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होम और ऑटो लोन के नियमों में बड़ा बदलाव: जानिए क्या है RBI का नया ECL नियम और कम सिबिल स्कोर वालों पर इसका क्या होगा असर

होम और ऑटो लोन के नियमों में बड़ा बदलाव: जानिए क्या है RBI का नया ECL नियम और कम सिबिल स्कोर वालों पर इसका क्या होगा असर

अगर आप आने वाले समय में अपने सपनों का घर खरीदने के लिए होम लोन, नई गाड़ी के लिए ऑटो लोन या बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए एजुकेशन लोन लेने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश के बैंकिंग सेक्टर में लोन देने और उसकी सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद कड़ा और नया नियम लागू करने जा रहा है। इस नए वित्तीय ढांचे का नाम है ‘ईसीएल डायरेक्शन-2026’ (Expected Credit Loss – ECL)

यह नियम 1 अप्रैल 2027 से पूरे देश के सभी बैंकों में पूरी तरह लागू हो जाएगा। इस नियम के आते ही बैंकों द्वारा ग्राहकों की पात्रता जांचने और लोन पास करने का पूरा तरीका बदलने वाला है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह नियम क्या है और इससे आम कर्जदारों की जेब और प्रोफाइल पर क्या असर पड़ने वाला है।

क्या है RBI का नया ECL नियम और यह मौजूदा व्यवस्था से कैसे अलग है?

अगर मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था की बात करें, तो बैंक तब तक किसी लोन को सुरक्षित मानते हैं जब तक कि उसकी किस्तें आती रहती हैं। जब कोई ग्राहक लगातार 90 दिनों तक अपने लोन की किस्त (EMI) नहीं चुका पाता, तब बैंक उसे एनपीए (NPA – Non-Performing Asset) यानी डूबा हुआ कर्ज घोषित करते हैं। इसके बाद ही बैंक उस नुकसान की भरपाई के लिए अपने मुनाफे से कुछ पैसा अलग (Provisioning) रखते हैं।

लेकिन नए ईसीएल (ECL) नियम के आने के बाद बैंकों का यह ढर्रा पूरी तरह बदल जाएगा। अब बैंकों को लोन पूरी तरह डूबने या 90 दिन बीतने का इंतजार नहीं करना होगा।

? ₹42,000 करोड़ कम हो सकता है बैंकों का मुनाफा

नए नियम के तहत बैंकों को लोन देते समय ही यह अंदाजा लगाना होगा कि भविष्य में आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से कौन सा लोन डूब सकता है। जोखिम के इसी अनुमान के आधार पर बैंकों को पहले से ही अपनी जेब से एक बड़ी रकम रिजर्व में रखनी होगी। चूंकि यह पैसा बैंकों के मुख्य बिजनेस से बाहर हो जाएगा, इसलिए अनुमान है कि देश के बैंकों का कुल मुनाफा करीब 42,000 करोड़ रुपये तक घट सकता है।

किस्त लेट होने पर बैंकों पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ

नए नियम के तहत अगर कोई ग्राहक अपनी किस्त देने में महज कुछ दिन की भी देरी करता है, तो बैंकों को उस लोन के बदले बहुत बड़ी रकम अलग रखनी पड़ेगी। इसे आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:

730 से कम सिबिल (CIBIL) स्कोर वालों के लिए खड़ी होगी बड़ी चुनौती

इस नए नियम का सबसे बड़ा और सीधा असर उन लोगों पर पड़ने जा रहा है जिनका क्रेडिट स्कोर यानी सिबिल स्कोर थोड़ा कमजोर है। एक आंकड़े के मुताबिक, भारत में लोन के लिए आवेदन करने वाले करीब 62% लोगों का सिबिल स्कोर 730 से कम होता है।

नए नियम लागू होने के बाद बैंक किसी भी तरह का जोखिम लेने से बचेंगे। वे उन ग्राहकों को पहली प्राथमिकता देंगे जिनका सिबिल स्कोर 730 से ऊपर है। अगर आपका स्कोर इससे कम है, तो बैंक आपके साथ ये तीन कड़े कदम उठा सकते हैं:

  1. लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट होना: कमजोर वित्तीय प्रोफाइल या कम सिबिल स्कोर वाले लोगों के लोन आवेदन को बैंक सीधे तौर पर नामंजूर (Reject) कर सकते हैं।

  2. महंगी ब्याज दरें (High Interest Rates): अगर बैंक आपका लोन पास करने के लिए तैयार भी हो जाते हैं, तो वे अपने जोखिम की भरपाई करने के लिए आपसे बाजार दर से काफी ज्यादा ब्याज वसूलेंगे।

  3. ज्यादा गारंटी या कोलेटरल की मांग: कम सिबिल स्कोर की स्थिति में बैंक आपसे अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में कोई कीमती प्रॉपर्टी, सोना या किसी मजबूत सिबिल स्कोर वाले व्यक्ति को गारंटर बनाने की मांग कर सकते हैं।

जोखिम का अनुमान लगाने के लिए बैंक अपनाएंगे ये 6 कड़े पैमाने

लोन स्वीकृत करने से पहले बैंक अब सिर्फ आपकी मौजूदा सैलरी स्लिप या बिजनेस का टर्नओवर नहीं देखेंगे। ईसीएल (ECL) फ्रेमवर्क के तहत आपकी पूरी वित्तीय कुंडली को इन 6 कड़े मानकों पर परखा जाएगा:

  • भुगतान का पुराना रिकॉर्ड: क्या आपने अतीत में कभी कोई मोबाइल बिल, क्रेडिट कार्ड का बकाया या पुरानी ईएमआई चुकाने में देरी की है?

  • CIBIL स्कोर का उतार-चढ़ाव: पिछले कुछ महीनों या सालों में आपका सिबिल स्कोर स्थिर रहा है, बढ़ा है या फिर उसमें लगातार गिरावट आई है?

  • आय की स्थिरता: आपकी मासिक कमाई पक्की और सुरक्षित है या फिर इसमें लगातार उतार-चढ़ाव (Volatility) बना रहता है?

  • नौकरी या बिजनेस का जोखिम: आप जिस सेक्टर या कंपनी में काम कर रहे हैं, मंदी के दौर में वह कितनी सुरक्षित है? वहां छंटनी का कितना खतरा है?

  • लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो: आप जो मकान या गाड़ी खरीद रहे हैं, उसकी वास्तविक बाजार कीमत के मुकाबले आप बैंक से कितना प्रतिशत लोन मांग रहे हैं।

  • मौजूदा कर्ज का बोझ: आपकी कुल आय के मुकाबले आप पर पहले से कितने लोन की किश्तें या क्रेडिट कार्ड के बिल चल रहे हैं।

अच्छे सिबिल स्कोर वाले 7 करोड़ ग्राहकों की चमकेगी किस्मत

जहां एक तरफ कम सिबिल स्कोर वालों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी, वहीं दूसरी तरफ देश के उन 38% प्रीमियम ग्राहकों के लिए बैंकों में रेड कार्पेट बिछ जाएगा जिनका सिबिल स्कोर 730 या उससे ज्यादा है। देश में ऐसे करीब 7 करोड़ उत्कृष्ट वित्तीय रिकॉर्ड वाले ग्राहक हैं। इन लोगों को लुभाने के लिए बैंक आपस में मुकाबला करेंगे और उन्हें सबसे सस्ती ब्याज दरों और बेहद आसान शर्तों पर तुरंत लोन ऑफर करेंगे।

निष्कर्ष:

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई का यह नया ईसीएल नियम भारतीय बैंकिंग व्यवस्था को भविष्य के बड़े संकटों से बचाने और बैंकों को अंदर से मजबूत करने के लिए बहुत जरूरी कदम है। लेकिन आम ग्राहकों के लिहाज से अब बेहद सतर्क होने का समय आ गया है। अगर आप भी भविष्य में बिना किसी रुकावट के सस्ता लोन चाहते हैं, तो आज से ही अपनी किश्तों का भुगतान समय पर करें और अपने सिबिल स्कोर को बेहतर बनाए रखें।

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