर रिजर्व बैंक देश की आर्थिक विकास दर (GDP Growth) को और तेज गति देने का फैसला करता है, तो वह चौंकाते हुए रेपो रेट में 0.25 फीसदी (25 बेसिस पॉइंट) की कटौती का ऐलान कर सकता है। इस ऐतिहासिक फैसले की उम्मीद बाजार लंबे समय से कर रहा है। अगर शुक्रवार को गवर्नर इस फैसले पर मुहर लगाते हैं, तो बैंकिंग सेक्टर में लोन सस्ते होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा। इसके बाद सभी सरकारी और प्राइवेट बैंक अपनी ब्याज दरों को घटाएंगे, जिससे आम आदमी की मासिक ईएमआई का बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा और नए घर व गाड़ी खरीदना सस्ता हो जाएगा। तीसरा संभावित फैसला: कड़ा रुख अपनाते हुए रेपो रेट में बढ़ोतरी इस फैसले की संभावना हालांकि बेहद कम है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजारों की कूटनीतिक स्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए रिजर्व बैंक महंगाई को पूरी तरह कुचलने के लिए ब्याज दरों में मामूली बढ़ोतरी का सख्त कदम भी उठा सकता है। यदि ऐसा कोई अप्रत्याशित फैसला सामने आता है, तो यह शेयर बाजार और आम जनता दोनों के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा। इसके तुरंत बाद बैंकों को अपने कर्ज महंगे करने पड़ेंगे, जिससे आपकी जेब पर ईएमआई का भारी-भरकम बोझ बढ़ जाएगा और बाजार में लिक्विडिटी (नकदी) की कमी हो सकती है। चौथा संभावित फैसला: नीतिगत रुख (Stance) में बदलाव करना आरबीआई ब्याज दरों को स्थिर रखते हुए अपने कूटनीतिक रुख यानी 'विड्रॉल ऑफ एकोमोडेशन' (Withdrawal of Accommodation) को बदलकर 'न्यूट्रल' (Neutral) कर सकता है। इसका मतलब यह होता है कि केंद्रीय बैंक भविष्य में दरों को घटाने के संकेत दे रहा है। इस फैसले का असर यह होगा कि भले ही तुरंत आपकी ईएमआई कम न हो, लेकिन आने वाले कुछ ही महीनों में लोन के सस्ते होने की पूरी गारंटी मिल जाएगी। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने वाले निवेशकों के लिए भी यह एक कूटनीतिक संकेत होगा कि वे मौजूदा समय में मिल रहे ऊंचे ब्याज का फायदा उठाने के लिए लंबी अवधि की एफडी तुरंत बुक कर लें।

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