अरूप बिश्वास ने बैंक को लिखा पत्र, तृणमूल कांग्रेस का 675 करोड़ का खाता फ्रीज करने की मांग

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर नेतृत्व और वर्चस्व को लेकर जारी अंदरूनी कलह अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। विधायकों और सांसदों की बगावत झेल रही ममता बनर्जी को अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अरूप बिश्वास ने एक निजी बैंक को पत्र लिखकर तृणमूल कांग्रेस के मुख्य बैंक खाते के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने (फ्रीज करने) का अनुरोध किया है।
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के कोषाध्यक्ष के रूप में अरूप बिश्वास ने बैंक से अपील की है कि जब तक पार्टी का आंतरिक विवाद पूरी तरह नहीं सुलझ जाता, तब तक इस खाते से किसी भी तरह की निकासी या संचालन अधिकारों में कोई बदलाव न किया जाए। इंटरनेट मीडिया पर दो पन्नों का यह पत्र तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने बंगाल की सियासत में खलबली मचा दी है।
पार्टी फंड के गलत इस्तेमाल की आशंका, बगावत के बाद छिड़ा 'असली-नकली' का विवाद
सूत्रों के अनुसार, गत 12 जून को बैंक प्रबंधन को लिखे गए इस गोपनीय पत्र में अरूप बिश्वास ने तर्क दिया है कि पार्टी के भीतर वर्तमान में विभिन्न गुट सक्रिय हैं और हर गुट खुद को वैध नेतृत्व तथा अधिकृत पदाधिकारी बता रहा है। ऐसी स्थिति में यह पूरी तरह से अस्पष्ट हो गया है कि खातों के संचालन का वास्तविक और कानूनी अधिकार किसके पास है।
उन्होंने पत्र में गहरी आशंका जताई है कि कुछ अनधिकृत लोग राजनीतिक अस्थिरता का फायदा उठाकर पार्टी फंड का दुरुपयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही, पूर्व में जारी या हस्ताक्षरित किए गए चेकों के गलत इस्तेमाल और बिना उचित उच्च अनुमति के बड़े भुगतान किए जाने का भी गंभीर अंदेशा व्यक्त किया गया है।
58 विधायकों और 20 सांसदों की बगावत के बाद खड़ी हुई वित्तीय आपातकाल जैसी स्थिति
तृणमूल कांग्रेस में यह वित्तीय संकट ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही बड़े राजनीतिक बिखराव से जूझ रही है। मालूम हो कि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल के 58 विधायकों ने एक अलग गुट बना लिया है, जिसे विधानसभा अध्यक्ष से आधिकारिक मान्यता भी मिल चुकी है और ऋतब्रत को विपक्ष का नेता चुन लिया गया है। वहीं दूसरी ओर, संसद में भी ममता बनर्जी को बड़ा झटका देते हुए 20 बागी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व से नाता तोड़कर 'नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में अपने विलय की घोषणा कर दी है।
इसी बीच बागी खेमे के कद्दावर विधायक कन्हैयालाल अग्रवाल ने अरूप बिश्वास के इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि यदि कोषाध्यक्ष को फंड की हेराफेरी का डर है, तो बैंक को पत्र लिखना उनके अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है। गौरतलब है कि 5 जून को ही तृणमूल ने संगठन में फेरबदल कर अरूप की जगह पूर्व सांसद शुभाशीष चक्रवर्ती को नया राज्य कोषाध्यक्ष बनाया था, लेकिन अरूप ने ऑल इंडिया लेवल के कोषाध्यक्ष के नाते यह पत्र लिखा है। चुनाव आयोग के दस्तावेजों के मुताबिक, सेंट्रल प्लाजा शाखा के इस सिंगल खाते में करीब 675 करोड़ रुपये जमा हैं।
लियोन मेसी प्रकरण में फंसे अरूप बिश्वास, थाने में 3 घंटे की पूछताछ के बाद कोर्ट में हुई अंडों की बौछार
वित्तीय विवादों के बीच अरूप बिश्वास की निजी मुश्किलें भी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। साल्टलेक स्टेडियम में अर्जेंटीना के महान फुटबालर लियोन मेसी के कार्यक्रम के दौरान हुई भारी अव्यवस्था और वीआईपी संस्कृति के मामले में पूर्व खेल मंत्री अरूप बिश्वास पुलिस के तीन नोटिसों के बाद आखिरकार बिधाननगर दक्षिण थाने में पेश हुए। पुलिस ने उनसे करीब साढ़े तीन घंटे तक मैराथन पूछताछ की और उन्हें आगामी 22 जून को पूरे दस्तावेजों के साथ दोबारा तलब किया है।
थाने से निकलने के बाद जब अरूप बिश्वास अलीपुर अदालत परिसर में अपने वकील के चैंबर पहुंचे, तो वहां माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। वकीलों के एक बड़े वर्ग और आम लोगों ने उनके चैंबर को घेरकर 'चोर-चोर' के नारे लगाने शुरू कर दिए। करीब तीन घंटे तक बंधक जैसे हालात में रहने के बाद जब पुलिस सुरक्षा के घेरे में वे अपनी कार की तरफ बढ़े, तो उग्र भीड़ ने उन पर अंडों की जोरदार बौछार कर दी। आरोप है कि पिछले साल 13 दिसंबर को साल्टलेक स्टेडियम में अरूप और उनके करीबियों ने मेसी को इस कदर ब्लॉक कर रखा था कि महंगे टिकट खरीदने वाले आम दर्शक अपने पसंदीदा खिलाड़ी की एक झलक भी नहीं देख पाए थे, जिसके बाद स्टेडियम में भारी तोड़फोड़ और दंगे जैसी स्थिति बन गई थी।