देश

WB Corruption Row: चुनाव हारते ही झुका ‘पुष्पा’ स्टाइल नेता; नेपाल भागते समय जहांगीर खान गिरफ्तार, बिस्तर और साड़ियों के नीचे छिप रहे टीएमसी नेता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने के बाद से ही राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई स्थानीय और कद्दावर नेताओं के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। राज्य भर से टीएमसी नेताओं की भारी फजीहत, जनता के हिंसक आक्रोश और पुलिसिया कार्रवाई की चौंकाने वाली खबरें लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं।

इसी कड़ी में सबसे बड़ी कार्रवाई दक्षिण 24 परगना के फालता विधानसभा क्षेत्र में अपना तगड़ा सियासी दबदबा रखने वाले कद्दावर टीएमसी नेता जहांगीर खान (Jahangir Khan) पर हुई है, जिन्हें पुलिस ने धर दबोचा है। कभी मंचों से दहाड़ने वाले जहांगीर खान अब पुलिस की कस्टडी में हैं।

खुद को कहते थे 'पुष्पा', पर चुनाव से पहले ही छोड़ दिया था मैदान

जहांगीर खान अपनी दबंगई और फिल्मी स्टाइल के लिए बंगाल की राजनीति में काफी चर्चित रहे हैं। साल 2026 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर ने खुद को सुपरहिट दक्षिण भारतीय फिल्म 'पुष्पा' के नायक अल्लू अर्जुन की तरह पेश किया था। उन्होंने जनसभाओं में कई बार कॉलर उठाकर मशहूर डायलॉग "पुष्पा… झुकेगा नहीं साला" बोलते हुए जनता को यह दिखाने की कोशिश की थी कि वे एक बेहद मजबूत और अजेय नेता हैं, जो किसी भी जांच या प्रशासनिक दबाव के आगे कभी घुटने नहीं टेकेंगे।

दबंगई की हवा कैसे निकली?

  • 48 घंटे पहले भागे: फालता सीट पर चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर हुई कथित धांधली और गड़बड़ियों के कारण चुनाव आयोग ने वहां 21 मई 2026 को दोबारा वोटिंग (पुनर्मतदान) कराने का आदेश दिया था। लेकिन हमेशा 'न झुकने' का दावा करने वाले जहांगीर खान ने इस पुनर्मतदान से ठीक 48 घंटे पहले ही राजनीतिक मैदान छोड़ दिया और अंडरग्राउंड हो गए।

  • हार और अदालत का दरवाजा: 24 मई 2026 को जब चुनाव के अंतिम नतीजे घोषित हुए, तो जहांगीर खान को करारी हार का सामना करना पड़ा। अपनी हार और पुलिसिया शिकंजे को भांपते हुए उन्होंने तुरंत कलकत्ता उच्च न्यायालय (High Court) में कई आपराधिक मामलों को लेकर अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अर्जी लगाई थी।

नेपाल भागते समय STF ने दबोचा: जहांगीर खान की किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। कोर्ट से राहत मिलने से पहले ही 8 जून 2026 को पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक गुप्त ऑपरेशन में उन्हें भारत-नेपाल सीमा के पास से उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वे अवैध रूप से नेपाल भागने की फिराक में थे। फालता थाने में उनके खिलाफ हत्या का प्रयास, रंगदारी और जबरन वसूली समेत 7 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

जनता के गुस्से का शिकार हो रहे अन्य नेता: कोई गाड़ी पर अंडे खा रहा, तो कोई बिस्तर के नीचे छिपा

पश्चिम बंगाल में इस समय भ्रष्टाचार और 'कट मनी' (Cut Money) को लेकर आम जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। जहांगीर खान के अलावा राज्य के कई अन्य रसूखदार नेताओं को भी सरेआम बेइज्जती और जनता के कोपभाजन का शिकार होना पड़ रहा है:

  1. अंडों से हुआ स्वागत: 7 जून 2026 को पुलिस गिरफ्त में आए टीएमसी पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को जब सुरक्षा घेरे में कोर्ट ले जाया जा रहा था, तब कोर्ट परिसर के बाहर मौजूद भारी उग्र भीड़ ने उनकी गाड़ी पर सरेआम अंडे और टमाटर फेंके।

  2. जूतों की माला और सिर मुंडवाया: औद्योगिक शहर हावड़ा (Howrah) से एक बेहद विचलित करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें स्थानीय गरीब जनता से सरकारी आवास योजना के नाम पर अवैध कमीशन (कट मनी) वसूलने के आरोपी एक स्थानीय नेता को महिलाओं ने पहले जमकर पीटा, फिर उसका सिर मुंडवाकर और जूतों की माला पहनाकर पूरे इलाके में सरेआम घुमाया।

  3. साड़ियों के ढेर और बिस्तर के नीचे छिपे नेता: पुलिस के छापों और जनता की मॉब लिंचिंग के डर से नेताओं के छिपने के अजीबो-गरीब तरीके सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक टीएमसी नेता पुलिस रेड से बचने के लिए घर के भीतर साड़ियों के बड़े ढेर के नीचे छुपा मिला। वहीं, 4 जून 2026 को कूचबिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना में भारी कमीशनखोरी के आरोपी टीएमसी नेता शाहिदुल मियां के घर जब सैकड़ों ग्रामीणों ने धावा बोल दिया, तो शाहिदुल अपनी जान बचाने के लिए अपने ही बेडरूम में बिस्तर (पलंग) के नीचे जाकर छिप गए थे, जिन्हें बाद में पुलिस ने भारी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल कर थाने पहुंचाया।

क्या है यह 'कट मनी' का जिन्न, जो 2019 से टीएमसी का पीछा नहीं छोड़ रहा?

पश्चिम बंगाल की जमीनी राजनीति को समझने वाले जानते हैं कि 'कट मनी' (अवैध कमीशन) वहां की प्रशासनिक व्यवस्था का एक कैंसर बन चुका है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि केंद्र या राज्य सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं (जैसे पक्का मकान, शौचालय, या राशन) का लाभ यदि किसी आम गरीब नागरिक को चाहिए, तो उसे स्थानीय दलालों और सत्ताधारी दल के नेताओं को एक निश्चित अवैध कमीशन देना पड़ता है, जिसे स्थानीय भाषा में 'कट मनी' कहते हैं।

  • दीदी का वो बयान जो बना हथियार: इस विवाद की आधिकारिक शुरुआत 18 जून 2019 को हुई थी, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद कोलकाता में पार्टी पार्षदों की एक आंतरिक बैठक में मंच से डांटते हुए कहा था कि, "जिन्होंने भी गरीब जनता से सरकारी योजनाओं के एवज में कट मनी ली है, वे तुरंत उनका पैसा वापस कर दें।"

  • विपक्ष का सबसे बड़ा चुनावी हथियार: मुख्यमंत्री के इसी बयान को मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लपक लिया और इसे साल 2019, 2021, 2024 और अब 2026 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी के खिलाफ सबसे बड़ा और मारक चुनावी मुद्दा बनाया।

डर के मारे खुद पैसे लौटा रहे हैं स्थानीय नेता

जनता के बढ़ते आक्रोश और अदालती हंटर के डर से अब बंगाल के गांवों में एक नया नजारा देखने को मिल रहा है—नेता खुद पीड़ितों के घर जाकर हाथ जोड़कर अवैध वसूली का पैसा लौटा रहे हैं।

भाजपा आईटी सेल के राष्ट्रीय प्रमुख अमित मालवीय ने भी दक्षिण 24 परगना के नामखाना इलाके का एक वीडियो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया है। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे डरे हुए स्थानीय नेता प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कुल 45 गरीब लाभार्थियों से वसूली गई 5-5 हजार रुपये की कमीशन राशि को सरेआम भरी पंचायत में गिनकर वापस कर रहे हैं।

Back to top button