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हाय रे किस्मत! 12वीं में आए 83% नंबर, लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए जेब में फूटी कौड़ी नहीं

हाय रे किस्मत! 12वीं में आए 83% नंबर, लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए जेब में फूटी कौड़ी नहीं

कहते हैं कि अगर हौसला हो तो इंसान विपरीत परिस्थितियों में भी कामयाबी का परचम लहरा सकता है, लेकिन कभी-कभी गरीबी और तंगहाली के चलते किस्मत ऐसा क्रूर मजाक करती है कि इंसान के सारे सपने बिखर जाते हैं। एक ऐसी ही दिल को झकझोर देने वाली दास्तान इस समय सोशल मीडिया से लेकर समाज के हर वर्ग में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक होनहार छात्र ने तमाम अभावों के बीच दिन-रात एक करके इंटरमीडिएट यानी 12वीं की परीक्षा में 83 प्रतिशत अंक हासिल किए। इस बड़ी सफलता के बाद जहां उसके घर में खुशियों का माहौल होना चाहिए था, वहीं आज उस घर में मायूसी का सन्नाटा पसरा हुआ है, क्योंकि आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए परिवार के पास पैसे नहीं हैं।

मेधावी छात्र के आड़े आई भयंकर आर्थिक तंगी इस मेधावी छात्र का सपना आगे चलकर उच्च शिक्षा हासिल करने और अपने परिवार को इस गरीबी के दलदल से बाहर निकालने का था। 12वीं के नतीजों में 83% जैसे शानदार अंक इस बात का सबूत हैं कि लड़के में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। वह कॉलेज जाकर अपनी मनपसंद डिग्री लेना चाहता था, लेकिन जब दाखिले की फीस और किताबों के खर्च का हिसाब सामने आया, तो उसके माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। घर की माली हालत इतनी खराब है कि दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में कॉलेज की महंगी फीस भरना इस परिवार के बूते से बाहर हो गया और छात्र का भविष्य अधर में लटक गया।

पेट पालने और कर्ज चुकाने के लिए होटल में किया काम आगे की पढ़ाई का रास्ता बंद होता देख और परिवार की लाचारी को भांपते हुए इस होनहार छात्र ने हिम्मत नहीं हारी, बल्कि अपने स्वाभिमान को ताक पर रखकर काम की तलाश शुरू कर दी। अपनी उम्र के बाकी बच्चों को कॉलेज जाते देख इस छात्र ने भारी मन से एक स्थानीय होटल में नौकरी कर ली। जहां उसे मेज साफ करने से लेकर बर्तन धोने और ग्राहकों को खाना परोसने तक का काम करना पड़ा। होटल में मिलने वाली मामूली मजदूरी से वह किसी तरह अपने परिवार का पेट पालने और घर के खर्चों में हाथ बंटाने की कोशिश कर रहा है। उसकी इस स्थिति ने समाज के उन दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है, जहां हर बच्चे को शिक्षा देने की बात कही जाती है।

क्या इस हुनर को मिलेगा कोई मददगार 83 फीसदी नंबर लाने वाले इस छात्र की कहानी जैसे ही सामने आई, लोगों की आंखें नम हो गईं। सोशल मीडिया पर लोग इस बच्चे की मदद के लिए सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) से गुहार लगा रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले जानकारों का कहना है कि अगर इस तरह की प्रतिभाएं पैसों की कमी के कारण दम तोड़ देंगी, तो यह पूरे समाज के लिए एक बड़ी हार होगी। अब देखना यह होगा कि क्या कोई सहृदय व्यक्ति या सरकारी योजना इस बच्चे की मदद के लिए आगे आती है, ताकि यह होनहार छात्र होटल की नौकरी छोड़कर एक बार फिर अपने हाथ में किताबें थाम सके और अपने सपनों को पूरा कर सके।

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