क्या आप भी लोहे की कढ़ाई में पकाते हैं खाना? सेहत को मिलते हैं जबरदस्त फायदे

भारतीय रसोइयों में सदियों से लोहे के बर्तनों, विशेषकर लोहे की कढ़ाई का उपयोग होता आया है। आधुनिक समय में नॉन-स्टिक और एल्युमिनियम के बर्तनों के बढ़ते चलन के बीच एक बार फिर लोग पुरानी और पारंपरिक कुकिंग स्टाइल की तरफ लौट रहे हैं। डॉक्टरों और डाइटीशियनों का भी मानना है कि लोहे की कढ़ाई में खाना पकाना सेहत के लिए बेहद गुणकारी है, क्योंकि इससे भोजन में प्राकृतिक रूप से आयरन की मात्रा बढ़ जाती है। हालांकि, यह पारंपरिक तरीका हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है। कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों से जूझ रहे लोगों को लोहे के बर्तनों में बने भोजन से दूरी बना लेनी चाहिए, नहीं तो यह शरीर में गंभीर टॉक्सिसिटी का कारण बन सकता है।
शरीर में खून की कमी होगी दूर, जानिए लोहे की कढ़ाई में खाना बनाने के जादुई फायदे
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, लोहे की कढ़ाई में खाना पकाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब भोजन इस धातु के संपर्क में आकर उबलता या पकता है, तो कढ़ाई से आयरन के सूक्ष्म कण खाने में आसानी से मिल जाते हैं। यह प्रक्रिया शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ाने में मदद करती है। जो लोग एनीमिया यानी शरीर में खून की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं, विशेषकर महिलाएं और बच्चे, उनके लिए लोहे की कढ़ाई में तैयार भोजन किसी औषधि से कम नहीं है। इसके अलावा, लोहे के बर्तनों में आंच समान रूप से फैलती है, जिससे खाना धीमी आंच पर अच्छी तरह पकता है और उसके पोषक तत्व नष्ट नहीं होते।
किन लोगों को लोहे की कढ़ाई से रहना चाहिए दूर? सेहत को हो सकते हैं ये बड़े नुकसान
जहां एक तरफ लोहा शरीर को मजबूती देता है, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों के लिए यह जहर के समान काम कर सकता है। जिन लोगों के शरीर में पहले से ही आयरन की मात्रा बहुत अधिक है या जो 'हीमोक्रोमैटोसिस' (Hemochromatosis) नाम की आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें लोहे के बर्तनों में बना खाना सख्त मना होता है। शरीर में अत्यधिक आयरन जमा होने से लीवर सिरोसिस, हार्ट फेलियर और किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही, जिन लोगों का पाचन तंत्र बेहद कमजोर है या जिन्हें लगातार पेट में छालों (अल्सर) की शिकायत रहती है, उन्हें भी लोहे के बर्तनों में अत्यधिक भारी या तैलीय भोजन पकाने से बचना चाहिए।
भूलकर भी न पकाएं ये चीजें, उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत की रसोइयों के लिए जरूरी नियम
लखनऊ सहित पूरे उत्तर भारत की रसोइयों में लोहे की कढ़ाई का इस्तेमाल बहुत आम है, लेकिन इसे लेकर कुछ जरूरी नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक है। लोहे की कढ़ाई में कभी भी खट्टी चीजें जैसे टमाटर की प्यूरी, नींबू का रस, इमली, कढ़ी या सिरके वाली डिशेज नहीं पकानी चाहिए। खट्टे खाद्य पदार्थों में मौजूद एसिड लोहे के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया (केमिकल रिएक्शन) करता है, जिससे खाने का स्वाद तो कड़वा और काला होता ही है, साथ ही यह पेट में जाकर फूड पॉइजनिंग और गैस की समस्या भी पैदा कर सकता है। भोजन पक जाने के तुरंत बाद उसे लोहे की कढ़ाई से निकालकर किसी दूसरे कांच या स्टील के बर्तन में पलट देना चाहिए ताकि भोजन का रंग और पोषक तत्व पूरी तरह सुरक्षित रहें।