उत्तर प्रदेश

Ayodhya Ram Mandir: दान-पात्रों से कथित गबन की जांच के लिए राम जन्मभूमि पहुंची SIT; 8 घंटे चली मैराथन तफ्तीश, 43 लोगों से पूछताछ

उत्तर प्रदेश के अयोध्या (Ayodhya) में स्थित भव्य भगवान श्री रामलला मंदिर में चढ़ावे और दान राशि की कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) एक्शन मोड में आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों पर गठित तीन सदस्यीय एसआईटी की टीम सोमवार (15 जून 2026) को जांच के सिलसिले में सीधे राम जन्मभूमि परिसर पहुंची।

एसआईटी की यह टीम आज यानी 16 जून 2026 को भी मंदिर के दान-पात्रों से जुड़े कथित गबन के मामले की गहन जांच जारी रखेगी। सोमवार को एसआईटी के अधिकारी गेट नंबर 11 के माध्यम से परिसर के भीतर दाखिल हुए और देर रात 11:00 बजे तक (लगभग आठ घंटे) मैराथन तफ्तीश की। इसके बाद जांच समिति रात भर अयोध्या के सरयू अतिथि गृह (Saryu Guest House) में ही रुकी। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने उत्तर प्रदेश की सियासत से लेकर सोशल मीडिया तक भारी हलचल पैदा कर दी है।

सीएम योगी के आदेश पर बनी 3 सदस्यीय हाई-लेवल SIT; छवि धूमिल करने का आरोप

राम मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिखित अनुरोध और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद इस विशेष जांच दल का गठन शनिवार को किया गया था। ट्रस्ट का कहना है कि भ्रामक सूचनाओं को रोकने, सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर विराम लगाने और सच्चाई को देश के सामने लाने के लिए यह निष्पक्ष जांच बेहद आवश्यक थी। ट्रस्ट ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक और राजनीतिक तत्वों द्वारा वैश्विक स्तर पर राम मंदिर की पावन छवि को धूमिल करने के सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं।

इस हाई-लेवल एसआईटी (SIT) में उत्तर प्रदेश शासन के तीन शीर्ष और ईमानदार अधिकारियों को शामिल किया गया है:

  1. विजय विश्वास पंत: लखनऊ मंडल के मंडलायुक्त (Comissioner)

  2. किरण एस: पुलिस महानिरीक्षक (IG)

  3. नील रतन: वित्त विभाग के विशेष सचिव (Special Secretary, Finance)

8 घंटे की मैराथन जांच: 43 लोगों से कड़े सवाल-जवाब, खंगाले गए CCTV

सोमवार को राम जन्मभूमि परिसर के भीतर हुई आठ घंटे की लंबी जांच के दौरान कई कड़े और बड़े प्रशासनिक कदम उठाए गए:

  • पदाधिकारियों और बैंक कर्मियों से पूछताछ: एसआईटी ने अलग-अलग चरणों और कई दौर की पूछताछ में कुल 43 लोगों के बयान दर्ज किए। इनमें ट्रस्ट के उन पदाधिकारियों के अलावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के वे कर्मचारी भी शामिल थे, जो नियमित रूप से दान-पात्रों की नकदी की गिनती (Cash Counting) की प्रक्रिया में शामिल रहते हैं।

  • प्रमुख पदाधिकारियों की मौजूदगी: जांच के समय मौके पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, विशेष रूप से आमंत्रित सदस्य गोपाल राव और पदेन सदस्य के रूप में अयोध्या के जिलाधिकारी (DM) खुद मौजूद रहे।

  • भौतिक सत्यापन और डिजिटल फॉरेंसिक: परिसर में रखे गए सभी प्रमुख और विशाल दान-पात्रों की भौतिक (Physical) रूप से बारीकी से जांच की गई। इसके अलावा, पिछले कई हफ्तों के CCTV फुटेज, ऑडिट लॉग्स और बैंकों में जमा की गई दान राशि के रसीद दस्तावेजों का मिलान (सत्यापन) किया गया।

  • अधिकारियों को आधी रात बुलावा: देर रात मामले की गंभीरता को देखते हुए राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी (SHO) और अयोध्या के सर्कल ऑफिसर (CO) को भी परिसर के भीतर तलब किया गया। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभी तक किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है और न ही जेल भेजा गया है, क्योंकि राम मंदिर ट्रस्ट ने अभी तक कोई औपचारिक आपराधिक शिकायत पत्र (FIR) नहीं सौंपा है।

"भविष्य में सुधार और आपराधिक दोनों पहलुओं पर होगी निष्पक्ष जांच" — नृपेंद्र मिश्र

निर्माण समिति के अध्यक्ष का बयान: राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में साफ किया कि एसआईटी जांच में किसी भी प्रकार की ढील या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, "इस जांच के दो मुख्य पहलू हैं—पहला आपराधिक (यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी सजा) और दूसरा भविष्य में सुधार से संबंधित (तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करना)। जब इन दोनों पहलुओं पर पारदर्शी काम होगा, तभी हम देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत कर पाएंगे।"

भक्तों के दान पर बोलते हुए नृपेंद्र मिश्र ने सनातन धर्म की महत्ता का जिक्र किया और कहा, "हमारे सनातन धर्म में कहा गया है कि दान करो और उसे भूल जाओ। श्रद्धालु भगवान के प्रति अटूट समर्पण भाव से आते हैं और स्वेच्छा से दान करते हैं, इसका कोई वस्तु-विनिमय नहीं होता।" उन्होंने उन अफवाहों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि इस जांच के लिए दिल्ली (केंद्र सरकार) से किसी वरिष्ठ अधिकारी को बुलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह राज्य सरकार और जिला प्रशासन का विषय है और वे ही इस 'नैया को पार लगाएंगे'।

विपक्षी दल हुए हमलावर; कांग्रेस ने लगाया 'नरक' का बैनर

यह पूरा विवाद बीते 7 जून को तब भड़का था जब समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक गंभीर राजनीतिक आरोप लगाया था कि राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में प्राप्त करोड़ो रुपये के गायब होने की चिंताजनक रिपोर्टें सामने आ रही हैं, जिसके बाद उन्होंने अदालत से इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया था। तब ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा था कि आंतरिक ऑडिट (Internal Audit) जारी है और प्रारंभिक तौर पर गबन के कोई तथ्य सामने नहीं आए हैं।

अब इस मामले में उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस भी पूरी तरह हमलावर हो गई है। युवा कांग्रेस के प्रदेश पदाधिकारी शरद शुक्ला ने अयोध्या की सड़कों पर एक बेहद आक्रामक और विवादित बैनर लगाया है। इस बैनर में स्कंद पुराण के एक श्लोक का उल्लेख करते हुए लिखा गया है कि— "जो भी राम मंदिर की संपत्ति या धन की चोरी करने का प्रयास करेगा, उसे 60,000 वर्षों तक कीड़े के रूप में नरक में सड़ना पड़ेगा, भगवान रामलला स्वयं इसका न्याय करेंगे।" बहरहाल, एसआईटी अपनी विस्तृत और गोपनीय जांच रिपोर्ट जल्द ही मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को सौंपने वाली है, जिसके बाद ही असली दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो सकेगा।

Back to top button