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पेट्रोल बाइक की छुट्टी? पहली बार इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री ने छुआ 10% का जादुई आंकड़ा, खरीदारों ने बदला फैसला

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। सालों से सड़कों पर राज कर रही पेट्रोल मोटरसाइकिलों और स्कूटरों को अब पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक वाहनों से कड़ी टक्कर मिल रही है। देश के टू-व्हीलर सेगमेंट के इतिहास में पहली बार एक नया रिकॉर्ड बना है, जहां कुल दोपहिया वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (EV) की हिस्सेदारी ने 10% के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर लिया है। ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बदलाव केवल महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी लोग अब पेट्रोल के बढ़ते दामों से तंग आकर तेजी से ई-स्कूटर की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं।

क्यों घट रहा है पेट्रोल बाइक्स का क्रेज? ग्राहकों की पसंद बदलने की बड़ी वजह

भारतीय मध्यमवर्ग के लिए हर महीने पेट्रोल पर होने वाला खर्च बजट बिगाड़ रहा है, जो कि इस बड़े बदलाव का सबसे मुख्य कारण है। इसके साथ ही, अब बाजार में ओला (Ola Electric), एथर (Ather Energy), टीवीएस (TVS iQube) और बजाज (Bajaj Chetak) जैसी कंपनियों ने बेहद मजबूत और लंबी रेंज देने वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर्स पेश कर दिए हैं। ग्राहकों को अब समझ आने लगा है कि भले ही इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदते वक्त थोड़ी महंगी लगे, लेकिन लंबी अवधि में इसकी रनिंग कॉस्ट (प्रति किलोमीटर खर्च) पेट्रोल बाइक के मुकाबले ना के बराबर बैठती है। यही वजह है कि पारंपरिक 100cc और 125cc की पेट्रोल कम्यूटर बाइक्स की डिमांड में अब गिरावट देखी जा रही है।

इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और लोकल स्तर पर बढ़ता भरोसा

शुरुआती दिनों में लोगों के मन में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की चार्जिंग और बैटरी लाइफ को लेकर जो डर था, वह अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। देश के प्रमुख राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और दिल्ली-एनसीआर के कोने-कोने में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। स्थानीय डीलर्स और सर्विस सेंटर्स की उपलब्धता ने भी स्थानीय स्तर पर ग्राहकों का भरोसा जीता है। इसके अलावा, कई राज्य सरकारें रोड टैक्स में छूट और लोकल सब्सिडी दे रही हैं, जिससे स्थानीय बाजारों (Local Auto Markets) में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री को जबरदस्त बूस्ट मिल रहा है।

क्या आने वाले दिनों में पूरी तरह बंद हो जाएंगी पेट्रोल गाड़ियां?

यह 10 फीसदी का आंकड़ा ऑटो सेक्टर के लिए एक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। जानकारों के मुताबिक, जिस तेजी से बैटरी टेक्नोलॉजी एडवांस हो रही है और इसकी कीमतें कम हो रही हैं, उससे यह साफ है कि आने वाले दो से तीन सालों में यह हिस्सेदारी 20 से 25 फीसदी तक पहुंच सकती है। ऑटोमोटिव कंपनियों (SIAM) के हालिया आंकड़े भी इसी ओर इशारा करते हैं कि आने वाला समय पूरी तरह से क्लीन एनर्जी का है। अब पेट्रोल टू-व्हीलर बनाने वाली बड़ी कंपनियों को भी बाजार में टिके रहने के लिए अपनी रणनीति बदलकर पूरी तरह इलेक्ट्रिक सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

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