Sachin vs Vaibhav: सचिन तेंदुलकर से तुलना पर भड़के कृष्णमाचारी श्रीकांत, कहा- ‘उन्हें भगवान का बेटा रहने दें, तुलना बंद करें’

भारतीय क्रिकेट के नए उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी इन दिनों सुर्खियां बटोर रहे हैं। महज 15 साल की उम्र में भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने की दहलीज पर खड़े इस युवा खिलाड़ी को लेकर क्रिकेट फैंस और एक्सपर्ट्स के बीच चर्चा जोरों पर है। लोग वैभव की तुलना क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर से करने लगे हैं, क्योंकि वैभव सबसे कम उम्र में डेब्यू का सचिन का रिकॉर्ड तोड़ने के करीब हैं। हालांकि, पूर्व भारतीय कप्तान कृष्णमाचारी श्रीकांत ने इन तुलनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए फैन्स को एक अहम नसीहत दी है।
'सचिन की बराबरी कोई नहीं कर सकता'
पीटीआई के साथ बातचीत में कृष्णमाचारी श्रीकांत ने साफ कहा कि सचिन तेंदुलकर और वैभव सूर्यवंशी की तुलना करने का कोई मतलब नहीं है। श्रीकांत ने अपने अंदाज में कहा, "सचिन क्रिकेट के भगवान हैं, और यह लड़का वैभव सूर्यवंशी 'भगवान का बेटा' है। इन्हें अलग ही रहने दें। मैं दो अलग-अलग युगों के खिलाड़ियों की तुलना करने में विश्वास नहीं रखता। सचिन, सचिन हैं और उनके आसपास कोई नहीं पहुंच सकता।" उन्होंने लोगों से अपील की कि इस बहस को यहीं खत्म कर देना चाहिए और वैभव को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए स्वतंत्र छोड़ देना चाहिए।
वैभव सूर्यवंशी के खेल की अद्भुत क्षमता
तुलना को नकारते हुए श्रीकांत ने वैभव की तकनीक और मानसिक मजबूती की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, "वैभव का T20 और U-19 क्रिकेट में प्रदर्शन लाजवाब रहा है। उनके शॉट सिलेक्शन, कलाई की गति और बैट स्विंग की रफ्तार कमाल की है। सबसे महत्वपूर्ण बात उनका स्थिर दिमाग है। गुजरात टाइटन्स के खिलाफ दबाव में खेली गई उनकी पारी यह साबित करती है कि वे न केवल आक्रामक खेल सकते हैं, बल्कि क्रीज पर टिककर लंबी पारी भी खेल सकते हैं। उनमें रनों की भूख है और वे खेल पर हावी होना जानते हैं।"
भविष्य की राह: दबाव से बचाना जरूरी
पूर्व कप्तान ने आगे कहा कि वैभव का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन हमें उन्हें एक खास खिलाड़ी के तौर पर विकसित होने देना चाहिए। हमें उनकी तुलना किसी से करने के बजाय उनका हौसला बढ़ाना चाहिए। वैभव फिलहाल श्रीलंका दौरे पर इंडिया-ए स्क्वॉड के साथ ट्राई-नेशन सीरीज खेल रहे हैं, जहां टीम इंडिया ने फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। अब 21 जून को होने वाले फाइनल मुकाबले में वैभव का प्रदर्शन देखने लायक होगा। श्रीकांत का मानना है कि यदि हम वैभव को बिना किसी बड़े नाम के दबाव के खेलने देंगे, तो भारतीय क्रिकेट को एक बहुत बड़ा सितारा मिल सकता है।