धर्म

Sawan 2026: सावन ही क्यों है महादेव का सबसे प्रिय महीना, स्कंद पुराण में छिपा है इस ‘दिव्य’ रहस्य का जवाब

हिंदू धर्म में बारह महीनों का अपना अलग महत्व है, लेकिन 'श्रावण' या सावन का महीना भगवान शिव के भक्तों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता। हर तरफ महादेव के जयकारों और शिवालयों में उमड़ती भीड़ यह बताती है कि यह मास शिव भक्ति का सर्वोत्तम समय है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान शिव को केवल सावन ही क्यों इतना प्रिय है? क्यों चैत्र, वैशाख या आषाढ़ जैसे महीनों के बजाय महादेव की विशेष कृपा इसी महीने में बरसती है? इसका उत्तर स्वयं महादेव ने 'स्कंद पुराण' के श्रावणमास महात्मय में दिया है।

स्कंद पुराण का श्लोक और महादेव की वाणी

स्कंद पुराण में भगवान शिव ने स्वयं कहा है: "द्वादशस्वपि मासेषु श्रावणो मेऽतिवल्लभः। तत्रैव सर्वथा पूजा कार्या श्रावणमासके॥" अर्थात, बारह महीनों में श्रावण का महीना मुझे अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस महीने में मेरी पूजा अवश्य करनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, यह महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे फलदायी है, क्योंकि इस काल में महादेव सृष्टि के संचालन और कल्याण के लिए स्वयं पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं।

माता पार्वती की कठोर तपस्या से जुड़ी गाथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब सती ने अपने पिता के यज्ञ में अपमानित होकर देह त्याग किया था, तब उन्होंने प्राण लिया था कि वे महादेव को ही हर जन्म में पति के रूप में प्राप्त करेंगी। अपने अगले जन्म में माता पार्वती ने राजा हिमाचल के घर जन्म लिया और महादेव को पति रूप में पाने के लिए सावन के महीने में ही अन्न-जल त्याग कर निराहार रहकर कठोर तपस्या की थी। माता पार्वती के इस अद्वितीय प्रेम और संकल्प को देखकर महादेव ने उन्हें स्वीकार किया। माना जाता है कि तभी से सावन का महीना महादेव के लिए अत्यंत प्रिय और प्रेम का प्रतीक बन गया है।

जब धरती पर पधारते हैं महादेव

सावन के महीने में भगवान शिव अपनी ससुराल यानी पृथ्वी लोक पर पधारते हैं। कहा जाता है कि इस दौरान उनका स्वागत अर्घ्य और जलाभिषेक से किया जाता है। भक्तों का मानना है कि सावन के दौरान महादेव अपने लोक 'कैलाश' को छोड़कर भक्तों के बीच साक्षात वास करते हैं, इसीलिए इस महीने किए गए जल अभिषेक का फल करोड़ों गुना अधिक मिलता है।

मारकंडेय ऋषि और अकाल मृत्यु का विजय पर्व

सावन मास के विशेष होने के पीछे ऋषि मारकंडेय की कथा भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मारकंडेय मुनि के पुत्र मारकंडेय ने सावन के महीने में ही भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। महादेव की कृपा से उन्होंने न केवल लंबी आयु प्राप्त की, बल्कि उस 'महामृत्युंजय मंत्र' की शक्ति भी पाई, जिसके आगे साक्षात यमराज भी नतमस्तक हो गए थे। तभी से यह माना जाता है कि सावन में शिव की शरण में जाने वाले व्यक्ति पर अकाल मृत्यु का साया भी नहीं मंडराता।

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