पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारत-पाकिस्तान के बीच बड़ा खेल: भारत में तेल ₹7.50 महंगा तो पाकिस्तान में लगातार 5 बार घटे दाम

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक कूटनीति के बीच इन दिनों भारत और पड़ोसी देश पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर एक बेहद दिलचस्प और विरोधाभासी खेल देखने को मिल रहा है। भारत के आम उपभोक्ताओं को जहां मई महीने में चुनाव खत्म होने के ठीक बाद लगातार चार बार पेट्रोल और डीजल की बेतहाशा महंगाई का बड़ा झटका लगा, वहीं दूसरी तरफ आर्थिक संकट से जूझ रहे पड़ोसी देश पाकिस्तान में मई और जून के महीनों में लगातार पांचवीं बार ईंधन की कीमतों में बड़ी कटौती की गई है। इस विरोधाभास ने आम जनता के साथ-साथ आर्थिक विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। लाइव हिन्दुस्तान के विशेष बिजनेस डेस्क प्रभारी डॉ. दृगराज मदेशिया की इस एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड स्पेशल इकोनॉमिक ग्राउंड रिपोर्ट में समझिए दोनों देशों के फ्यूल मार्केट का पूरा इनसाइड गणित।
कीमतों में कटौती के बाद भी पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की मार, भारतीय करेंसी के मुकाबले अब भी है बहुत महंगा
भले ही पाकिस्तान सरकार अपनी जनता को लगातार पांच बार ईंधन की कीमतों में राहत देने का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी वहां तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। वर्तमान में पाकिस्तान में पेट्रोल वहां की स्थानीय करेंसी के हिसाब से 377.78 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल 378.78 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर बिक रहा है। अगर हम इस कीमत की तुलना भारतीय रुपये (INR) से करें, तो यह भारत के करीब 129 से 130 रुपये प्रति लीटर के बराबर बैठती है। इसके मुकाबले भारत की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में पेट्रोल वर्तमान में करीब 102 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95 रुपये प्रति लीटर के आसपास बना हुआ है, जिससे साफ है कि पाकिस्तान में तेल अब भी भारत से काफी ज्यादा महंगा है।
ईरान युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में उथल-पुथल ने कैसे बदला दोनों देशों के तेल का गणित
इस बड़े अंतर और विरोधाभास के पीछे की असली वजह पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ईरान युद्ध (Iran War) है। 28 फरवरी 2026 को ईरान संकट गहराने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें अचानक उछलकर 126 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थीं। उस दौरान जब पूरी दुनिया सहित पाकिस्तान में तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ रही थीं, तब भारत में आम चुनाव (Elections) होने की वजह से घरेलू तेल कंपनियों ने कीमतों को पूरी तरह स्थिर रखा था। भारत में चुनाव खत्म होते ही तेल कंपनियों ने कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों के घाटे को पाटने के लिए मई में पेट्रोल की कीमतों में 7.5% और डीजल में करीब 8.5% की तगड़ी बढ़ोतरी कर दी, जिससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को रोजाना होने वाले 1000 करोड़ रुपये के भारी नुकसान की भरपाई की जा सके।
पाकिस्तान में क्यों घट रहे हैं दाम और भारत में क्यों बढ़े, समझिए वैश्विक बाजार की ये इनसाइड स्टोरी
इसके बिल्कुल उलट, पाकिस्तान में जैसे ही ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़े थे, वहां की सरकार ने तुरंत घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ा दी थीं, जिससे एक समय पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें करीब 60% तक महंगी हो गई थीं। अब चूंकि पिछले कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सुधरकर 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे (लगभग 84 डॉलर के आसपास) आ चुका है, इसलिए पाकिस्तान सरकार बढ़ी हुई कीमतों को धीरे-धीरे कम कर रही है और जनता को लगातार 5वीं बार कटौती का फायदा मिला है। वहीं भारत में चूंकि युद्ध के शुरुआती दौर की महंगाई का बोझ तेल कंपनियों ने खुद उठाया था, इसलिए वे अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दाम घटने के बावजूद भारत में कीमतों को स्थिर रखकर अपने पुराने नुकसान की भरपाई करने में जुटी हैं।
हालिया राहत के बावजूद पाकिस्तानी जनता त्रस्त, अब भी ईंधन संकट के बोझ तले दबा है पड़ोसी देश
पाकिस्तान सरकार द्वारा लगातार पांच बार तेल सस्ता किए जाने के बावजूद वहां की महंगाई की मार कम नहीं हुई है। ईरान संकट शुरू होने से पहले के मुकाबले आज भी पाकिस्तान में पेट्रोल 46.3% और हाई-स्पीड डीजल 38.1% के बेहद महंगे स्तर पर बना हुआ है। इस कड़वे आंकड़े से स्पष्ट हो जाता है कि हालिया कूटनीतिक और आर्थिक राहत के दावों के बाद भी पाकिस्तान के आम नागरिकों की जेब पर ईंधन की महंगाई का बहुत बड़ा बोझ लगातार बना हुआ है, जबकि भारत अपनी रणनीतिक तेल खरीद नीतियों के कारण इस वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भी काफी हद तक संभला हुआ है।