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कैंसर मरीजों को लगा बड़ा झटका! अचानक 50 फीसदी तक महंगी हुईं जान बचाने वाली दवाएं

देशभर में कैंसर जैसी जानलेवा और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लाखों मरीजों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य मोर्चे से एक बेहद परेशान और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार के दवा मूल्य नियामक यानी नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइजिंग अथॉरिटी (NPPA) ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई बेहद महत्वपूर्ण और जीवन रक्षक दवाओं (Life Saving Drugs) की कीमतों में 50 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी करने का एक बड़ा और अप्रत्याशित फैसला लिया है। सरकार के इस कदम के बाद अब कैंसर का इलाज पहले के मुकाबले काफी ज्यादा खर्चीला होने जा रहा है, जिससे मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों के मासिक बजट पर बहुत भारी वित्तीय बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।

आखिर सरकार को क्यों लेना पड़ा दवाओं की कीमतें बढ़ाने का यह कड़ा फैसला

इस फैसले के सामने आने के बाद आम जनता के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर सरकार ने मरीजों को झटका देते हुए कीमतों को बढ़ाने की मंजूरी क्यों दी। दवा उद्योग के विशेषज्ञों और सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल यानी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) की लागत में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन और सप्लाई चेन के खर्च भी काफी बढ़ चुके हैं। दवा निर्माता कंपनियों का कहना था कि पुरानी नियंत्रित कीमतों पर इन दवाओं का उत्पादन करना अब उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा था, जिसके चलते बाजार में इन महत्वपूर्ण दवाओं की भारी किल्लत होने का खतरा मंडराने लगा था। इसी संभावित कमी को रोकने और दवाओं की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार को मजबूरी में यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है।

जानिए कौन-कौन सी कैंसर दवाएं अब जेब पर पड़ेंगी भारी

सरकारी अधिसूचना के अनुसार, इस मूल्य वृद्धि का सीधा असर उन प्रमुख दवाओं पर पड़ेगा जो कीमोथेरेपी और विभिन्न प्रकार के कैंसर (जैसे ब्लड कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और लंग कैंसर) के उपचार के दौरान मरीजों को नियमित रूप से दी जाती हैं। इनमें से कई दवाएं राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची (NLEM) के अंतर्गत आती हैं, जिनकी कीमतों पर सरकार का सीधा नियंत्रण होता है। नए आदेश लागू होने के बाद, जो इंजेक्शन और टैबलेट पहले हजारों रुपये में मिलते थे, उनके लिए अब मरीजों को करीब आधी कीमत और ज्यादा चुकानी होगी। अस्पताल के बिलों में होने वाली इस बढ़ोतरी ने उन परिवारों की चिंता को अत्यधिक बढ़ा दिया है जो पहले से ही इलाज के महंगे खर्चों को उठाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।

मरीजों और स्वास्थ्य संगठनों ने जताई गहरी चिंता, राहत की मांग

दवाएं महंगी होने के इस सरकारी फैसले पर देश के विभिन्न स्वास्थ्य संगठनों, कैंसर सरवाइवर्स और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कैंसर के इलाज का खर्च पहले ही बहुत ज्यादा है, और ऐसे में अचानक 50 फीसदी की बढ़ोतरी होने से कई मरीज बीच में ही अपना इलाज छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने सरकार से गुहार लगाई है कि वह कैंसर के मरीजों को इस भारी वित्तीय झटके से बचाने के लिए या तो इन दवाओं पर से पूरी तरह जीएसटी (GST) हटा दे या फिर गरीब मरीजों के लिए विशेष सब्सिडी और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के दायरे को और अधिक व्यापक बनाए, ताकि किसी भी मरीज की जान पैसों की कमी की वजह से न जाए।

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