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Crude Oil Price Drop : होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बावजूद कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, जानिए क्या भारत में सस्ते होंगे पेट्रोल-डीजल?

वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) से इस समय की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक (Burgenstock) में होने वाली दूसरे दौर की हाई-लेवल शांति वार्ता से ठीक पहले मिडिल ईस्ट और रणनीतिक रूप से संवेदनशील 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में कूटनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। इसके बावजूद, सोमवार 22 जून को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में कोई उछाल आने के बजाय भारी नरमी और गिरावट दर्ज की गई है।

इस अप्रत्याशित गिरावट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का भाव एक बार फिर 80 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे खिसक गया है, जिससे भारत सहित दुनिया भर के आयातक देशों ने बड़ी राहत की सांस ली है।

ब्रेंट क्रूड $79.60 पर आया, डब्ल्यूटीआई में भी 2% से ज्यादा की बड़ी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट से मिले ताजा आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट इस प्रकार है:

  • ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): अंतरराष्ट्रीय मानक माना जाने वाला ब्रेंट ऑयल आज $1.01 की सीधी गिरावट के साथ $79.60 प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है।

  • डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude): अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड के दाम में भी 2.02 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद यह बाजार में $75.77 प्रति बैरल के भाव पर ट्रेड कर रहा है।

बाजार के जानकारों के लिए यह गिरावट इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पर आंशिक असर पड़ने के बावजूद कीमतों में यह मंदी देखी जा रही है।

आखिर तनाव के बीच क्यों गिर रहा है कच्चे तेल का भाव?

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की सख्त पहरेदारी और धमकियों के बाद भी कच्चे तेल की कीमतों के टूटने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण काम कर रहे हैं:

  1. शांति समझौते की मजबूत उम्मीद: वैश्विक तेल बाजार और बड़े निवेशकों को पूरा भरोसा है कि स्विट्जरलैंड में अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर के बीच होने वाली दूसरे दौर की महावार्ता अंततः सफल रहेगी। बाजार को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच एक स्थायी शांति समझौता (Final Draft) पूरा हो जाएगा, जिससे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का खतरा हमेशा के लिए टल जाएगा।

  2. आसान व्यापार का रास्ता: निवेशकों का मानना है कि यदि यह डील फाइनल हो जाती है, तो होर्मुज को लेकर चल रहा संप्रभुता का विवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा और आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल का ग्लोबल ट्रेड काफी आसान और सुरक्षित हो जाएगा। इसी सकारात्मक सेंटीमेंट के चलते बाजार में बिकवाली देखी जा रही है।

ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज स्ट्रेट, शिपिंग कंपनियों में डर का माहौल

कूटनीतिक मोर्चे पर स्थितियां अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। हालांकि दोनों देशों के बीच युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा की गई थी, लेकिन पिछले दिनों परदे के पीछे से छिटपुट हमले जारी रहे। ईरान ने हाल ही में अमेरिका और इजरायल पर शुरुआती समझौता ज्ञापन (MoU) की शर्तों का खुला उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

इसी नाराजगी के चलते ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को कमर्शियल जहाजों की आवाजाही के लिए बंद करने का ऐलान कर दिया है। ईरान की इस सैन्य धमकी के बाद कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने जोखिम से बचने के लिए फिलहाल इस समुद्री रास्ते से गुजरने से परहेज करना शुरू कर दिया है, जिससे सप्लाई चेन पर थोड़ा दबाव बना है।

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने? क्या घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

कच्चे तेल की कीमतों में आई यह गिरावट भारत जैसे विशाल उपभोक्ता देश के लिए किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।

यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल लंबे समय तक 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बना रहता है, तो भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की इनपुट कॉस्ट (आयात लागत) में भारी कमी आएगी। इससे सरकारी खजाने पर सब्सिडी का बोझ कम होगा और आने वाले दिनों में देश के आम नागरिकों को घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद काफी बढ़ जाएगी।

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