US-Iran War Big Update: आज ही होगी अमेरिका-ईरान महाडील? डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, लेकिन ईरान ने खींचे हाथ

मिडिल ईस्ट (Middle East Conflict) में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर एक सनसनीखेज पोस्ट कर दावा किया है कि रविवार यानी 14 जून 2026 को ईरान के साथ युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक शांति समझौते (US-Iran Peace Deal) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। ट्रंप का दावा है कि इस डील के तुरंत बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय जहाजों और वैश्विक व्यापार के लिए फिर से खोल दिया जाएगा। हालांकि, दूसरी तरफ ईरान ने इस टाइमलाइन पर आपत्ति जताते हुए अभी सावधानी बरतने को कहा है।
ओबामा की जेसीपीओए (JCPOA) डील पर ट्रंप का तीखा हमला
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्तावित समझौते की तुलना पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में 2015 में हुए परमाणु समझौते (JCPOA) से की है। ओबामा नीति पर सीधा हमला बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि बराक हुसैन ओबामा की ईरान नीति ने तेहरान के लिए परमाणु हथियार हासिल करने का रास्ता बहुत आसान और सुगम बना दिया था। अगर वह डील लागू रहती, तो ईरान के पास छह साल पहले ही परमाणु बम होता और वह अब तक उसका इस्तेमाल भी कर चुका होता। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि उनकी नई डील इसके बिल्कुल उलट है और इसमें इस बात की पक्की लिखित गारंटी है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा। ट्रंप के मुताबिक, ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह निष्क्रिय किया जा चुका है।
बी-2 बॉम्बर्स (B-2 Bombers) से नष्ट होगी परमाणु सामग्री
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में बेहद आक्रामक और रणनीतिक योजना का खुलासा करते हुए कहा कि जब क्षेत्र में पूरी तरह शांति बहाल हो जाएगी, तो अमेरिका अपने अत्याधुनिक और घातक बी-2 बॉम्बर्स (B-2 Stealth Bombers) और जांबाज पायलटों की मदद से ईरान के अंदर दाखिल होगा। पहाड़ों के नीचे गहराई में छिपाकर रखी गई सभी परमाणु सामग्री और न्यूक्लियर कचरे (Nuclear Dust) को बाहर निकाला जाएगा। इसके बाद उस सामग्री को डाउनब्लेंड कर ईरान या खुद अमेरिका में ले जाकर पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। इस बीच, मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी उम्मीद जताई थी कि अगले 24 घंटों में इस शांति समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
ईरान ने ट्रंप के दावे को नकारा, बताया 'प्रोपेगैंडा इवेंट'
एक तरफ जहां अमेरिकी खेमे में इस डील को लेकर भारी उत्साह है, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने रविवार को ही डील साइन होने के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी मीडिया और वार्ताकारों का कहना है कि 14 जून को डील साइन कराने की ट्रंप की यह जिद उनके अपने जन्मदिन (Donald Trump Birthday) के आसपास एक बड़ा राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश है। ईरान ने इसे पूरी तरह एक ‘प्रोपेगैंडा इवेंट’ और ‘सिम्बोलिक स्टंट’ करार दिया है, जिसे ट्रंप अपने यूएफसी (UFC) व्हाइट हाउस इवेंट के साथ जोड़कर भुनाना चाहते हैं। ईरानी डिप्लोमैट्स ने साफ कर दिया है कि मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का मसौदा अभी पूरी तरह फाइनल नहीं हुआ है, इसलिए आज किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे।
वर्चुअल मीटिंग में 60 दिनों के सीजफायर पर बन सकती है बात
राजनयिक सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता के सहयोग से अमेरिका और ईरान के बीच एक वर्चुअल मीटिंग होने की संभावना बनी हुई है, जिसमें इस मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर करने की योजना है। इस प्रस्तावित समझौते के तहत दोनों देशों के बीच जारी मौजूदा सीजफायर (Ceasefire) को अगले 60 दिनों के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। साथ ही, होर्मुज स्ट्रेट को व्यापार के लिए बहाल करने और ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर नए सिरे से तकनीकी बातचीत शुरू करने का खाका तैयार किया जा रहा है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मिडिल ईस्ट में शांति का यह प्रयास क्या मोड़ लेता है।