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अंधाधुंध पैसा लगाना बंद करें, एक्सपर्ट ने बताया IPO से बंपर कमाई का सबसे सुरक्षित फॉर्मूला, 90% रिटेल निवेशक यहीं खा जाते हैं मात

अंधाधुंध पैसा लगाना बंद करें, एक्सपर्ट ने बताया IPO से बंपर कमाई का सबसे सुरक्षित फॉर्मूला, 90% रिटेल निवेशक यहीं खा जाते हैं मात

भारतीय शेयर बाजार में जब भी कोई नया आईपीओ (Initial Public Offering) दस्तक देता है, तो रिटेल निवेशकों के बीच उसे खरीदने की एक अंधी होड़ मच जाती है। हर कोई यही सोचता है कि लिस्टिंग के पहले ही दिन उनका पैसा दोगुना हो जाएगा। हाल के वर्षों में कई बेहतरीन कंपनियों ने निवेशकों की झोली भरी भी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आईपीओ मार्केट का एक ऐसा कड़वा सच भी है जो बड़ी-बड़ी कंपनियों के दावों की हवा निकाल देता है? मौजूदा दौर में निवेशक एआई (AI) बूम का फायदा उठाने के लिए एंथ्रोपिक (Anthropic), ओपनएआई (OpenAI) और एलन मस्क की स्पेसएक्स (SpaceX) जैसी ग्लोबल दिग्गज कंपनियों की भारतीय बाजारों में एंट्री का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लेकिन बिना सोचे-समझे किसी भी आईपीओ में कूदना कंगाल बना सकता है। मार्केट दिग्गजों ने अब एक ऐसा अचूक फॉर्मूला साझा किया है, जिससे आप आईपीओ में होने वाले नुकसान से हमेशा के लिए बच सकते हैं।

चौंकाने वाला खुलासा: 90% से ज्यादा आईपीओ लिस्टिंग के बाद क्यों हो जाते हैं धड़ाम?

प्रसिद्ध वित्तीय पुस्तक "The Lifecycle Trade" के लिए ईव बोबोच, कैथी डोनेली, एरिक क्रुल और कर्ट डैल द्वारा किए गए एक बेहद गहन और ऐतिहासिक शोध में एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है जो किसी भी निवेशक के होश उड़ाने के लिए काफी है। इस रिसर्च के मुताबिक, शेयर बाजार में आने वाले 90% से अधिक आईपीओ आखिरकार अपनी लिस्टिंग के पहले दिन के सबसे निचले स्तर (First-day low) को भी तोड़कर नीचे चले जाते हैं। इसका मतलब यह है कि भले ही कोई कंपनी कितनी भी मजबूत क्यों न हो, लिस्टिंग के शुरुआती उन्माद के बाद उसके शेयर में एक बड़ी गिरावट आनी लगभग तय होती है। कई बार तो इन स्टॉक्स को अपने नुकसान से उबरने और दोबारा पुराने स्तर पर लौटने में कई सालों का लंबा वक्त लग जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक आम निवेशक के लिए आईपीओ में सुरक्षित पैसा बनाने का सही रास्ता क्या है?

क्या है 'IPO बेस' (The IPO Base) का जादुई फॉर्मूला?

टैक्स और मार्केट के बड़े रणनीतिकारों का मानना है कि किसी भी नई लिस्टेड कंपनी में आंख मूंदकर तुरंत पैसा लगाने के बजाय कुछ दिनों या हफ्तों का धैर्य रखना चाहिए। निवेशकों को तब तक इंतजार करना चाहिए जब तक कि टेक्निकल चार्ट पर एक मजबूत 'IPO बेस' तैयार न हो जाए। बेहद आसान शब्दों में समझें तो 'आईपीओ बेस' शेयर बाजार का एक ऐसा ‘रेस्ट स्टॉप’ (ठहराव बिंदु) होता है, जो किसी शेयर की लिस्टिंग के शुरुआती 25 दिनों के भीतर चार्ट पर बनता है। इस समय के दौरान शेयर के अंदर की शुरुआती उठापटक, घबराहट और भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) पूरी तरह शांत हो जाते हैं और वह शेयर एक बेहद सीमित दायरे (Narrow Range) में सस्टेन करने लगता है।

इन 3 स्टेप्स से समझिए कि एक परफेक्ट 'IPO बेस' कैसे काम करता है

एक समझदार निवेशक को किसी नए शेयर में कब एंट्री लेनी चाहिए, उसे आप 'आईपीओ बेस' के इस तीन-चरणीय चक्र से आसानी से समझ सकते हैं:

  • 1. इनिशियल पीक (Initial Peak): लिस्टिंग होने के बाद शुरुआती जोश में शेयर जिस सबसे ऊपरी स्तर या हाई को छूता है, वहीं से आईपीओ बेस बनने की शुरुआत मानी जाती है।

  • 2. हल्की गिरावट (Pullback): शुरुआती शिखर छूने के बाद शेयर में प्रॉफिट बुकिंग आती है और वह थोड़ा नीचे गिरता है। आमतौर पर यह गिरावट ऊपरी स्तर से 20% तक होती है, लेकिन अगर बाजार का मूड बहुत खराब है तो यह 48% से 50% तक भी हो सकती है। इसी गिरावट के समय बड़े संस्थागत निवेशक (जैसे Mutual Funds और विदेशी FIIs) चुपके से उस शेयर को धीरे-धीरे खरीदना और जमा करना शुरू करते हैं, जिससे शेयर को नीचे गिरने से एक मजबूत सपोर्ट (Price Floor) मिल जाता है।

  • 3. बाय पॉइंट (Buy Point): जब वह शेयर नीचे से दोबारा संभलकर ऊपर की ओर रुख करता है और अपने उसी पहले वाले 'शुरुआती शिखर' (Initial Peak) को पार कर जाता है, तो उसे टेक्निकल भाषा में 'बाय पॉइंट' या 'ब्रेकआउट' कहा जाता है। यही खरीदारी का सबसे सही और सुरक्षित समय होता है।

रिटेल निवेशक कहां करते हैं सबसे बड़ी गलती?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादातर रिटेल निवेशक शेयर बाजार के पारंपरिक नियम 'कम में खरीदें और ज्यादा में बेचें' (Buy Low, Sell High) को गलत तरीके से समझ लेते हैं। वे आईपीओ लिस्टिंग के बाद लगातार गिरते हुए शेयर को औंधे मुंह नीचे आते समय ही पकड़ने की बड़ी गलती कर बैठते हैं, जो कि गिरती हुई कुल्हाड़ी को हाथ से पकड़ने जैसा बेहद आत्मघाती कदम है। इसके विपरीत, 'आईपीओ बेस' की यह अनूठी रणनीति शेयर को पहले खुद को बाजार में साबित करने का पूरा मौका देती है। जो शेयर इस कड़े इम्तिहान को पास करके अपने बेस से बाहर निकलते हैं, वे भविष्य में मल्टीबैगर और लंबी रेस के असली घोड़े साबित होते हैं। इसलिए अगली बार जब आप किसी आईपीओ या नई लिस्टेड कंपनी में दांव लगाने की सोचें, तो इस फॉर्मूले को याद रखें और अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखें।

 

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