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US-Iran Peace Deal: आज खत्म हो सकता है अमेरिका-ईरान युद्ध! डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के बड़े दावे से दुनिया भर में मची हलचल

US-Iran Peace Deal: पिछले कई महीनों से मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी भीषण सैन्य तनाव, खून-खराबे और युद्ध जैसी स्थितियों को पूरी तरह खत्म करने के लिए आज यानी रविवार, 14 जून का दिन वैश्विक इतिहास के पन्नों में बेहद अहम साबित होने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तानी अधिकारियों के बयानों को सच मानें, तो अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त करने के लिए आज ही एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर अंतिम मुहर लग सकती है।

इस महाडील को धरातल पर लाने के लिए पिछले 3 महीनों से बैकचैनल डिप्लोमेसी चल रही थी, जिसमें पाकिस्तान, कतर, मिस्र और तुर्की जैसे देश लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहे थे। हालांकि, ईरान ने इस टाइमलाइन और शर्तों को लेकर थोड़ा सतर्क और संभलकर चलने वाला रुख जरूर अपनाया है, लेकिन दुनिया भर के बाजारों, रक्षा विशेषज्ञों और आम जनता की नजरें इस समय पूरी तरह से इस संभावित समझौते पर टिकी हुई हैं।

क्या है इस शांति समझौते का ब्लूप्रिंट? (Key Features of the Deal)

इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच एक 'मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (MoU) पर वर्चुअल तरीके से हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इस पूरी डील के मुख्य पहलुओं को आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:

राष्ट्रपति ट्रंप का दावा- 'साइन होते ही खुल जाएगा रास्ता'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस डील की सफलता को लेकर बेहद उत्साहित और आश्वस्त नजर आ रहे हैं। उन्होंने हमेशा की तरह अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' का सहारा लेते हुए इस समझौते के बारे में दुनिया को जानकारी दी।

 डोनाल्ड ट्रंप की 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट:

"इस शांति समझौते पर रविवार को ही हस्ताक्षर होना पूरी तरह तय है। जैसे ही दोनों पक्ष इस पर साइन करेंगे, वैसे ही बंद पड़ा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) तुरंत और पूरी तरह से सबके लिए खोल दिया जाएगा। मौजूदा समय में अमेरिका और ईरान के बीच के संबंध देश के पिछले राष्ट्रपतियों के कार्यकाल की तुलना में कहीं ज्यादा बेहतर, व्यावहारिक और अलग स्तर पर हैं।"

वर्चुअल मीटिंग और डिजिटल सिग्नेचर के जरिए होगी महाडील

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इस संवेदनशील माहौल को देखते हुए अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि किसी भी जगह पर सीधे आमने-सामने बैठने के बजाय मध्यस्थ देशों (पाकिस्तान और कतर) के साथ एक हाई-लेवल वर्चुअल मीटिंग में शामिल होंगे। इसी ऑनलाइन बैठक के दौरान एमओयू पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से दस्तखत किए जाएंगे।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अगले 24 घंटों के भीतर इस डील की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया जाएगा, जिसके ठीक बाद अगले सप्ताह से दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत का अगला दौर शुरू होगा। इसके साथ ही ब्रिटिश और फ्रांसीसी नौसेनाएं भी इस रूट पर एक्टिव होंगी, जो समुद्र में बिछाई गई खतरनाक बारूदी माइंस को हटाने का काम करेंगी ताकि मर्चेंट जहाजों का आना-जाना पूरी तरह सुरक्षित हो सके।

न्यूक्लियर के मुद्दे पर अभी भी बना हुआ है सस्पेंस

भले ही युद्ध रोकने को लेकर दोनों देश सहमत दिख रहे हों, लेकिन ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) का बड़ा स्टॉक अभी भी इस पूरी डील का सबसे पेचीदा और संवेदनशील हिस्सा बना हुआ है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल यह समझौता सिर्फ मौजूदा युद्ध को थामने और सीजफायर की अवधि बढ़ाने तक ही सीमित है, इस स्तर पर किसी भी तरह के न्यूक्लियर मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं की जा रही है।

दूसरी तरफ, राष्ट्रपति ट्रंप का रुख इस पर काफी आक्रामक है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में साफ कहा है कि जैसे ही स्थिति पूरी तरह शांत होगी, हम सबसे पहले उस न्यूक्लियर डस्ट को नष्ट करने का काम करेंगे, चाहे वह ईरान में हो या अमेरिका में। उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि इस शांति समझौते को लागू करने में ईरान की तरफ से कोई भी देरी या आनाकानी की गई, तो अमेरिका के लिए सैन्य विकल्प (Military Options) हमेशा खुले हुए हैं।

भारत समेत पूरी दुनिया पर क्या होगा इस डील का असर?

  1. कच्चे तेल की कीमतों में आएगी बड़ी गिरावट: पूरी दुनिया के कुल कच्चे तेल और नेचुरल गैस के व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा अकेले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है। इस रास्ते के दोबारा सुरक्षित रूप से खुलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से नीचे गिरेंगी, जिससे भारत जैसे विकासशील देशों को घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दामों में और बढ़ती महंगाई से एक बहुत बड़ी राहत मिल सकती है।

  2. वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती: पिछले कई हफ्तों से चल रहे इस तनाव के कारण वैश्विक शेयर बाजारों और व्यापार में जो मंदी और अनिश्चितता छाई हुई थी, वह दूर होगी।

  3. G7 समिट में बनेगी आगे की रणनीति: राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह आगामी G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मिस्र, कतर और यूएई के शीर्ष नेताओं के साथ बैठकर इस सीजफायर को एक स्थायी शांति समझौते में बदलने और युद्ध के बाद मिडिल ईस्ट की सुरक्षा व्यवस्था को बहाल करने पर एक बड़ी चर्चा की रूपरेखा तैयार करेंगे।

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