विदेश

तुलसी गबार्ड का जाते-जाते दुनिया को हिलाने वाला सबसे बड़ा खुलासा, क्या अमेरिका 30 देशों में बना रहा

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक सुरक्षा के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस की पूर्व डायरेक्टर तुलसी गबार्ड (Tulsi Gabbard) ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में कुछ ऐसी अति-संवेदनशील फाइलों को सार्वजनिक कर दिया है, जिसने सुपरपावर अमेरिका को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इन खुफिया दस्तावेजों के अनुसार, अमेरिका दुनिया के करीब 30 अलग-अलग देशों में गुप्त बायोलॉजिकल लैबोरेट्रीज (Bio-Labs) का एक बड़ा नेटवर्क संचालित कर रहा था। इस खुलासे के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या इन लैब्स में इंसानी सभ्यता के लिए खतरनाक वायरस और जैविक हथियार (Biological Weapons) तैयार किए जा रहे थे?

तुलसी गबार्ड ने खोलीं खुफिया फाइलें, वॉशिंगटन में मचा हड़कंप हमेशा अपने बेबाक बयानों और स्वतंत्र फैसलों के लिए जानी जाने वाली तुलसी गबार्ड ने सरकारी फाइलों को उजागर कर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) और खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। लीक हुए दस्तावेजों से संकेत मिलते हैं कि इन बायोलैब्स को यूक्रेन, अफ्रीका और एशिया के कई संवेदनशील हिस्सों में स्थापित किया गया था। आधिकारिक तौर पर इन लैब्स का उद्देश्य महामारियों की रोकथाम और वैक्सीन रिसर्च बताया जाता रहा है, लेकिन गबार्ड द्वारा साझा की गई जानकारियों ने इन दावों पर गहरे सवालिया निशान लगा दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि यह सीक्रेट प्रोजेक्ट्स पूरी दुनिया को एक नए और अदृश्य खतरे में डाल रहे थे।

क्या वायरस को हथियार बनाने की चल रही थी सीक्रेट तैयारी? इस खुलासे में सबसे डरावना पहलू यह है कि इन लैब्स के जरिए 'गेन ऑफ फंक्शन' (Gain of Function) जैसे खतरनाक रिसर्च किए जा रहे थे। इस प्रक्रिया में किसी साधारण वायरस को जेनेटिकली मॉडिफाई करके उसे अधिक संक्रामक और जानलेवा बनाया जाता है। रक्षा और विज्ञान विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये वायरस प्रयोगशालाओं से लीक हो जाते, तो दुनिया को कोरोना से भी भयानक वैश्विक महामारी का सामना करना पड़ सकता था। तुलसी गबार्ड ने पहले भी इन लैब्स की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन अब फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद यह साफ हो गया है कि इसके पीछे की हकीकत बेहद गंभीर और डरावनी है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घिरेगा अमेरिका, जांच की उठने लगी मांग इस बड़े खुलासे के बाद रूस, चीन और कई अन्य देशों ने अमेरिकी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) जैसी वैश्विक संस्थाओं पर अब इस बात का भारी दबाव है कि वे इन 30 देशों में चल रही अमेरिकी लैब्स की निष्पक्ष और गहन जांच करवाएं। राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि तुलसी गबार्ड का यह कदम अमेरिकी विदेश नीति और उसकी वैश्विक साख के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिकी सरकार इन गंभीर आरोपों और लीक हुई फाइलों पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देती है।

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