मायावती का बड़ा दांव, अमरोहा की हसनपुर सीट से बसपा ने घोषित किया पहला उम्मीदवार, हाजी मुमताज अली पर खेला भरोसा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'सोशल इंजीनियरिंग' की माहिर खिलाड़ी मानी जाने वाली बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने मिशन 2027 का शंखनाद कर दिया है। चुनावों में अभी काफी समय शेष है, लेकिन बसपा सुप्रीमो ने अपनी सक्रियता और चुनावी तैयारियों से विपक्षियों को पीछे छोड़ते हुए पश्चिमी यूपी की महत्वपूर्ण हसनपुर विधानसभा सीट (अमरोहा) से अपने पहले प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर दिया है। बसपा ने अनुभवी नेता हाजी मुमताज अली पर भरोसा जताते हुए उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है। इस घोषणा के साथ ही यह साफ हो गया है कि मायावती इस बार टिकटों के बंटवारे में 'पहले आओ, पहले पाओ' और स्थानीय जनाधार को प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम कर रही हैं।
हाजी मुमताज अली ही क्यों? बसपा प्रमुख की रणनीति के पीछे के मुख्य कारण अमरोहा जिले की हसनपुर सीट से हाजी मुमताज अली को प्रत्याशी बनाने के पीछे मायावती की गहरी चुनावी गणित छिपी है। मुमताज अली की स्थानीय क्षेत्र में मजबूत पकड़ और मुस्लिम समुदाय के बीच उनकी गहरी पैठ को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बसपा इस बार फिर से अपने पुराने और सफल 'दलित-मुस्लिम' गठजोड़ को पुनर्जीवित करने की कोशिश में है। हसनपुर सीट पर इन दोनों समुदायों की बड़ी आबादी निर्णायक भूमिका निभाती है। ऐसे में हाजी मुमताज अली के चेहरे के जरिए बसपा न केवल समाजवादी पार्टी के वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है, बल्कि एक मजबूत और स्थानीय विकल्प पेश कर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की तैयारी में है।
अमरोहा का सियासी मिजाज और हसनपुर सीट का भौगोलिक महत्व पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रवेश द्वार माना जाने वाला अमरोहा जिला हमेशा से हाई-प्रोफाइल चुनावी जंग का गवाह रहा है। हसनपुर विधानसभा क्षेत्र की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि यहाँ ग्रामीण और अर्ध-शहरी दोनों मतदाताओं का मिला-जुला असर रहता है। पिछले कुछ चुनावों में यहाँ भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला देखा गया था, लेकिन बसपा द्वारा समय से पहले प्रत्याशी घोषित करने से अब समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। हाजी मुमताज अली के नाम की घोषणा ने स्थानीय कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर दी है। माना जा रहा है कि मायावती की इस जल्दबाजी वाली रणनीति का उद्देश्य चुनाव प्रचार के लिए उम्मीदवार को पर्याप्त समय देना और क्षेत्र के हर बूथ पर पकड़ मजबूत करना है।
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए बसपा का बदला हुआ मास्टरप्लान बसपा प्रमुख मायावती इस बार अपनी पुरानी गलतियों से सबक लेते हुए जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में जुटी हैं। हसनपुर से पहले प्रत्याशी की घोषणा इसी बड़े प्लान का हिस्सा है। आने वाले दिनों में मायावती अन्य चुनौतीपूर्ण सीटों पर भी जल्द ही उम्मीदवारों की सूची जारी कर सकती हैं। पार्टी का फोकस इस बार उन सीटों पर अधिक है जहाँ त्रिकोणीय संघर्ष में बसपा को बढ़त मिलने की संभावना है। हाजी मुमताज अली के जरिए मायावती ने साफ संदेश दिया है कि वह उत्तर प्रदेश की सत्ता की दौड़ में पूरी ताकत के साथ वापस लौट रही हैं और उनकी नजरें अब केवल अपने कैडर वोट के साथ-साथ अल्पसंख्यक मतदाताओं के भरोसे पर टिकी हैं।