पैड का बेहतरीन विकल्प, लेकिन इन 5 स्थितियों में भूलकर भी न करें ‘मेंस्ट्रुअल कप’ का इस्तेमाल, डॉक्टर ने दी सख्त चेतावनी

आज के आधुनिक दौर में पीरियड्स (मासिक धर्म) के दौरान सैनिटरी पैड्स के मुकाबले मेंस्ट्रुअल कप (Menstrual Cup) का चलन महिलाओं के बीच तेजी से बढ़ रहा है। इसे लगाकर एक्सरसाइज करने, लंबी यात्रा पर जाने से लेकर स्विमिंग करने तक में महिलाएं बेहद कंफर्टेबल महसूस करती हैं। मेडिकल ग्रेड सिलिकॉन से बना यह कप पर्यावरण के लिहाज से भी पैड का एक शानदार और इको-फ्रेंडली विकल्प है, क्योंकि यह पूरी तरह रीयूजेबल होता है और एक ही कप कई सालों तक आराम से चल जाता है।
सोशल मीडिया पर मेंस्ट्रुअल कप को प्रमोट करने और इसे इस्तेमाल करने का तरीका सिखाने वाले ढेरों एजुकेशनल वीडियो मौजूद हैं। लेकिन क्या यह हर महिला के लिए सुरक्षित है? सोशल मीडिया पर 'डॉक्टर क्यूटरस' के नाम से मशहूर डॉ. तान्या नरेंद्र कहती हैं कि मेंस्ट्रुअल कप बेशक एक क्रांतिकारी प्रोडक्ट है, लेकिन कुछ खास शारीरिक स्थितियों में महिलाओं को इसके इस्तेमाल से सख्त परहेज करना चाहिए। आइए जानते हैं उन 5 परिस्थितियों के बारे में जहां मेंस्ट्रुअल कप फायदे की जगह बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।
1. सिलिकॉन एलर्जी (Silicon Allergy) होने पर
डॉ. तान्या नरेंद्र के मुताबिक, बाजार में मिलने वाले ज्यादातर अच्छे मेंस्ट्रुअल कप 'मेडिकल ग्रेड सिलिकॉन' से बने होते हैं, जो शरीर के लिए पूरी तरह सुरक्षित और टॉक्सिन-फ्री माने जाते हैं। इसके बावजूद, कुछ महिलाओं की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है और उन्हें सिलिकॉन मटेरियल से एलर्जी हो सकती है। अगर आपको सिलिकॉन एलर्जी है और आप मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल करती हैं, तो वेजाइनल एरिया (निजी अंग) में गंभीर एलर्जिक रिएक्शन, तेज खुजली, रेडनेस और सूजन की समस्या पैदा हो सकती है।
2. यदि शरीर में लगा हो आईयूडी (IUD Users)
जो महिलाएं अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए इंट्रा यूटेराइन डिवाइस (IUD) यानी कॉपर-टी जैसी टी-शेप डिवाइस का इस्तेमाल करती हैं, उन्हें मेंस्ट्रुअल कप लगाने से बचना चाहिए। दरअसल, गर्भाशय (Uterus) के भीतर लगी आईयूडी में पतली कॉन्ट्रासेप्टिव स्ट्रिंग्स (धागे) जुड़ी होती हैं, जो नीचे की तरफ रहती हैं। जब महिला मेंस्ट्रुअल कप को बाहर निकालती है, तो वैक्यूम बनने के कारण या गलती से वह स्ट्रिंग खिंच सकती है। इससे आईयूडी अपनी जगह से हिल सकती है, जिससे न सिर्फ असहनीय दर्द होगा बल्कि गर्भनिरोधक (Contraceptive) के फेल होने का खतरा भी बढ़ जाएगा।
3. हाल ही में हुई वेजाइनल सर्जरी, अबॉर्शन या डिलीवरी
यदि किसी महिला की हाल ही में कोई वेजाइनल सर्जरी हुई है, मिसकैरेज/अबॉर्शन हुआ है या फिर उन्होंने बच्चे को जन्म (Childbirth) दिया है, तो उनके आंतरिक अंग बेहद नाजुक स्थिति में होते हैं। डॉ. तान्या नरेंद्र सलाह देती हैं कि ऐसी स्थिति में शरीर को पूरी तरह हील होने और रिलैक्स रहने के लिए कम से कम 6 हफ्तों तक मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इस दौरान कप इंसर्ट करने से संक्रमण (Infection) और अंदरूनी चोट का खतरा बहुत ज्यादा रहता है।
4. वेजिनीस्मस (Vaginismus) की समस्या से पीड़ित महिलाएं
वेजिनीस्मस (Vaginismus) एक ऐसी मेडिकल कंडीशन है, जिसमें वेजाइना के आसपास की मांसपेशियां अनैच्छिक रूप से (अपने आप) बेहद सख्त और सिकुड़ जाती हैं। इस समस्या से जूझ रही महिलाओं को निजी अंग में कुछ भी इंसर्ट करने में अत्यधिक और असहनीय दर्द होता है। ऐसी स्थिति में टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप को अंदर डालना या बाहर निकालना न केवल बेहद दर्दनाक हो सकता है, बल्कि यह मांसपेशियों के तनाव को और ज्यादा बढ़ा सकता है।
5. मानसिक तौर पर कंफर्टेबल महसूस न होना
आज भी कई महिलाओं के लिए मेंस्ट्रुअल कप का विचार नया है और वे इसे शरीर के अंदर डालने (Insert) को लेकर मानसिक रूप से सहज नहीं हो पाती हैं। डॉ. तान्या का स्पष्ट कहना है कि किसी भी सोशल मीडिया ट्रेंड या दबाव में आकर इसका इस्तेमाल शुरू न करें। अगर आप इसे लेकर जरा भी संकोच में हैं या कंफर्टेबल महसूस नहीं कर रही हैं, तो जबरदस्ती इसका इस्तेमाल न करें। आपकी व्यक्तिगत सहूलियत और मानसिक शांति सबसे ज्यादा मायने रखती है।
मेंस्ट्रुअल कप से जुड़ा एक जरूरी नियम: यह कप हर उम्र की महिलाएं अपनी बॉडी साइज और ब्लड फ्लो के हिसाब से चुन सकती हैं। इसे एक बार लगाने के बाद सामान्य तौर पर 6 से 8 घंटे तक बदला जा सकता है। हालांकि, जिन महिलाओं को हैवी ब्लीडिंग (ज्यादा ब्लड फ्लो) होती है, उन्हें हाइजीन को ध्यान में रखते हुए हर 4 घंटे में इसे निकालकर साफ करना और दोबारा लगाना चाहिए।